- जाकिर कालोनी से खरखौदा गई थी बरात, दहेज को लेकर हुआ बवाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के जाकिर कालोनी से खरखौदा के नानपुर गई बरात को दुल्हन के घर वालों से दहेज मांगना भारी पड़ गया। दुल्हन पक्ष के लोगों ने बरात को बंधक बनकर पिटाई शुरू कर दी। बरात का पिटता देखकर दूल्हा मौके से जान भाग गया। मिली जानकारी के जाकिर कालौनी निवासी आविद पुत्र हसमुद्दीन की बरात बीते रविवार को खरखौदा के नानपुर निवासी असलम के यहां पहुंची थी। असलम की बेटी शाहनाज के साथ आविद का निकाह तय हुआ था। बरात के पहुंचने के बाद दुल्हन वालों की ओर से स्वागत सत्कार किया गया।
खाना व नाश्ता शुरू कर दिया गया, लेकिन निगाह के पहले दूल्हे के परिजनों ने वहां लेन-देन को लेकर बात शुरू कर दी। माना जा रहा है कि उन्होंने दुल्हन के पिता के सामने कोई मांग रखी। इससे बात बिगड़ गई। बात भी ऐसी बिगड़ी कि दुल्हन पक्ष के लोगों ने बरातियों को बंधक बना लिया। वहां मारपीट शुरू हो गयी। मारपीट के बाद चीखों पुकार गयी। बताया जाता है कि मारपीट होते देखकर वहां से दूल्हा आविद जान बचाकर भागा, लेकिन उसके पिता हसमुद्दीन व भाई आसिफ को धरदबोचा। दोनों की जमकर पिटाई की गई।
वहां हंगामा होने लगा। हंगामे की सूचना पर खरखौदा पुलिस मौके पर पहुंच गयी। गांव में पंचायत बैठायी गयी। पुलिस की मौजदगी में पंचों ने दोनों पक्षों को समझौते के लिए तैयार किया। तय किया गया कि बरात के स्वागत सत्कार व खाने आदि में करीब ढाई लाख का खर्चा हुआ है वह तथा देना होगा तथा जो दहेज में चीजें दी हैं वो भी वापस करनी होगी। हसमुद्दीन ने बतौर हर्जाने के ढाई लाख तथा जो सामान दहेज में अब तक मिला था वो सब वापस कर दिया।

उसके बाद ही मामला शांत हो सका, लेकिन अभी भी मुसीबत टली नहीं थी। बगैर दुल्हन के जाएंगे तो बदनामी होगी। अपने करीबियों व रिश्तेदारों से बात की गयी। लड़की की तलाश की गयी तो एक रिश्ता मोदीनगर के सुहाना गांव में मिल गया। नानपुर से बरात सीधे सुहान गांव पहुंची। वहां से निकाह कराया तब दुल्हन को लेकर आविद घर लौटा।
रफीक अंसारी की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट की लेंगे शरण
शहर विधायक रफीक अंसारी की जमानत याचिका खारिज हो गई है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने रफीक की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसके बाद वह अभी जेल में ही रहेंगे। अब उनके वकील ने हाईकोर्ट की शरण में जाने की बात कही है, लेकिन वहां भी ग्रीष्मकालीन अवकाश होने की वजह से जल्द सुनवाई नहीं होगी। रफीक अंसारी के खिलाफ वारंट जारी होने के बाद भी वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे। जिसके बाद उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ और उन्हें 27 मई को बाराबंकी से गिरफ्तार किया गया था।
सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में एडीजे-9 बृजेश मणि त्रिपाठी की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई हुई जिसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, सोमवार को ही शहर विधायक की चौदह दिन की न्यायिक हिरासत भी पूरी हो गई है। बताते चले कि 1992 में मीट की दुकानों को लेकर कुरैशी व अंसारी बिरादरी के लोगों के बीच विवाद हुआ था। जिसमे दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए थे और आगजनी की गई थी। मामले को लेकर लिसाड़ी गेट व नौचंदी थाने पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए थे।
पुलिस ने मौजूदा पार्षद रफीक अंसारी व हाजी बुंदू समेत 22 लोगों को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद से ही रफीक अंसारी कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे जिसके बाद 1997 में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गया था। हाईकोर्ट ने मामले में डीजीपी को गिरफ्तार करने के आदेश दिये थे जिसके बाद 27 मई को उन्हें बाराबंकी से गिरफ्तार कर लिया गया था। अब रफीक के वकील ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

