Sunday, November 28, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsShamliअफसरों की चलने ही नहीं देते प्राधिकरण के अभियंता

अफसरों की चलने ही नहीं देते प्राधिकरण के अभियंता

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  • शांति नर्सिंग होम मामले में कमिश्नर के यहां लगाई गई गुहार

जनवाणी ब्यूरो |

सहारनपुर: यहां का विकास प्राधिकरण वाकई में सफेद हाथी बना हुआ है। अधिकारी कितना भी ईमानदार क्यों न हो, यहां के अभियंता अपनी ही चलाते रहे हैं। यही वजह है कि हर माह करोड़ों की राजस्व हानि होती है और अवैध निर्माणों पर रोक नहीं लगती। सब कुछ साठगांठ से होता आ रहा है।

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश एवं उत्तर प्रदेश आवास एवं नगर नियोजन मंत्रालय के निर्देशों की सहारनपुर विकास प्राधिकरण के अवर व सहायक अभियंता लगातार अनदेखी करते आ रहे हैं। चूंकि इन पर गाज नहीं गिर रही, लिहाजा इन्हें किसी का डर नहीं है। कई अभियंता यहां वर्षों से जमे हैं। सविप्रा के मुसाफिरखाने एवं रेलवे भवन की जमीन पर अनधिकृत रूप से 18 कमरों का नर्सिंग होम बनाकर तैयार कर लिया गया।

नर्सिंग होम में शल्य चिकित्सा कक्ष, स्वागत कक्ष एवं शौचालय भी बना लिये गये हैं। शांति नर्सिंग होम का आवासीय नक्शा 2009-10 में जोन संख्या-1 के अंतर्गत सविप्रा में जमा कराया गया था। उक्त नक्शा विभाग द्वारा निरस्त कर दिया गया था। उक्त वाद संख्या-08 2009-10 सविप्रा में विचाराधीन है।

शांति नर्सिंग होम के प्रकरण अध्यक्ष/मण्डलायुक्त ने ध्वस्तीकरण के आदेश किये। साथ ही सचिव उत्तर प्रदेश आवास एवं नगर नियोजन विभाग ने भी शांति नर्सिंग होम के अवैध निर्माण को 5 नवम्बर 2021 तक ध्वस्त कर सहारनपुर विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों से आख्या तलब की है, लेकिन अवर अभियंता पवन शर्मा लखनऊ से जारी निर्देशों को भी ताख पर रख दिये हैं। इसी मामले को लेकर विनय छाबड़ा निवासी पवन विहार ने कमिश्नर को प्रार्थना पत्र दिया है।

इसमें अवगत कराया है कि अवर अभियंता पवन शर्मा द्वारा डा.विनिता से मिली भगत कर मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की है। वह भूमि और इस भूमि के स्थल में 1 किलोमीटर का अंतर है। उन्होंने मांग की कि है प्रकरण की जांच एसडीएम सदर तथा तहसीलदार सदर से कराकर सम्बन्धित कर्मचारी/अधिकारी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए। बता दें कि सहारनपुर में आशीष कुमार ने जब से उपाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया, उन्होंने अभियंताओं पर लगाम लगाने की कोशिश की है। लेकिन, पवन शर्मा सरीखे कई और अभियंता इतने घाघ हो चुके हैं कि वह नया रास्ता खोज लेते हैं। अगर इस तरह के अभियंताओं और कुर्सी से लंबे समय तक चिपके बाबुओं का स्थानांतरण कर दिया जाए तो काफी हद तक सुधार हो सकता है।सितम ये है कि भाजपा सरकार मे भी ऐसा नहीं हो सका है और सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

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