Thursday, March 5, 2026
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अध्यापकों को लगा जोरों का झटका धीरे से

  • नियमों में बदलाव से अब और लंबा हुआ प्रमोशन का इंतजार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: परिषदीय स्कूलों में पदोन्नति के इंतजार में बैठे शिक्षकों को जोरों का झटका धीरे से लगा है। शासन ने पदोन्नति के नियमों में बदलाव अब कर दिया है। 30 सितंबर 2023 तक पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों के आधार पर नई लिस्ट तैयार होगी। मेरठ में बड़ी संख्या में ऐसे टीचर हैं, जिन्हें प्रमोशन का इंतजार है। सूत्रों की माने तो बेसिक व जूनियर के ऐसे करीब 250 से लेकर तीन सौ शिक्षक हैं।

जिन्हें प्रमोशन का बेसब्री से इंतजार है। वहीं, दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि यह इंतजार फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। प्रमोशन सूची में हो रही देरी के चलते अब शिक्षकों का सब्र भी जवाब देने लगा है, जिसके चलते आंदोलन की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

नए सिरे से बनेगी लिस्ट

बेसिक सचिव ने आदेश जारी कर नए सिरे से लिस्ट बनाने के निर्देश बीएसए को दिए हैं। विभाग द्वारा अब शिक्षकों की नए सिरे से लिस्ट बनाई जाएगी। पहले 31 मार्च 2023 तक पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों की लिस्ट विभाग तैयार हुई थी, मगर अब बदलाव होने के बाद काफी शिक्षक सूची से बाहर होंगे और नए शिक्षक इसमें जुड़ जाएंगे। विभाग के अनुसार जो शिक्षक पदोन्नति के दायरे में आ रहे होंगे उनकी सूची तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी और वहीं से अंतिम सूची स्कूलवार जिले को प्राप्त होगी।

इसमें करीब एक माह होने के कारण शिक्षकों को भी का समय लग सकता है। पदोन्नति न मायूसी हाथ लगी है। शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को चलते हुए छह माह से अधिक का समय हो चुका है। पहले करीब 1700 शिक्षकों की लिस्ट तैयार का शासन में भेजी थी। प्राथमिक के सहायक की प्राथमिक में हेडमास्टर व जूनियर स्कूल में अध्यापक के पद पर पदोन्नति होनी है। पहली लिस्ट पर शासन से छह माह तक निर्णय नहीं लिया जा सका है। लिस्ट निरस्त होने के बाद शिक्षकों को मायूसी हाथ लगी है, जबकि और शिक्षक सूची में जुड़ जाएंगे।

विभाग द्वारा इसी माह में लिस्ट तैयार कर शासन में भेज दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश तोमर ने बताया कि करीब 250 से 300 ऐसे शिक्षक हैं। जिनको प्रमोशन का इंतजार है, लेकिन लखनऊ में बैठे अफसरों का रवैया मेरठ समेत पूरे प्रदेश में प्रमोशन का इंतजार कर रहे शिक्षकों का इंतजार और लंबा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इंतजार कर रहे शिक्षक अब निराश हैं उन्हें लगता है कि जिस प्रकार से बार-बार तारीख आगे बढ़ायी जा रही है उसके चलते प्रमोशन होगा इसकी उम्मीद कम ही नजर आती है।

राकेश तोमर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षकों पर काम का बोझ तो पहले से कई गुना लाद दिया गया है, लेकिन जहां उनके प्रमोशन या हितार्थ कोई दूसरा फैसला लेना होता है, उसमें लखनऊ में बैठे अफसर टाल मटोल करते हैं। काम के नाम पर नित नए फरमान जारी करने वाले अफसर प्रमोशन लिस्ट जारी करने को लेकर सुप्तावस्था में हैं। राकेश तोमर ने चेतावनी दी कि अफसरों की यह सुप्तावस्था शिक्षकों को आंदोलन के लिए बाध्य कर देगी।

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