Friday, March 20, 2026
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शुक्ला रमन ने स्वयं सहायता के जरिए लिखी सफलता की इबारत

  • 30 हजार का ऋण ले कमा रही प्रति माह दस हजार रुपये
  • ऋण लेकर पांच बीघा कृषि भूमि किराए पर ले पैदा की फसल
  • महिला स्वयं सहायता जुड़कर बीएड की परीक्षा उत्तीण भी की

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: इंसान में अगर हौसला और कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो फिर वह सफलता के आसमान पर चमक जाता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया जलालाबाद देहात की महिला शुक्ला रमन ने। वह महिला उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में समूह से जुड़ी और फिर शुक्ला रमन का सपना साकार हो गया।

इसके चलते आज वह जहां दस हजार रुपये प्रतिमाह कमाने लगी है, वहीं महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बीएड की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुकी है।

ब्लॉक थानाभवन की ग्राम पंचायत इरशादपुर माजरा जलालाबाद देहात में नारी स्वयं सहायता समूह ‘भारत माता महिला ग्राम संगठन समूह’ का गठन एक मई 2015 किया गया था। महिला स्वयं सहायता समूह से शुक्ला रमन जुड़ी और आजीविका मिशन के कैडर से अपने सपने को साकार किया।

शुक्ला रमन बेझिझक बताती हैं कि समूह में जुड़ने से पहले उसके घर की माली हालत बहुत खराब थी। पति श्याम सिंह बेरोजगार होने के साथ-साथ बीमार रहते थे। रिश्तेदारों की मदद से घर खर्च चल रहा था। ग्राम की आशा दीदी ने शुक्ला रमन को बताया कि विकास खंड से टीम आ रही है, आप समूह से जुड़ जाओ। जिस पर रमन शुक्ला समूह से जुड़ गई और समूह सखी बन गई।

समूह से 30 हजार रुपये ऋण लेकर 5 बीघा कृषि भूमि किराए पर ली जबकि कुछ जमीन पहले से ही पास थी। साथ ही, उस जमीन में गन्ना एवं धान की फसल पैदा की। फसल से साल में 1.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। उसके बाद समूह से लिया ऋण चुका दिया। इस बीच शुक्ला रमन ने बीएड की। फिर, समूह में जुड़ने के बाद बच्चों को स्कूल भेजना प्रारंभ किया। नियमित रूप से समूह में बचत जमा की और समूह की बैठकों में भाग लिया।

इसी बीच शुक्ला रमन को बताया गया कि आंतरिक सामुदायिक रिसोर्स पर्सन में चयन होना है। अत: शुक्ला रमन ने क्लस्टर पर आवेदन किया जिस पर मेरा चयन आईसीआरपी के पद पर हो गया। चयन के बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई, शामली के क्षरा समूह गठन करने के लिए बिजनौर जनपद के ब्लॉक नजीबाबाद, बागपत के ब्लॉक पिलाना, सहारनपुर के ब्लॉक पुंवारका तथा शामली जनपद के ब्लॉक ऊन में जाने का अवसर मिला।

शुक्ला रमन के अनुसार, एक विकास खंड के ग्रामों में 45 दिन समूह गठन के लिए रहना होता था। इसके लिए आजीविका मिशन से 22,500 रुपये मानदेय के रूप में प्राप्त हुए। बाह्य जनपदों में समूह बनाने के कार्य में 1.50 लाख की आय अर्जित हुई। जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो गई।

शुक्ला रमन के अनुसार, इसके बाद आजीविका मिशन की तरफ से आंतरिक प्रोफेशनल रिसोर्स पर्सन (आईपीआरपी) के चयन के लिए आयोजित परीक्षा में प्रतिभाग किया। जिसमें आईपीआरपी के रूप में चयनित हुई। फिर, कांधला ब्लॉक क्षेत्र के संस्कृति महिला संकुल स्तरीय संघ, जसाला में कार्य करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया।

आईपीआरपी के रूप में कार्य करने पर 2000 रुपये यात्रा भत्ता, 500 रुपये मोबाइल भत्ता एवं 200 रुपये प्रतिदिन सेवा शुल्क प्राप्त होगा। आईपीआरपी कैडर में आने से मुझे 10 हजार रुपये महीने का मानदेय जिला मिशन प्रबंधन इकाई, शामली द्वारा दिया जाएगा।

शुक्ला रमन ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर एवं सशक्त हुई। साथ ही, अपने पति का ईलाज कराया। अब पति ने भी कृषि कार्य करना शुरू कर दिया है। शुक्ला रमन का सपना प्रोफेशनल के रूप में ब्लॉक मिशन प्रबंधक के पद पर चयनित होकर गरीब महिलाओं के लिए कार्य करना है।

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