- गाड़ी ही नहीं, ड्राइवर भी भेजना जरूरी, गाड़ी को ढापने को कवर और तिरपाल भी चाहिए
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चुनाव ड्यूटी के लिए प्राइवेट गाड़ियों को लेकर रियायत की उम्मीद किए बैठे लोगों को झटका लगा है। चुनाव आयोग के आदेशों का हवाला देते हुए अफसरों ने किसी प्रकार की रियायत से इंकार कर दिया है। साथ ही दो टूक कह दिया है कि मंगलवार से गाड़ी पहुंचाने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केवल गाड़ी ही नहीं भेजनी है उसका ड्राइवर भी चाहिए और गाड़ी को ढ़कने वाला कवर या तिरपाल भी होना जरूरी है। गाड़ियों को लेकर अफसरों के अपने तर्क हैं। उनका कहना है देश का बड़ा चुनाव है हजारों काम होते हैं। बाहर से अफसर आए हुए हैं, सभी का गाड़ी चाहिए, फिर चुनाव आयोग का आदेश है। इसमें लोकल अफसरों का तो कोई रोल ही नहीं है। फिर गाड़ी फ्री में नहीं ली जा रही है। जो भाड़ा तय किया गया है, वो भी दिया जाएगा।
चुनाव ड्यूटी के लिए प्रशासन के द्वारा एसपी ट्रैफिक की मार्फत सेवन सीटर गाड़ियों को लेकर हंगामा बरपा है। इसको लेकर कुछ अफसर नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं। इसको लेकर आॅफ द रिकार्ड नाम न छापे जाने की शर्त पर बात करने को राजी हुए बडेÞ अफसर ने कहा कि वो प्रदेश में तमाम जनपदों में चुनाव टीम का हिस्सा रहे हैं। जब भी चुनाव होते हैं प्राइवेट गाड़ियां यूज करने की परंपरा रही है। लोकसभा के चुनाव में प्रदेश ही नहीं देश भर में प्राइवेट गाड़ियां मंगाई जा रही हैं, लेकिन मेरठ में इसको लेकर ज्यादा नुकताचीनी की जा रही है। यह हाल तो तब है जब गाड़ी को लेकर सिफारिश करने वाले भी जनते हैं कि सरकारी काज है, अफसर की अपनी मर्जी इसमें नहीं चलती। मेरठ को जहां दूसरे चरण में चुनाव कराया जा रहा है उस सूची में शामिल किया गया है।
यहां 26 अप्रैल को मतदान होना है। 23 अप्रैल यानि मंगलवार को गाड़ियां तलब की गयी हैं। इसके लिए नोडल अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेशों का हवाला देकर नोटिस जारी किया गया है, नोटिस जारी कर जिले के तमाम प्राइवेट कार मालिकों से चुनाव ड्यूटी के लिए उनकी गाड़ी बताए गए स्थान पर जमा करने को कहा गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित कार मालिक को अपनी गाड़ी 23 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे रिजर्व पुलिस लाइन में प्रभारी निर्वाचन अधिकारी (यातायात) को सुपुर्द करनी होगी। संबंधित मालिक अपनी गाड़ी को अपने खर्चे पर अच्छी हालत में रखेगा और अगर गाड़ी को कोई नुकसान पहुंचता है तो जिला निर्वाचन अधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी। संबंधित गाड़ी के लिए तिरपाल जैसी व्यवस्था भी मलिक को ही करनी पड़ेगी।
घबराएं नहीं मिलेगा किराया
जिन्हें यह नोटिस पहुंचे हैं उन्होंने भी नाम ना छापे जाने की शर्त पर बताया कि जो नोटिस मिला है उसमें बताया गया है कि जिला प्रशासन, संबंधित गाड़ी मालिक को उसकी गाड़ी के एवज में चुनाव आयोग के द्वारा जो शुल्क गाड़ी का तय किया गया है, वह भी देगा। यह नोटिस जिले के तमाम प्राइवेट कार मालिकों को भेजा गया है।
नोटिस में क्या है?
जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित कार मालिक को अपनी गाड़ी 23 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे रिजर्व पुलिस लाइन में प्रभारी निर्वाचन अधिकारी (यातायात) को सुपुर्द करनी होगी। नोटिस में यह भी कहा गया है कि संबंधित मालिक अपनी गाड़ी को अपने खर्चे पर अच्छी हालत में रखेगा और अगर गाड़ी को कोई नुकसान पहुंचता है तो जिला निर्वाचन अधिकारी को इसकी सूचना देगा। संबंधित गाड़ी के लिए तिरपाल जैसी व्यवस्था भी मलिक को ही करनी पड़ेगी।
कानून में है प्रावधान
एक वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेन्द्र वर्मा काजीपुर ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 160 में चुनाव से जुड़े काम के लिए परिसर, वाहन की मांग का प्रावधान है। धारा 160 की उपधारा 1 के खंड ख में कहा गया है कि किसी भी मतदान केंद्र तक या वहां से मतपेटियों के परिवहन, या ऐसे चुनाव के संचालन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के सदस्यों के परिवहन या परिवहन के उद्देश्य से किसी वाहन, जहाज या जानवर की आवश्यकता होती है या होने की संभावना है तो सरकार लिखित आदेश द्वारा ऐसे परिसर या ऐसे वाहन, जहाज, जानवर की संबंधित व्यक्ति से मांग कर सकती है।
इनकी गाड़ियां नहीं ले सकते अफसर
धारा 160 की उपधारा 1 के खंड ख में इस बात का भी प्रावधान है कि किन परिस्थितियों में प्रशासन आपकी गाड़ी नहीं ले सकता है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी गाड़ी या वाहन का इस्तेमाल किसी उम्मीदवार या उसके एजेंट द्वारा या किसी प्रत्याशी के चुनाव से जुड़े काम में कानूनी तौर पर किया जा रहा है तो इस उप-धारा के तहत प्रशासन उसकी गाड़ी नहीं मांग सकता। धारा 160 की उपधारा 2 में साफ-साफ कहा गया है कि सरकार अथवा प्रशासन यह मांग संपत्ति के मालिक या वाहन मालिक संबोधित एक लिखित आदेश द्वारा करेगा और संबंधित व्यक्ति को इस आदेश को निर्धारित तरीके से तामील करना होगा।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी कहते हैं कि चुनाव ड्यूटी के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की गाड़ियां सरकार अधिग्रहित कर सकती है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में बाकायदा इसका प्रावधान है। वह कहते हैं कि चुनाव में हजारों गाड़ियों की जरूरत पड़ती है और जाहिर तौर पर सरकार के पास इतनी गाड़ियां नहीं हैं। इसलिये वह हर तरह की गाड़ी, चाहे प्राइवेट हो या कॉमर्शियल, अपने कब्जे में ले सकती है। सरकार अथवा प्रशासन की कोशिश होती है कि अगर आपके घर में सिर्फ एक गाड़ी है तो उसका अधिग्रहण न किया जाए। गाड़ियों का अधिग्रहण ड्राइवर के साथ ही किया जाता है और यह पूरी तरह कानूनी है। बदले में किराया दिया जाता है।

