जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दूरसंचार क्षेत्र को तगड़ा झटका देते हुए वोडाफोन आइडिया, एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी प्रमुख कंपनियों की समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाया माफ करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से कंपनियों को बड़ी राहत की उम्मीदों पर पानी फिर गया है और अब उन्हें तय अवधि में बकाया राशि चुकानी होगी। यह मामला वर्षों से विवादों में रहा है और दूरसंचार क्षेत्र की वित्तीय स्थिति पर गहरा असर डालता रहा है।
पीठ ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने याचिकाओं को “गलत धारणा” वाला बताया। वोडाफोन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से पीठ ने कहा, “हमारे समक्ष आई इन याचिकाओं से हम सचमुच स्तब्ध हैं। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से ऐसी अपेक्षा नहीं की जाती। हम इसे खारिज करेंगे।”
शीर्ष अदालत ने दूरसंचार कम्पनियों की मदद करने की सरकार की इच्छा के आड़े आने से इनकार कर दिया। वोडाफोन ने अपने एजीआर बकाये के ब्याज, जुर्माने और दंड घटकों पर ब्याज के रूप में लगभग 30,000 करोड़ रुपये की छूट मांगी है। रोहतगी ने पहले कहा था कि दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ता फर्म का अस्तित्व बचे रहना महत्वपूर्ण है।
कंपनी की याचिका में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हाल ही में बकाया ब्याज के इक्विटी रूपांतरण के बाद अब केंद्र के पास कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी की याचिका में कहा गया है, “वर्तमान रिट याचिका में फैसले की समीक्षा की मांग नहीं की गई है, बल्कि फैसले के तहत ब्याज, जुर्माना और जुर्माने के ब्याज के भुगतान की कठोरता से छूट मांगी गई है।” इसलिए, याचिकाकर्ता ने केंद्र को “निष्पक्ष और सार्वजनिक हित में कार्य करने” और “एजीआर बकाया पर ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज के भुगतान” पर जोर न देने के लिए उचित निर्देश देने की मांग की।

