Sunday, February 22, 2026
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विश्व कैंसर दिवस पर विशेष: रोगियों के लिए जिला अस्पताल में नहीं कोई सुविधा

  • हर साल बढ़ रहे रोगी, जांच के बाद कर दिया जाता है रेफर

सैय्यद मशकूर |

सहारनपुर: कैंसर जैसी घातक बीमारी का जिला अस्पताल में न तो इलाज है न ही कोई और उत्तम प्रबंध। दरअसल, डाक्टर ही नहीं हैं। इस बीमारी के इलाज की बात बेमानी ही है। वैसे भी हर साल कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। सन 2020 में 22 केस मिले हैं। इनमें दो ब्रेस्ट कैंसर के और पांच केसर ओरल के हैं। पंंद्रह अन्य रोगी गले व लंग्स आदि के हैं। सन 2019 में जबकि 19 केस मिले थे।

कैंसर ऐसी लाइलाज बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही इंसान की रूह कांप उठे। सहारनपुर की बात करें तो मंडल मुख्यालय होने के बावजूद जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक में कैंसर के इलाज की माकूल व्यवस्था क्या कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि जब कैंसर का कोई मरीज मिलता है तो उसे सिर्फ रेफर कर दिया जाता है।

यहां कोई सुविधा ही नहीं है। जबकि कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। 2019 में अप्रैल से दिसंबर तक 19 लोग इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल ने जांच में कैंसर की पुष्टि तो की, लेकिन मेडिकल कॉलेज तक में कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर और दवाएं न होने के नाते उन्हें रेफर कर दिया गया।

यहां संभव नहीं है इलाज

तंबाकू को कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में जिला अस्पताल में तंबाकू मुक्त परामर्श केंद्र अवश्य स्थापित है। वर्तमान में यहां पहुंचने वाले मरीजों की डा. बुशरा अंसारी प्रतिदिन काउंसिलिंग करती हैं और तंबाकू उत्पाद छुड़ाने के लिए जरूरी दवाएं देती हैं। इसके अलावा कैंसर की सामान्य जांच की सुविधा भी है पर और कोई इलाज यहां संभव नहीं है।

कैंसर से बचाव के तरीके

  • डिब्बों में बंद रेडीमेड खाना न खाएं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें और सफाई का ध्यान रखें।
  • तंबाकू से बने उत्पादों से दूर रहें।
  • हरसंभव शराब से दूर रहें।
  • रेट मीट न खाएं और नियमित रूप से करते रहें व्यायाम।

महिलाओं को विशेष सतर्कता जरूरी

महिलाओं में ब्रेस्ट और योनि कैंसर लगातार बढ़ता जा रहा है। चिकित्सकों की मानें तो देरी से बच्चे पैदा करना या बच्चे न होना, पीरियड्स का गड़बड़ाना भी कैंसर की वजह बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतें।

योनि कैंसर के लक्षण

  • पीरियड का गड़बड़ाना और पेट में दर्द होना।
  • ज्यादा बच्चे पैदा करना।
  • 16 साल से पहले या 40 साल के बाद शादी करना।
  • फैमिली हिस्ट्री यानी परिवार में किसी अन्य को हुआ हो।

    सीएमओ डाक्टर बीएस सोढ़ी ने कहा कि जिला अस्पताल में जांच की सुविधा है। लेकिन, यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ का अभाव है। अभी यहां कैंसर रोगियों का माकूल इलाज संभव नहीं है।

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