- मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को भेजकर की गायब पत्रावली में रोके गये वेतन को बिना
- पत्रावली मिले वेतन जारी करने की संतुति करने के मामले में कार्रवाई की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में कार्यरत कुछ कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका पत्रावली गायब होने के मामले में प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी के द्वारा उनका वेतन रोक दिया गया था। जब तक गायब पत्रावली नहीं मिल जाती और उनमें जन्मतिथि व अन्य तरह से सेवा पुस्तिका रिकार्ड में हुई गड़बड़ी की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वेतन रोकने के आदेश जारी किये गये थे।
वहीं अब प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी ने गुपचुप तरीके से अपने ही आदेश के उलट गायब पत्रावली के मामले में वेतन जारी करने की संस्तुति करनी शुरू कर दी है। मीडिया में तो गायब पत्रावली के मामले में वेतन रोके जाने का बयान दिया गया और गुपचुप तरीके से ऐसी ही एक गायब सेवा पुस्तिका पत्रावली के मामले में वेतन जारी करने की संस्तुति कर दी।
नगर निगम में कई कर्मचारियों की गायब पत्रावली होने के बाद भी उनका लंबे समय से वेतन जारी किया जा रहा था। ऐसे ही कई मामलों की शिकायत पर प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा, कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह के द्वारा समस्त अधिष्ठापन लिपिक एवं स्वास्थ्य विभाग नगर निगम को दिनांक 7/11/2022 को पत्र जारी किया। उस पत्र में उन्होंने बताया कि कुछ स्वच्छता मित्रों की पत्रावली निगम में उपलब्ध नहीं हैं,

लेकिन इनका वेतन व एरियर,बोनस आदि वेतन के साथ दिया जा रहा है। अत: जिन स्थाई स्वच्छता मित्रों की व्यक्तिगत पत्रावली कार्यालय में नहीं है, जिस कारण जनसूचना जनसुनवाई, आईजीआरएस आदि का जवाब देने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिये जब तक इन स्वच्छता मित्रों की पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक इनका वेतन आरहित नहीं किया जाये।
साथ ही इन कर्मचारियों के द्वारा बैंक से जो ऋण लिया है। उस ऋण की किस्त का भी भुगतान समय पर नहीं कर रहे हैं। जिनकी सूची के आधार पर उनका वेतन रोकने की कार्रवाई करें। वहीं, ऐसे ही एक मामले में स्थाई स्वच्छता मित्र के फर्जी दस्तावेज नियुक्ति के मामले में लेखाधिकारी के द्वारा 22 अक्टूबर 2022 को नगरायुक्त को पत्र जारी कर उक्त स्वच्छता मिश्र के खिलाफ कार्रवाई के लिये लिखा।
जिसमें उसकी तत्काल सेवानिवृत्ति सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत किये जाने व निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने एवं उनके विरुद्ध षड्यंत्र करने के अपराध में आवश्यक प्रशासनिक/फौजदारी प्रक्रिया के अंतर्गत कार्रवाई की संस्तुति रिपोर्ट लेखाधिकारी ने नगरायुक्त को भेजी थी। पांच महीने बीतने के बाद भी उक्त कर्मचारी कैलाश निगम में कार्यरत है। उसकी पत्नी राजरानी भी निगम में कार्यरत है।

उसकी भी पत्रावली निगम से गायब है। इस तरह के सभी मामलों में क्या कार्रवाई निगम की तरफ से चल रही है। यह वर्जन उनसे 22 मार्च 2023 को लिया गया था। उस पर प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा,कल्याण अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने इस तरह के सभी मामलों में वेतन पर रोक संबंधी बात को लेकर मीडिया में दिया वर्जन दिया। उनसे पूछा गया कि महिला स्वच्छता मित्र राजरानी की गायब सेवा पुस्तिका पत्रावली के मामले में क्या चल रहा है।
उसने मंगलवार 13 मार्च 2023 को निगम में जनसुनवाई के दौरान प्रार्थना पत्र दिया और दिसंबर, जनवरी एवं फरवरी के वेतन को दिलवाने की मांग की गई थी। उस पर भी उन्होने वेतन रोके जाने के बारे में ही जानकारी दी, लेकिन राजरानी के द्वारा जो प्रार्थना पत्र दिया गया। उसमें स्वयं प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह के द्वारा 14 मार्च 2023 को उसका रुका वेतन आरहित करने की संस्तुति कर दी।
जिसके बाद गायब पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी वेतन की संस्तुति कर दी गई। जिसको लेकर अन्य कुछ ऐसे ही स्वच्छता कर्मियों का वेतन भी रुका हुआ है। जब उन्हे इस मामले की जानकारी हुई तो मामला चर्चा का विषय बन गया। इस मामले में पंकज चिड़ालिया ने मूल पत्रावली गायब होने के बाद भी अपने आदेश के उलट राजरानी का वेतन आरहित करने की संस्तुति कैसे हो गई।
वहीं, प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह ने बताया कि आप सब जानते हैं, कुछ कार्य न चाहते हुए भी करने पड़ते हैं। उन्होंने केवल वेतन जारी करने की संस्तुति की है। अभी वेतन बैंक से निकला नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि आपके द्वारा 22 मार्च 2023 को जो वर्जन दिया गया था। उसमें अपने स्पष्ट कहा था कि गायब पत्रावली के संबंध में कोई वेतन आदि जब तक जारी नहीं किया जायेगा।
जब तक गायब पत्रावली की जांच पूरी नहीं हो जाती या कोई सक्षम उच्चाधिकारी का निर्देश प्राप्त नहीं होता। उधर, दूसरे वर्जन में डा. हरपाल सिंह को लगा कि कहीं उनके वर्जन में कोई गलत तो नहीं है। वेतन जारी करने के संबंध में संस्तुति उनके द्वारा जो गई है। उसमें न चाहते हुए भी किसी दबाव आदि के कारण प्रार्थी को टरकाने आदि के लिये कर दिया जाता है।
उसको बदलते हुए उन्होंने दूसरे वर्जन में कहा कि मेरे द्वारा केवल स्वास्थ्य विभाग के अधिष्ठापन लिपिक को यह निर्देश जारी करते हुए संस्तुति की है कि वह नियमानुसार वेतन जारी करने के संबंधी फाइल पर निर्णय लें कि जांच के दौरान यदि गायब फाइल मिल गई है तो वेतन जारी कर दिया जाये। जब जनवाणी संवाददाता ने वेतन रोकने संबंधी वह आदेश एवं जो 13 मार्च को कर्मचारी राजरानी के द्वारा जो पत्र वेतन संबंधी दिया गया था।

उसको दिखाया तो स्वास्थ्य विभाग के अधिष्ठापन लिपिक को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के लिये नहीं लिखते हुए स्पष्ट लिखा है कि वेतन आहरित करें। उस दोष को अपने अधीनस्थ कर्मचारी पर टालने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने दोनों अलग-अलग बयान में राहत मिलने की जगह फंसते नजर आये।
सीएम को भेजी शिकायत, नियम विरुद्ध निलंबन अवधि का वेतन जारी
नगर आयुक्त के द्वारा स्वच्छता अभियान की जांच के दौरान स्वच्छता मित्र को निलंबित कर दिये जाने एवं जांच में जांच अधिकारी प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी पर सवेतन बहाली आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को एक शिकायती पत्र भेजा गया। घंटाघर निवासी निवासी पंकज चिडालिया ने मुख्यमंत्री को एक शिकायती पत्र भेजा और मामले में नगर निगम में प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी एक निलंबित स्वच्छता मित्र गलत तरीके से बहाली करने का आरोप लगाया।
पंकज चिडालिया ने आरोप लगाया कि 8 अगस्त 2022 को नगरायुक्त के द्वारा वार्ड-35 में निरीक्षण किया गया। जिसमें सफाई व्यवस्था बेपटरी मिलने व कुछ कर्मचारियों के मौके पर नहीं मिलने और कुछ कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर मिलने को लेकर नगरायुक्त ने उक्त स्वच्छता मित्र श्रीचंद पुत्र मसीचरन का निलंबन कर दिया गया था। जिसमें निगम कार्यालय के पत्रांक संख्या 1617/प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगममे 0/2023 दिनांक 3 मार्च 2023 को जांच के उपरांत नगरायुक्त के शून्य के आदेशानुसार प्रतिकूल प्रतिष्टि देते हुए सेवा बहाल कर दिया गया,
लेकिन डा. हरपाल सिंह के द्वारा उसकी बहाली तो कर दी गई, लेकिन सवेतन बहाली की गई,जोकि निगयम विरूध है। पंकज चिडालिया के द्वारा तमाम आरोप शिकायत पत्र में प्रभारी चिकित्सा स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह पर लगाये हैं। जिसमें बताया कि नगरायुक्त को जो गड़बड़ी निलंबन के दौरान स्थलीय जांच में मिली थी। उनका जवाब डा. हरपाल सिंह के द्वारा बड़े ही गोलमोल तरीके से निकालकर उक्त स्वच्छता मित्र की बहाली तो कर दी,
वह भी सवेतन, जबकि अगस्त माह से निलंबति स्वच्छता मित्र की बहाली मार्च में हुई है। करीब पांच महीने का वेतन जोकि सवेतन की संस्तुति की गई है। वह नियम विरुद्ध किये जाने का आरोप लगाया है। इस मामले में नगर निगम के प्रभारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

