- टीबी की दवाई के लिए चक्कर काट रहे मरीज, एक माह की जगह एक सप्ताह की मिल रही दवा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिलेभर में टीबी की दवाइयों की शार्टेज होने से टीबी मुक्त अभियान लड़खड़ा रहा है। मरीज टीबी की दवाइयां लेने को भटक रहे हैं। टीबी ट्रीटमेंट सेंटर पर एक माह की जगह एक सप्ताह की दवाई दी जा रही है। उधर आशाओं को भी टीबी की दवाई नहीं दी जा रही। मरीजों को हर सप्ताह टीबी ट्रीटमेंट सेंटर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में जहां लोगों को टीबी के प्रति सचेत किया जा रहा है,
वहीं मरीजों को टीबी सेंटर पर उपचार कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। टीबी का पता लगाने के लिए जिला अस्पताल में टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच नि:शुल्क बलगम की जाती है और एक्स रे किया जाता है। मरीजों को दवाई भी नि:शुल्क दी जाती है। नि:क्षय पोषण योजना के तहत पंजीकृत क्षय रोगियों को इलाज पूरा होने तक पोषण के लिए डीबीटी के माध्यम से 500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद् भी दी जाती है। टीबी का इलाज कम से कम छह माह का होता है। पहले दो माह आईपी का कोर्स होता है,
फिर चार माह का सीपी कोर्स होता है। इसका इलाज शुरू होने से लेकर इलाज पूरा होने तक रोजाना दवाई लेने पड़ती है। यदि मरीज बीच में दवाई खाने में गैप कर देता है या दवाई नहीं खाता तो उसे दोबारा नए सिरे से पूरा कोर्स करना पड़ता है। जिले में 12 हजार से अधिक टीबी के रोगी हैं। इनमें करीब 80 प्रतिशत मरीजों का उपचार सरकारी टीबी सेंटर में किया जा रहा है। बीस प्रतिशत मरीज प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय से जिला अस्पताल के टीबी ट्रीटमेंट सेंटर व अन्य सेंटरों और आशाओं को दवाइयां दी जाती है। उक्त सेंटरों से मरीजों को दवाई दी जाती है। इसके अलावा आशाओं के माध्यम से भी मरीजों को दवाई उनके घर पर दवाई दी जाती है। काफी दिनों से शासन से यहां टीबी की दवाई उचित मात्रा नहीं भेजी जा रही। यदि जितनी माह में डिमांड होती है, उसका मात्र 20 प्रतिशत दवाई दी जा रही है। दवाई का संकट को देखते हुए शासन ने बाजार से 2 डी व 3 डी कॉम्बीनेशन किट खरीदने के निर्देश दिए,
लेकिन उक्त दवाई उपलब्ध शार्ट हो रही है। खास बात है कि जिले में बाजार से एक माह में एक लाख रुपये तक की दवाई कोटेशन के जरिए खरीदी जा सकती है। ऐसे में टीबी के मरीज इलाज की समस्या खड़ी हो गई। दवाइयों के खाने में गैप होने पर मरीज को नए सिरे से इलाज कराना पड़ेगा। ऐसे में यहां टीबी के और अधिक फैैलने का खतरा भी खड़ा हो गया है। मरीजों को पहले एक माह की दवाई जा रही थी, पर अब उन्हें एक सप्ताह की दवाई टीबी ट्रीटमेंट सेंटरों पर दी जा रही है।
टीबी की दवाई की व्यवस्था की जा रही : सीएमओ
सीएमओ डा. अशोक कटारिया का कहना है कि शासन से टीबी की दवाई की सप्लाई में बाधा आ रही है। बाजार से दवाइयां खरीदकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। टीबी की दवाइयों की कमी है। इसलिए मरीजों को अब एक सप्ताह की टीबी की दवाई दी जा रही।

