Saturday, April 4, 2026
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सपनों को उड़ान दे रहा जिले का पहला कॉलेज

  • वर्ष 1848 में हुई थी संत जोसेफ गर्ल्स इंटर कॉलेज की स्थापना
  • आज मना रहा अपना स्थापना दिवस
  • जीजस एंड मैरी धर्मसंघ ने की थी कॉलेज की स्थापना

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: कहने को सरधना ऐतिहासिक चर्च के नाम से जाना जाता है। मगर कॉन्वेंट स्कूल आॅफ जीजस एंड मैरी धर्मसंघ द्वारा स्थापित बालिका कॉलेज की यात्रा भी इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज है। मेरठ जिले का प्रथम विद्यालय संत जोसेफ गर्ल्स इंटर कालेज बेटियों के सपनों को उड़ान दे रहा है। करीब 175 की अपनी यात्रा में इस कॉलेज ने हजारों लाखों बेटियों के सपनों को पंख देने का काम किया है।

स्वंतत्रता संग्राम से लेकर आजादी के मुहाने तक सुलगते हालात में भी इस कॉलेज ने अपनी सेवा देना बंद नहीं किया। जिसका नतीजा यह है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां बेहतर शिक्षा प्राप्त करके देशभर में सफलता की ऊंचाई छू रही हैं। आज कॉलेज अपनी 175वीं वर्षगांठ मना रहा है। सोमवार को आयोजित वर्षगांठ समारोह में डीएम समेत तमाम अधिकारी शिरकत करने पहुंचेंगे।

इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो करीब दो वर्ष पूर्व सरधना में ऐतिहासिक चर्च की नींव पड़ी थी। जिसे बेगम समरू ने बनवाया था। इस चर्च के लिए सरधना देश-विदेश तक प्रसिद्ध है। मगर चर्च स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही सरधना को एक ऐसा तोहफा मिला था, जिसकी खुशबू आज तक महक रही है। बात शुरू होती है वर्ष 1818 से। जब संत क्लोडीन थेवने ने जीजस एंड मैरी धर्मसंघ की स्थापना की थी। जो बालिकाओं की शिक्षा और जीवन सुधार पर कार्य करता है। इसी धर्मसंघ का एक समूह वर्ष 1842 में भारत भ्रमण पर आया था।

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तब उन्होंने देश में बालिकाओं के शिक्षा के स्तर को देखते हुए इस ओर कार्य करने का निर्णय लिया था। वर्ष 1848 में सरधना में चर्च परिसर से जोड़कर संत जोसेफ गर्ल्स इंटर कॉलेज की स्थापना की गई थी। जो पूरे मेरठ जिले का पहला बालिका कॉलेज था। लोगों को शिक्षा के प्रति जागरुक किया गया तो कॉलेज में दाखिले शुरू हुए। इसके बाद कॉलेज और क्षेत्र की बालिकाओं ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय के साथ कॉलेज में सुविधा और शिक्षा बढ़ी। बराबर में डिग्री कॉलेज की भी स्थापना कर दी गई।

संस्था की पहल ने बेटियों के सपनों को उड़ान देने का काम किया तो बालिकाओं ने भी अपनी प्रतिभा को हथियार बनाकर आगे बढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने 175 साल की इस यात्रा में कॉलेज ने हजारों लाखों बालिकाओं को बेहतर शिक्षा देकर देश सेवा में उतारा। जो आज देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। आज कॉलेज अपनी 175वीं वर्षगांठ मना रहा है। भव्य समारोह में डीएम दीपक मीणा समेत तमाम अधिकारी शिरकत करने पहुंचेंगे।

स्वतंत्रता संग्राम में भी कम नहीं हुआ हौंसला

कॉलेज स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही 1857 की क्रांति देश में जन्म ले चुकी थी। देशभर में क्रांति की आग सुलग रही थी। बालिकाओं की सुरक्षा को देखते हुए कुछ समय के लिए कॉलेज बंद कर दिया गया। सभी को लगता था कि अब कॉलेज नहीं खुलेगा। मगर हौंसलों की उड़ान कोई नहीं रोक सकता है। करीब छह माह बाद कॉलेज फिर से संचालित किया गया और आज तक बादस्तूर बेटियों के जीवन में शिक्षा का उजाला कर रहा है।

बेटियों की उड़ान कॉलेज की पहचान

प्रधानाचार्या सिस्टर मीना नायडू ने वर्ष 2010 में कार्यभार संभाला था। प्रधानाचार्या बताती हैं कि कॉलेज का सिर्फ एक ही उद्देश्य है। बालिकाओं को उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान करना। पहले कॉलेज में वाणिज्य और विज्ञान वर्ग की शिक्षा नहीं दी जाती थी। मगर कॉलेज ने प्रयास किया और सरकार से इन विषयों की शिक्षा के लिए भी मान्यता प्राप्त की। आज कॉलेज की छात्राएं देशभर में नाम रोशन कर रही हैं।

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