Wednesday, April 1, 2026
- Advertisement -

सूर्य और छाता

Amritvani 22


बाप और बेटा कहीं जा रहे थे। गर्मी के दिन थे। सूरज निकल चुका था। धूप बहुत तेज हो गई थी। बेटे ने छाता लगा लिया। बाप ने बेटे से कहा, ‘बेटा, छाता जरा पूरब की ओर रखा करो। ‘बेटे ने वैसा ही किया। दिन ढलने लगा। वह लड़का छाता लेकर अकेले ही घूमने निकल पड़ा। उसने छाता खोल लिया। लेकिन उस समय सूरज पश्चिम की ओर था। तब भी छाता उसने पूरब की ओर ही रखा।

ऐसा उसने इसलिए किया कि पश्चिम की ओर रखने से पिता की आज्ञा भंग होती है। रास्ते में उसे कई आदमी मिले। सबने कहा कि छाता ठीक से लगा लो, लेकिन वह किसी की बात क्यों मानने लगा। उसने सबसे यही कहा _ ‘पिताजी का आदेश है। मैं पश्चिम की ओर छाता कैसे कर सकता हूं?’ लोगों ने जाकर यह बात उसके बाप को बताई। उसने बेटे को समझाया कि मैंने सुबह छाता पूरब की ओर रखने को इसलिए कहा था कि उस समय सूरज पूरब की ओर था। सूरज की किरणें पूरब से आ रही थीं और इस समय सूरज की किरणें पश्चिम से आ रही हैं।

अत: छाता पश्चिम की ओर ही रखना चाहिए। क्योंकि तुम्हें धूप से बचने के लिए इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा कि सूरज कहां है? बाप की सीख बेटे की समझ में आ गई। वह समझ गया कि आज्ञा-पालन और अंध-भक्ति दो अलग-अलग बातें हैं। अत: मनुष्य को वस्तुस्थिति के साथ ही कर्म करना चाहिए। अपने मस्तिष्क का प्रयोग कर यह जानना चाहिए कि हमारा और संसार का भला किस कर्म में है। किसी की भी अंध-भक्ति से अनुसरण नहीं करना चाहिए।


janwani address 9

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

डीपफेक पूरी तरह नकारात्मक नहीं

हम उस युग में रह रहे हैं जिसे विशेषज्ञ...

बुनियादी शिक्षा को खोना सही नहीं

वी गर्ग विद्यार्थियों को अपनी रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने...

लड़कियों को शिक्षित करने का महत्व

डॉ विजय गर्ग शिक्षा केवल एक मौलिक अधिकार नहीं...

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

एक सप्ताह बाद गुड़की घर पर आया। मैंने पूछा,...

अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ सकतीं हैं मुश्किलें

अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष चलता...
spot_imgspot_img