Thursday, April 25, 2024
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दिव्य संत थे ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज: स्वामी विशोकानन्द

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जनवाणी ब्यूरो |

हरिद्वार: निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी विशोकानन्द गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज एक दिव्य संत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है।

महानिर्वाणी अखाड़े के पंचपरमेश्वर के सानिध्य में सन्यास रोड स्थित श्री चेतनानन्द गिरी आश्रम में आयोजित ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज की षोड़शी व स्वामी रामानन्द गिरी महाराज के पट्टाभिषेक के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह की अध्यक्षता कर रहे स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरी महाराज ने कहा कि संत समाज के प्रेरणा स्रोत ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज एक विद्वान संत थे।

सनातन धर्म को ऊंचाईयों पर ले जाने में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। महंत नियुक्त कि गए स्वामी रामानन्द गिरी महाराज को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि योग्य गुरू को ही योग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी के परम शिष्य स्वामी रामानन्द गिरी महाराज अपने गुरू के दिखाए मार्ग पर चलते उनके अधूरे कार्यो को आगे बढ़ांएगे।

सूरत गिरी बंगला आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरी महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। गुरू के सानिध्य में ही शिष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।

निर्मल जल के समान जीवन जीने वाले ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज ने अपने सेवा प्रकल्पों के माध्यम से सदैव समाज व राष्ट्र कल्याण में अपना योगदान दिया। स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरी महाराज ने कहा कि संत समाज सदैव ही प्राणीमात्र के उद्धार में अपना जीवन समर्पित करता रहा है।

संत महापुरूषों ने सदैव राष्ट्र कल्याण में योगदान दिया है। ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी द्वारा चलाए गए समाज सेवा के प्रकल्प सभी को प्रेरित करते हैं। संत समाज को आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आश्रम के महंत नियुक्त किए गए ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज के शिष्य स्वामी रामानन्द गिरी महाराज अपने गुरू द्वारा संचालित सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ाते हुए संत सेवा व देश में अपना योगदान करेंगे।

स्वामी रामानन्द गिरी महाराज ने संत समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत महापुरूष केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी आत्मा अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करने के लिए सदैव व्यवहारिक रूप से उपस्थित रहती है।

उन्होंने कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज की शिक्षाओं व उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए उनके अधूरे कार्यो को पूर्ण किया जाएगा। गुरूदेव द्वारा संचालित सेवा प्रकल्पों में वृद्धि कर मानव कल्याण में योगदान किया जाएगा। गुरू परम्पराओं का निर्वहन निष्ठापूर्वक किया जाना चाहिए।

आदि अनादि काल से भारतवर्ष में चली आ रही गुरू शिष्य परम्परा का अनुसरण युवा संतों को भली भांति करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन कर रहे महंत रविन्द्रपुरी महाराज व स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सभी को संत समाज की महान विभूति ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज के दिखाए मार्ग व उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए समाजोत्थान में अपना योगदान देना चाहिए।

इस अवसर पर स्वामी कृष्णानन्द गिरी, प्रेमानन्द गिरी, कमलानन्द गिरी, सोमेश्वरानन्द गिरी, स्वामी आनन्द चैतन्य, स्वामी ईश्वरानन्द स्वामी परमानन्द, हनुमान बाबा, स्वामी गिरधर गिरी, स्वामी विष्णुदास, स्वामी सुरेंद्र मुनि आदि सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महंतों ने ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानन्द गिरी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए तिलक चादर प्रदान कर आश्रम के महंत नियुक्त किए गए स्वामी रामानन्द गिरी महाराज को शुभकामनाएं व आशीर्वाद प्रदान किया।

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