
महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने एक बार कहा था, ‘शिक्षक जो बच्चों को शिक्षा देते हैं वे उनके माता-पिता से जो उनको जन्म देते हैं, अधिक सम्मान के हकदार हैं। क्योंकि माता-पिता केवल जीवन देते हैं, जबकि शिक्षक उन्हें जीवन अच्छे तरीके से जीना सिखाते हैं।’ आशय यह है कि मानव जीवन में शिक्षा और शिक्षक का प्रभाव शाश्वत होता है, युगांतकारी होता है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने एक बार कहा था, ‘शिक्षा सबसे शक्तिशाली अस्त्र है जिसका उपयोग आप समाज को बदलने के लिए कर सकते हैं।’ इस लिहाज से टीचिंग के रूप में प्रोफेशन का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ी के व्यक्तित्व, सोच और दर्शन में बदलाव लाकर नए राष्ट्र का निर्माण करना होता है।
महान ब्रिटिश दार्शनिक जीके चेस्टरटन ने भी शिक्षा के अहमियत के बारे में एक बार कहा था, ‘शिक्षा सामान्य रूप से एक समाज की आत्मा होती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती जाती है।’ अर्थात शिक्षा के माध्यम से उत्कृष्ट और आदर्श समाज का निर्माण होता है। किंतु शिक्षक के रूप में करियर की राहें आसान नहीं हैं। कहा जाता है कि एक अच्छा शिक्षक मोमबत्ती सरीखा ही होता है जो खुद को जलाकर दुनिया को रोशनी प्रदान करता है। त्याग, तपस्या, सेवा भाव, कठिन मेहनत, मानवीय मूल्यों के अवतार के रूप शिक्षक की जिम्मेदारियां किसी अग्निपरीक्षा से कम कठिन नहीं होती हैं। यही कारण है कि वेदों और पुराणों में गुरु को ईश्वर से बड़ा दर्जा प्रदान किया गया है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गुरु की कृपा से ही मानव को ईश्वर की पहचान प्राप्त होती है।
अन्तर्निहित गुण
शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैं और इस लिहाज से शिक्षक के रूप में सफल करियर के लिए अभ्यर्थी में निम्न गुणों का होना अनिवार्य होता है-
-धैर्य, सहानुभूति, दया, क्षमा और सहिष्णुता के गुणों से लबरेज आकर्षक व्यक्तित्व।
-ज्ञान प्राप्ति की अगाध क्षुधा।
-निरंतर अध्ययन करते रहने की स्वाभाविक प्रवृत्ति और दूसरों की बातों को सुनने की अपार क्षमता।
-दोषरहित कम्युनिकेशन स्किल।
-सब्जेक्ट्स का अगाध और पूर्ण ज्ञान।
– राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों से खुद को अपडेटेड रखने का भाव।
एक शिक्षक के रूप में करियर की शुरुआत कैसे करें
प्री-प्राइमरी स्कूल टीचर : प्री-प्राइमरी शिक्षा भारत में किंडरगार्टन के नाम से जाना जाता है। किंडरगार्टन शब्द की संकल्पना जर्मन शिक्षाविद फ्रÞीड्रिक विलियम अगस्त फ्रोबेल के द्वारा किया गया था, जिसका सामान्य अर्थ ‘बच्चों का बगीचा’ होता है। इसे प्लेग्रुप या नर्सरी शिक्षा या बालवाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह बच्चों का अपने घर से स्कूल के लिए पहला कदम होता है। इसमें बच्चों को खेल खेलने, गाना गाने, ड्राइंग और पेंटिंग करने, स्टोरीटेलिंग और अन्य बालसुलभ गतिविधियों के द्वारा अल्फाबेट्स और संख्याओं के ज्ञान के द्वारा शिक्षा की दुनिया में प्रवेश कराया जाता है। प्री-प्राइमरी एजुकेशन की अवधि 3 से 6 वर्ष के मध्य की होती है।
प्री-प्राइमरी टीचर के रूप में करियर की शुरुआत के इच्छुक उम्मीदवार को निम्न दो में से किसी एक कोर्स की स्टडी करनी होती है-
एक वर्षीय नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग (एनटीटी) में डिप्लोमा : इस कोर्स में एडमिशन मेरिट के आधार पर या एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होता है। इसके लिए न्यूनतम एजुकेशनल क्वालिफिकेशन किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास होता है।
एनटीटी कोर्स के लिए महत्वपूर्ण संस्थान निम्न हैं-
-भवन का नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, कोची, केरल
-महात्मा गांधी कॉलेज आॅफ एजुकेशन, नई दिल्ली
-इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आॅफ एडवांस्ड एजुकेशन, नई दिल्ली
-राजा राममोहन रॉय इंस्टीट्यूट आॅफ वोकेशनल स्टडीज, चंडीगढ़
एक वर्ष का अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (डीइसीएड) में डिप्लोमा : इस एक वर्ष के दो सेमेस्टर के कोर्स के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास का होता है।
मुख्य संस्थान
-जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी
-मुंबई यूनिवर्सिटी
-अमिटी यूनिवर्सिटी
-बॉम्बे टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज
-इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ एजुकेशन एंड रिसर्च, जयपुर
प्राइमरी स्कूल टीचर कैसे बनें : प्राइमरी टीचर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने के लिए उम्मीदवार को निम्न में से किसी एक कोर्स की स्टडी करनी होती है-
दो वर्षीय एलीमेंट्री टीचर एजुकेशन (इटीइ) : यह फुलटाइम 2 वर्ष का अंडरग्रेजुएट कोर्स है जिसके लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं परीक्षा पास होता है क इस कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर होता है।
कोर्स के लिए महत्वपूर्ण संस्थान निम्नांकित हैं-
-भरथियार यूनिवर्सिटी कोइम्बटूर
-एपीएस कॉलेज आॅफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी, मेरठ
-फ्लोरेंस कॉलेज आॅफ नर्सिंग, रांची
-रामकृष्ण टीचर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली
चार वर्षीय एलीमेंट्री एजुकेशन में बैचलर कोर्स : यह भी अंडरग्रेजुएट कोर्स है जिसके लिए मिनिमम एजुकेशनल क्वालिफिकेशन बारहवीं कक्षा पास है। इस कोर्स के लिए मुख्य इंस्टीट्यूट्स निम्न हैं-
-मिरांडा हाउस कॉलेज
-लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वीमेन, नई दिल्ली
-अमिटी यूनिवर्सिटी, नॉएडा
-सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ एजुकेशन, नई दिल्ली
दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) : प्राइमरी स्कूल में टीचर के रूप में करियर शुरू करने के लिए डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन अनिवार्य माना जाता है। चार सेमेस्टर वाला यह फुल टाइम डिप्लोमा कोर्स कैंडिडेट्स को प्राइमरी टीचर्स के लिए प्रशिक्षित करता है। इसके लिए न्यूनतम योग्यता किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास होता ह। डिस्टेंस एजुकेशन के रूप में यह कोर्स नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) से किया जा सकता है।
इस कोर्स के लिए प्रमुख संस्थान निम्न हैं-
-जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
-मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
-बॉम्बे टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, मुंबई
-अमिटी यूनिवर्सिटी, नॉएडा
सेकेंडरी स्कूल टीचर
सेकेंडरी स्कूल टीचर को ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) कहा जाता है। ये टीचर छठी से लेकर दसवीं तक की कक्षाओं के स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं। ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर मैथमेटिक्स, साइंस, सोशल साइंस, हिंदी, इंग्लिश, म्यूजिक, आर्ट और रीजनल लैंग्वेज के हो सकते हैं ।
कैसे बनें ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर : ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर के रूप में करियर की शुरुआत के लिए न्यूनतम एजुकेशनल क्वालिफिकेशन संबंधित विषय में ग्रेजुएशन का होता है। इसके साथ ही दो वर्ष के बैचलर आॅफ एजुकेशन (बी.एड) की डिग्री भी अनिवार्य होती है।
बैचलर आॅफ एजुकेशन (बी.एड) के लिए प्रमुख संस्थान-
-दिल्ली विश्वविद्यालय
-बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी
-गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली,
-डिपार्टमेंट आॅफ एजुकेशन, बनस्थली यूनिवर्सिटी, जयपुर
-लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेन, साउथ दिल्ली,
-बॉम्बे टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, मुंबई
सीनियर सेकेंडरी स्कूल टीचर
सीनियर सेकेंडरी स्कूल के टीचर को पोस्टग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) कहा जाता है। पीजीटी अपने पोस्टग्रेजुएट के लेवल के सब्जेक्ट को ग्यारहवीं और बारहवीं क्लास के स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।
कैसे बनें सीनियर सेकेंडरी स्कूल टीचर : सीनियर सेकेंडरी स्कूल टीचर बनने के लिए कैंडिडेट को उसके टीचिंग सब्जेक्ट में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रोफेशनल कोर्स के रूप में दो वर्षों की बैचलर इन एजुकेशन (बी.एड.) की डिग्री भी अनिवार्य होती है
लेक्चरर और प्रोफेसर
यूनिवर्सिटी के टीचर्स को लेक्चरर कहा जाता है। इन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर भी कहा जाता है जो एंट्री लेवल का पोस्ट होता है। कॉलेज या यूनिवर्सिटी में टीचर के पोस्ट्स में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर होते हैं, जो टीचिंग एक्सपीरियंस पर आधारित होते हैं।
किसी यूनिवर्सिटी के कॉलेज में लेक्चरर बनने के लिए न्यूनतम एजुकेशनल क्वालिफिकेशन कैंडिडेट के टीचिंग सब्जेक्ट में मास्टर की डिग्री होती है। इसके अतिरिक्त लेक्चरर बनने के लिए कैंडिडेट को अपनी चॉइस के अनुसार निम्न प्रतियोगी परीक्षाएं क्वालीफाई करनी होती हैं
यूजीसी नेट परीक्षा : इसे नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट भी कहा जाता है जो आॅल इंडिया लेवल का होता है। यह परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के द्वारा लेक्चरर के पोस्ट के सिलेक्शन के लिए कंडक्ट किया जाता है। इस परीक्षा के लिए मिनिमम एलिजिबिलिटी 55 परसेंट मार्क्स के साथ पोस्टग्रेजुएट की डिग्री है। ये परीक्षाएं वर्ष में दो बार कंडक्ट किए जाते हैं। यूजीसी नेट परीक्षा के क्वालीफाई कर लेने के बाद कैंडिडेट राष्ट्रीय – स्तर पर यूजीसी के मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के पोस्ट के लिए अप्लाई करने के लिए एलिजिबल हो जाता है।
गेट : इस परीक्षा का फुल फॉर्म ग्रेजुएट अप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग होता है। यह आॅल इंडिया लेवल का टेस्ट होता है जो गेट समिति के द्वारा कंडक्ट किए जाते हैं। इस समिति में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु तथा सात भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थानों के संकाय सम्मिलित होते हैं। इस परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर पीएचडी के के साथ-साथ आइआइटी और एनआइटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया जा सकता है।
स्लेट : यह परीक्षा जिसका विस्तृत रूप स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट होता है, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के द्वारा कंडक्ट किया जाता है। इस परीक्षा के क्वालीफाई करने के बाद स्टेट लेवल के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के लिए अप्लाई किया जा सकता है।
सीटेट और स्टेट क्या होता है?
बी.एड करने के बाद कैंडिडेट्स सीटेट (सेंटल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट ) की परीक्षाओं में भाग ले सकता है और सेंट्रल गवर्नमेंट के विद्यालयों जैसे जवाहर नवोदय विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों में टीचर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
स्टेट टीचर : यह परीक्षा स्टेट लेवल की परीक्षा होती है। बी.एड के बाद इस परीक्षा में क्वालीफाई करने के बाद राज्य सरकारों के स्कूलों में टीचर के लिए अप्लाई किया जा सकता है।
टीचर्स के रूप में जॉब्स कहां उपलब्ध हैं?
टीचर्स बनने के लिए अनिवार्य मिनिमम एलिजिबिलिटी के प्राप्त करने के बाद कैंडिडेट्स टीचर्स के रूप में निम्न डोमेन में
अपने करियर की शुरूआत कर सकते हैं-
-गवर्नमेंट स्कूल जैसे नवोदय विद्यालय समिति और केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्कूल
-गवर्नमेंट कॉलेज और यूनिवर्सिटी
-प्राइवेट स्कूल
-नर्सरी स्कूल
-क्रेश
-प्राइवेट ट्यूशन और कोचिंग इंस्टिट्यूट्स
आप कितना कमा सकते हैं?
गवर्नमेंट सेक्टर में हर लेवल के टीचर के लिए एक निर्धारित बेसिक पे और ग्रेड पे होता है जो विविध निर्धारित भत्तों के साथ देय होता है। किंतु प्राइवेट सेक्टर के स्कूलों और इंस्टीट्यूट्स में सैलरी पर्सनल एजुकेशनल क्वालिफिकेशंस, एक्सपीरियंस और निगोशियेटिंग कैपेसिटी पर निर्भर करती है। प्रोफेशनल कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में वार्षिक पैकेज 15 लाख से 20 लाख रुपए तक होता है। यहां भी अर्जित आय कैंडिडेट्स के व्यक्तिगत अनुभव और दक्षता पर निर्भर करता है।
-श्रीप्रकाश शर्मा


