- नया सत्र शुरू हुए एक माह का समय बीता
- पिछले सत्र में पास हुए छात्रों को नहीं मिला रिपोर्ट कार्ड
- कक्षा पांचवीं और आठ पास करने वाले बच्चों से दूसरे स्कूूलों में मांगा जा रहा रिपोर्ट कार्ड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकारी शिक्षा व्यवस्था का एक और हैरान करने वाला नमूना सामने आया है। सत्र 2021-22 में शिक्षा लेने वाले छात्रों को अभी तक भी रिपोर्ट कार्ड जारी नहीं हुए हैं। जबकि नया सत्र शुरू होने से पहले ही रिपोर्ट कार्ड जारी हो जाने चाहिए। अब जो बच्चे पास होने के बाद दूसरे विद्यालयों में दाखिला लेने पहुंचे हैं। वह रिपोर्ट कार्ड नहीं मिलने से अपने आपको ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों के भविष्य से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका उदाहरण है कि नया सत्र शुरू होने के बाद भी अभी तक छात्रों को रिपोर्ट कार्ड वितरित नहीं किए गए हैं। ऐसे में बच्चों ने किस विषय में कितने अंक प्राप्त किए हैं। उनके पास इसका कोई सुबूत नहीं है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से इस प्रकरण को लेकर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब जिले के जिम्मेदार अधिकारी ही जवाब देने से बचने लगे हैं तो इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि मामला कितना गंभीर है और किसी के पास इसका जवाब नहीं है।
दो रुपये प्रति छात्र रिजल्ट की कीमत निर्धारित की है बीएसए ने
बीएसए द्वारा दो रुपये प्रतिकार्ड की दर से रिपोर्ट कार्ड छपवाने की बात सामने आ रही है, लेकिन इनती कम कीमत में कोई प्र्रिंटिंग प्रैस छापने को तैयार नहीं। ऐसे में छात्रों को रिपोर्ट कार्ड कब मिलेंगे? इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
पांच लाख से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर
पूरे जिले में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पांच से सात लाख बताई जा रही है, लेकिन इन छात्रों ने 2021-22 के सत्र में शिक्षा लेने के बाद किस विषय में कितने अंक हासिल किए हैं। इसकी कोेई जानकरी इनके पास नहीं है।
पूरे जनपद में 16 खंड शिक्षा अधिकारी
जिले में 16 खंड शिक्षा अधिकारी है। जिनकी जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र में आने वाले सभी स्कूलों के छात्रों के रिपोर्ट कार्ड प्रिंट कराकर वितरित कराएं, लेकिन नया सत्र शुरू हुए भी एक माह का समय बीतने जा रहा है, मगर छात्रों को रिपोर्ट कार्ड नहीं दिए गए हैं।
31 मार्च तक छात्रों को दिए जाने थे रिपोर्ट कार्ड
शासन का आदेश था कि सभी छात्रों को 31 मार्च तक रिपोर्ट कार्ड मिल जाने चाहिए, लेकिन उसकी भी अनदेखी की जा रही है। तय समय पर भी आदेश का पालन नहीं होने पर तीन दिन और बढ़ाए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं।

