- आधुनिकता की दौड़ में रसोईघर से गायब हुए मिट्टी के बर्तन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्राचीन काल से मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग खाना बनाने और पानी पीने के लिये किया जाता रहा है। एक समय था, जब लोग चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन ही इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकता का दौर आया रसोईघर से मिट्टी के बर्तन लुप्त होते चले गए और स्टील व अन्य धातुओं के बर्तनों ने उनकी जगह ले ली। गर्मी से हर कोई परेशान है। ऐसे मे लोग शरीर को राहत पहुंचाने के लिये ठंडे पानी पी रहे हैं।
इसको देखते हुए डॉक्टर लगातार फ्रीज का ठंडा पानी पीने के लिए मना कर रहे हैं और घड़ों की तरफ तवज्जो दे रहे हैं। सेहत के लिए फ्रीज का पानी हानिकारक होता है, क्योंकि ये गले की कोशिकाओं का तापमान एकदम से गिरा देता है। जिस कारण टॉन्सिल, गले में खराश व खांसी होने की संभावना बढ़ जाती है।
बाजार में आए डिजाइनर बोतल और मटके
लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इस बार बाजारों में डिजाइनर व आकर्षक बोतलें, मटके व कैम्पर तैयार किए गए हैं। इन बोतलों और मटकों पर रंग-बिरंगे फूल और पत्तियों की नक्काशी की गई है। टोंटी को उठाएं और ग्लास आसानी से भर जाए। वहीं, बोतलों में एयर टाइट ढक्कन की सुविधा दी गयी है।
मेडिकल स्थित दुकानदार लोकेश बताते हैं कि वह पिछले 40 साल से यहां दुकान कर रहे हैं। सर्दियों के दिनों में काम धीमा चलता है पर गर्मियों में अच्छी कमाई हो जाती है। लोग न सिर्फ मिट्टी के बर्तन खरीदते हैं, बल्कि गमले, माता की मूर्ति, गुल्लक, दीपक, करुए आदि खरीदने आते हैं।
दुर्गा हैंडीक्राफ्ट के मलिक शिवम बताते हैं कि वह पिछले 25 साल से दुकान कर रहे हैं। उनसे पहले उनके पिता इस दुकान पर बैठा करते थे। बताते हैं कि वह मिट्टी का सामान हरियाणा, हापुड़, परतापुर, दिल्ली स्थित गांव से लाते हैं।
गर्मी में बढ़ जाता है कारोबार
दुकानदार लोकेश बताते हैं कि तीन महीने यानि दिसंबर, जनवरी व फरवरी में कारोबार बहुत ही धीमा चलता है, लेकिन बीते कुछ सालों से मार्च आते ही वातावरण का तापमान बढ़ने के कारण कारोबार गर्मी का मौसम आने से पहले ही रफ्तार पकड़ लेता है। गर्मी आते ही मिट्टी के बर्तनों की डिमांड बढ़ने लगती है। इसमें मिट्टी का तवा, बोतल, घड़ा, सुराही आदि शामिल हैं।

