Saturday, March 21, 2026
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बैंकों की कनेक्टीविटी ने करोड़ों के चेक बाउंस कराये

  • एक दिन के अवकाश के बाद बैंकों में बढ़ी परेशानी
  • डिजीटल इंडिया के दावों को झुठला रही बैंकों की समस्या

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक तरफ डिजीटल इंडिया की तैयारियों के जोर शोर से चलने के दावे किये जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ बैंक खुद को इसके लिये तैयार नहीं कर पा रहे हैं। तेजी से बदलती दुनिया में इंटरनेट कनेक्टीविटी की समस्या खोखली व्यवस्था की तरफ इशारा करती है। मेरठ के बैंक आए दिन सर्वर और कनेक्टीविटी की समस्या से जूझ रहे हैं। एक अप्रैल को बैंकों के अवकाश के बाद जब शनिवार को बैंक खुले तो अधिकांश बैंकों में कनेक्टीविटी न होने के कारण करोड़ों के चेक बाउंस हो गए। इससे व्यापारियों को जहां काफी नुकसान हुआ बल्कि व्यापारिक लेनदेन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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शनिवार को इलाहाबाद बैंक, एकसिस बैंक, एचडीएफसी, स्टेट बैंक आफ इंडिया आदि बैंकों में ग्राहक कनेक्टीविटी की समस्या से जूझते रहे। शुक्रवार को बैंकों में अवकाश था। गुरुवार को भी कनेक्टीविटी की काफी समस्या से लोग परेशान हो गये थे। कनेक्टीविटी न मिलने के कारण बैंकों में प्रतिदिन लगाए जाने वाले लाखों चेक में से सैकड़ों चेक बाउंस हो जाते हैं। इसका कारण आपके खाते में अपर्याप्त धनराशि नहीं है, बल्कि संबंधित बैंक में कनेक्टिविटी का न होना है।

वहीं बैंक अपनी इस गलती के लिए भी खाताधारक को जिम्मेदार ठहरा देता है। सरकारी हो या निजी बैंक चेक बाउंस होने पर खाताधारकों से 260 से लेकर 500 रुपये तक वसूल रहे हैं। चेक रिटर्न करने पर भी चेक के साथ दी जाने वाली पर्ची पर अन्य कारण कनेक्टिविटी फेलीयर लिख दिया जाता है। खाताधारकों का मानना है कि बैंक अपनी इस मनमानी के लिए सॉफ्टवेयर को जिम्मेदार ठहराकर पल्ला झाड़ रहा है।

जबकि बैंक में लंबे समय से इस तरह की समस्या चल रही है। कई बार बैंक के उच्चाधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ व्यापारियों ने बताया कि प्रतिमाह एक या दो चेक कनेक्टिविटी की समस्या से बाउंस हो जाते हैं। उधर, दीपक जैन ने बताया कि कनेक्टिविटी एक बड़ा कारण बैंक कर्मचारियों ने बताया कि चेक संबंधित बैंक के हैड आॅफिस में जाता है।

वहीं से चेक पास होता है या रिजेक्ट कर दिया जाता है। जिस बैंक का चेक होता है उस बैंक में अगर कनेक्टिविटी की समस्या होती है तो चेक बाउंस हो जाता है। वहीं, उपेंद्र बंसल, दवा व्यापारी ने बताया कि दवा व्यापारी पूर्व में सरकारी बैंक में खाता था। कई बार चेक कनेक्टिविटी के कारण बाउंस हुए। ऐसे में निजी बैंक में खाता खोला है। निजी बैंक कनेक्टिविटी के कारण चेक बाउंस होने पर शुल्क नहीं वसूल रहा है।

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