- एक अरसे से विकास कार्यों की राह देख रहे लोग
- अब भी 26 गांवों को और नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव शासन में
- पिछले ही गांवों में पार्षद भी नहीं करा पाये कार्य
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम लगातार सीमा का विस्तार तो करता जा रहा है, लेकिन जो गांव पहले नगर निगम की सीमा में शामिल हो चुके हैं। आज तक उन गांवों में ही विकास कार्य नहीं हो पाये हैं। अब भी पिछले पांच-छह सालों से 26 और गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन में अटका है, लेकिन नगर निगम अभी उन गांवों में ही विकास नहीं करा पाता जो पहले शामिल हुए थे। ऐसे में जो प्रस्ताव शासन में है। अगर वह गांव और सीमा में शामिल होते हैं तो कार्य और भी मुश्किल हो जाएंगे।
बता दें कि मेरठ की नगर निगम सीमा का विस्तार करने के प्रयास पिछले कई सालों से चले आ रहे हैं, लेकिन इससे पूर्व भी मेरठ नगर निगम की सीमा का विस्तार किया गया था। जिसमें काजीपुर, घोसीपुर, जाहिदपुर समेत कई गांव नगर निगम की सीमा में शामिल हुए थे और नये वार्ड बनाये गये थे। वर्ष 2001 में मेरठ नगर निगम सीमा में 80 वार्ड थे। इसके बाद यहां सीमा का विस्तार हुआ और कई गांव नगर निगम क्षेत्र की सीमा में शामिल हुए।
यहां आबादी लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों की संख्या बढ़ी और यहां वार्डों की संख्या को बढ़ाकर 90 कर दिया गया। वर्ष 2011 में यहां 90 वार्ड हो गये थे। इसके बाद से यहां अभी तक 90 वार्ड ही हैं। शासन कुछ वर्ष पूर्व नगर निगम के सीमा विस्तार का प्रस्ताव मांगा था। इस पर नगर निगम ने मेरठ शहर के सीमा विस्तार के लिये कमेटी गठित कराकर सर्वे कराया था।
शासनादेश 31 जनवरी 2015 में सीमा विस्तार संबंधी दिए गए मानकों के अनुरूप नगर निगम सीमा से लगे 26 राजस्व गांवों में नगरीकरण के लिए पात्र पाते हुए इन्हें नगर निगम मेरठ की सीमा में सम्मलित करते हुए नगर निगम बोर्ड बैठक में गत छह अगस्त 2016 को पास कराया था। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त आलोक सिन्हा ने गत 19 सितंबर 2016 को सीमा विस्तार का प्रस्ताव प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग सात के पास भेज दिया था, लेकिन तब से अब तक यह प्रस्ताव शासन में अटका है।
बढ़े वार्डों में नहीं हुए कार्य, लोग परेशान
नगर निगम की सीमा का विस्तार होने से वार्डों की संख्या भी बढ़ी। यहां बढ़कर 10 वार्ड हो गये। जिसमें काजीपुर, लोहिया नगर, कासमपुर यानि कंकरखेड़ा और गढ़ रोड समेत तमाम क्षेत्र के काफी गांव शहर की सीमा में शामिल हुए। यहां अगर हम वार्ड-33 की बात करें तो इस वार्ड में जाहिदपुर गांव आता है जो कि नगर निगम की सीमा में शामिल हुआ था, लेकिन अगर इस गांव के हालातों की बात की जाये तो यहां घरों के पानी की निकासी तक नहीं है।
नालियों का पानी यहां सड़कों पर बह रहा है। खड़ंजों का निर्माण कार्य तक नहीं हो पाया है। नगर निगम अधिकारियों से बात की जाये तो उनके पास यहां बजट ही नहीं होता। अगर सीमा का विस्तार इसी प्रकार से होता रहा तो विकास कार्य कहां से होंगे। यहां की पार्षद सितारा बेगम की बात करें तो अभी तक उनकी ओर से यहां एक भी कार्य नहीं कराया गया। क्षेत्र में कुछ लाइटें जरूर लगी वो भी यहां एमडीए की ओर से लगवाई गर्इं थी।
इन गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव
नगर निगम ने सीमा विस्तार के प्रस्ताव में मेरठ शहर के चारों तरफ के 26 गांवों को शामिल किया है। जिसमें हाजीपुर, बजौट, जुर्रानपुर, जलालपुर, महरौली, अमीनगर उर्फ भूड़बराल, मोहिउद्दीनपुर, गगोल, मोहम्मदपुर गूमी, शकरपुर, अल्लीपुर जिजमाना, घाट, पांचली खुर्द, अम्हेड़ा आदिपुर, सलारपुर जलालपुर, रजपुरा, कमालपुर, दतावली गेसूपुर, राली चौहान, मामेपुर, हसनपुर कदीम, सिंघावली, पावली खास, सिवाया जमालुल्लापुर, दुल्हैड़ा चौहान और जेवरी आदि गांव शामिल हैं।
नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश सिंह ने बताया कि वर्तमान में नगर निगम सीमा में मेरठ कस्बे को मिलाकर 48 गांव शामिल है। अगर शासन 26 गांवों को शामिल करने के प्रस्ताव पर निर्णय लेता है तो नगर निगम सीमा में कुल 74 गांव शामिल हो जाएंगे।
बढ़ जाएंगे वार्ड, कहां से होगा विकास?
अगर यह 26 गांव और नगर निगम की सीमा में शामिल हो गये तो शहर में वार्डों की संख्या 90 से बढ़कर 110 होगी। अभी 90 वार्डों के विकास की ही बात करें तो अभी तक यहां जो गांव नगर निगम में शामिल हुए थे। वहीं पर कार्य नहीं हो सके हैं। ऐसे में जो नये गांव शामिल होंगे वहां कार्य किस प्रकार से हो पाएंगे यह कह पाना मुश्किल है।

