- कोरोना नियमों के साथ खुले स्कूल में छात्रों की संख्या कम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सोमवार को रोहटा रोड स्थित गॉडविन पब्लिक स्कूल में भी छात्रों की चहल-पहल नजर आई। डेढ़ माह बाद स्कूल खुलने पर बड़ी संख्या में बच्चे अपनी कक्षाओं में पहुंचे। इस दौरान शिक्षकों ने बच्चों का फूलों से स्वागत किया। जिसके बाद बच्चों से कोरोना गाइडलाइनों का पालन कराया गया। स्कूल पहुंचते ही बच्चों के चेहरे खिले हुए नजर आए, छात्र अपने सहपाठियों से भी मिलकर खुश दिखाई दिए।

सोमवार को सभी स्कूल खुले जरूर, लेकिन सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या काफी कम रही। इसके पीछे वजह बच्चों का मन स्कूलों में नहीं लगना था। शिक्षकों नें बच्चों को कोरोना गाइडलाइनों के साथ स्कूलों में प्रवेश कराया। छात्रों का मन स्कूल में लगे इसके लिए उन्हें पहले दिन पढ़ाई पर अधिक जोर देने के बदले अन्य एक्टिविटी पर जोर दिया। बच्चों को खेलने का मौका दिया और मनोरंजन के साथ स्कूल के वातावरण में रमने का समय दिया।
वहीं, मोहनपुरी के स्कूल में पहले दिन शिक्षकों को दूसरी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान इस स्कूल में पोलिंग बूथ बनाया गया था। जिसके चलते यहां पर लगे एलइडी बल्बों की चोरी, एक्सटेंशन बोर्ड नदारद व शौचालय में गंदगी का अंबार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
शिक्षकों ने बताया कि इस स्कूल में कुल 102 छात्र है। जिनमें से पहले दिन केवल 17 बच्चे ही पहुंचे। जबकि पांच शिक्षक है जो स्कूल पहुंचे। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में भी कुल 18 बच्चे हैं, लेकिन केवल चार बच्चे ही पहुंचे। प्राथमिक विद्यालय जयभीम नगर में 132 छात्र है, लेकिन पहले दिन केवल 45 बच्चें ही स्कूल पहुंचे। स्कूलों में प्रवेश करने से पहले सभी बच्चों के हाथों को सैनिटाइज कराया गया।
जो बच्चे अपने घरों से मास्क लगाकर नहीं पहुंचे थे, उनको मास्क दिये गए। बच्चों के कम आने की वजह पर अगर गौर किया जाए तो सोमवार को स्कूल खुलने के बाद फिर दो दिन का अवकाश है। इसके चलते भी बच्चों की संख्या कम रही, हालांकि गुरुवार से सभी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में इजाफा होने का अनुमान है।
प्रिंसपल शिखा शर्मा ने बताया कि उन्हें स्कूल में बच्चों के लिए विभाग की तरफ से कोरोना गाइडलाइनों का पालन करने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। सैनिटाइजर व मास्क की व्यवस्था उनके द्वारा ही की गई है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनकी जिम्मेदारी है, जिसे वह बखूबी निभा रही है।

