- बेटियों को दिया जाता है सिंधारे, घर-घर पड़ जाते हैं झूले
- सावन लगते ही महकने लगती है घेवर की भीनी-भीनी खुशबू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हरियाली तीज मुख्य रूप से स्त्रियों का त्योहार है। इस समय जब प्रकृति चारों तरफ हरियाली की चादर-सी बिछा देती है तो प्रकृति की इस छटा को देखकर मन पुलकित होकर नाच उठता है। जगह-जगह झूले लगाए जाते है। स्त्रियों के समूह गीत गाकर झूला झूलते हैं।
यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से सुहागन महिलाओं को पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह उत्सव भगवान शिव-माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है।
वहीं सावन में चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। हरियाली तीज में सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं। महिलाओं को मायके से आए वस्त्र ही धारण करना चाहिए। साथ ही शृंगार में भी वहीं से आई वस्तुओं का प्रयोग करें।

सावन महीने का आरंभ हो चुका है। इसके साथ त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। लंबे समय से तीज के त्योहार का बेसब्री से इंतजार कर रही महिलाओं में इस समय काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। सावन लगते ही जहां कांवड़ का शोर सुनाई देने लगता है।
वहीं दूसरी ओर वेस्ट यूपी के प्रमुख त्योहारों में से एक हरियाली तीज को लेकर भी बाजारों में महिलाओं की भीड़ देखने को मिलने लगती है। महिलाओं को लुभाने के लिए बाजार में भी एक से बढ़कर एक साड़ियों व चूड़ियों की आकर्षक वैरायटी हर साल उतारी जाती है। तीज के त्योहार को महिलाएं हर साल परिवार व अपनी सखियों संग धूमधाम से मनाती है। खासतौर पर यह लड़कियों व महिलाओं का ही त्योहार होता हैं, जिसका उनको पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है।
क्योंकि जहां इस दिन उनको सजने-संवरने का मौका मिलता हैं। वहीं, दूसरी ओर गली-मोहल्लों में पड़ी झूल पर महिलाएं गीत गाकर सखियों संग जमकर मस्ती करती है। इस वर्ष तीज का त्योहार 31 जुलाई को मनाया जाएगा। तीज पर सुहागन स्त्रियां हरे रंग का शृंगार करती है और पति की लंबी आयु के लिए उपवास भी रखती है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन माता पार्वती कठिन साधना के बाद भगवान शिव से मिली थी।
बेटियों को दिया जाता है सिंधारा
हरियाली तीज के मौके पर बहन और बेटियों को उनके मायके की ओर से सिंधारा भेजने की परंपरा है। जिसमें सुहाग का समान, कपड़े और मिठाइयां होती है। इतना ही नहीं जिन लड़कियों का विवाह तय हो जाता हैं, उनकी ससुराल वाले सुहाग का समान भेजते हैं।

