Tuesday, April 7, 2026
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बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा पर निकले सुपरस्टार रजनीकांत

  • हमेशा की तरह ऋषिकेश की स्वामी दयानंद आश्रम में रुके अभिनेता रजनीकांत

जनवाणी ब्यूरो |

ऋषिकेश: बड़े पर्दे के सुपरस्टार रजनीकांत एक बार फिर उत्तराखंड की यात्रा पर निकले हैं। पिछली बार 10 अगस्त 2023 को जब उनकी जेलर फिल्म रिलीज हुई थी तो उस रोज वह ऋषिकेश स्वामी दयानंद आश्रम पहुंचे थे। इस बार भी वहां गुरु के आश्रम से श्री बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं।

अभिनेता रजनीकांत बुधवार की शाम ऋषिकेश के स्वामी दयानंद आश्रम पहुंच गए थे। स्वामी जी के शिष्य रजनीकांत जब भी उत्तराखंड आते हैं तो इसी आश्रम में रुकते हैं। यहां पहुंचकर उन्होंने गुरु की समाधि पर ध्यान लगाया। संध्याकालीन आरती में शामिल हुए। दो मित्रों के साथ वह गुरुवार की सुबह बदरी-केदार धाम की यात्रा पर निकल गए। वह दर्शन के पश्चात वह द्वाराहाट भी जाएंगे।

बता दे कि उनकी सुपरहिट फिल्म रोबोट 1 अक्टूबर 2010 को रिलीज हुई थी, रिलीज होने से पूर्व रजनीकांत अपने गुरु के आश्रम में आए थे। 14 अक्टूबर 2019 को फिल्म दरबार की शूटिंग पूरी करने के बाद अभिनेता रजनीकांत ऋषिकेश आए थे। उसके बाद 10 अगस्त 2023 को जब उनकी फिल्म जेलर रिलीज हुई थी कि वह एक दिन पहले ही ऋषिकेश आ गए थे। अपनी फिल्में पूरी होने के बाद रजनीकांत अक्सर फिल्मी दुनिया की थकान मिटाने और नई फिल्म की कामयाबी के लिए दुआ करने ऋषिकेश गुरु आश्रम और बदरी केदार भगवान के दरबार में आते रहे हैं। अभिनेता रजनीकांत की जून 2024 में वेटैयन, नवंबर 2024 में कुली और नवंबर 2025 में कानून (जेलर 2) रिलीज होने वाली है।

वर्ष 1991 में आए गुरु के संपर्क में

कई सुपरहिट फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ने वाले अभिनेता रजनीकांत ऋषिकेश स्थित स्वामी दयानंद आश्रम में एक साधक की तरह रहते हैं। पिछली दफा जब वह यहां आए थे तो प्रातः कालीन सत्संग में उन्होंने साधकों के साथ गुरु स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज से अपनी मुलाकात के बारे में जानकारी दी थी उन्होंने बताया था कि वर्ष 1991 में जब वह पूरी तरह फिल्मी दुनिया में व्यस्त थे, तब उनकी पहली बार स्वामी दयानंद सरस्वती से मुलाकात हुई। इससे उनके जीवन की धारा ही बदल गई। इस मुलाकात में ब्रह्मलीन संत ने उन्हें अत्याधिक प्रभावित किया।

रजनीकांत ने बताया था कि वर्ष 1991 में वह पूरी तरह से फिल्मी दुनिया में रमे हुए थे। आध्यात्मिक दुनिया से उनका कोई सरोकार नहीं था। इतना जरूर है कि उनकी धर्मपत्नी लता, स्वामीजी की अनुयायी थीं। उन्होंने ही उन्हें स्वामीजी के प्रवचन में एक बार शामिल होने का आग्रह किया।

रजनीकांत ने बताया, ‘धर्मपत्नी के आग्रह पर मैंने चेन्नई में स्वामी दयानंद सरस्वती को सुना। तब अनुयायियों की भारी भीड़ के बावजूद सत्संग हाल में सन्नाटा पसरा हुआ था। सब एकाग्र होकर स्वामीजी को सुन रहे थे, जिनमें मैं भी शामिल था। स्वामीजी के वेदांत, अध्यात्म, मानव सेवा और धर्म के प्रति विचारों को सुनने के बाद मैं काफी प्रभावित हुआ। इससे मेरे जीवन की धारा ही बदल गई।

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