Wednesday, January 28, 2026
- Advertisement -

आम आदमी तक होगा टैरिफ का असर

24 3

और अमेरिका के रिश्तों को दुनिया हमेशा लोकतंत्र और ताकत की साझेदारी मानती रही है, लेकिन मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने से इसमें खटास पड़ गई है। यह फैसला केवल आयात शुल्क का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी तक दिखेगा। अमेरिका ने पहले 7 अगस्त से भारत के निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और अब रूस से तेल व सैन्य उपकरण खरीदने की वजह से अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ और जोड़ दिया गया। इस तरह कुल 50 प्रतिशत आयत शुल्क लागू हो गया। ट्रम्प का तर्क है कि भारत अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैरिफ वसूलता है जबकि अमेरिका भारतीय सामानों पर कम टैक्स लगाता है। रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद भी अमेरिका की नाराजगी का कारण है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2 प्रतिशत तेल आयात करता था, लेकिन अब यह बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आज भारत चीन के बाद रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश बन चुका है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

अब सवाल है कि इस टैरिफ का असर किस पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। भारत से अमेरिका को हर साल करीब 48.2 अरब डॉलर का निर्यात होता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा ज्वेलरी, हीरे, टेक्सटाइल, गारमेंट्स, आॅटो कंपोनेंट्स, सीफूड और केमिकल्स का है। इन पर अब 50 प्रतिशत शुल्क लगने से अमेरिकी बाजार में ये उत्पाद महंगे हो जाएंगे। परिणाम यह होगा कि अमेरिकी कंपनियां भारतीय सामान का कम आॅर्डर देंगी। भारतीय कंपनियों को प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा और लाखों नौकरियों पर खतरा मंडराने लगेगा। खासकर ज्वेलरी और टैक्सटाइल सेक्टर में काम करने वाले श्रमिकों और कारीगरों को इसकी मार सबसे पहले झेलनी होगी। दूसरी ओर, कुछ सेक्टर फिलहाल इस टैरिफ से बाहर हैं। आईटी इंडस्ट्री चूंकि सर्विस सेक्टर का हिस्सा है, इसलिए फिलहाल इसकी एक्सपोर्ट कमाई पर असर नहीं पड़ेगा। फार्मा पर अभी शुल्क नहीं है, लेकिन ट्रम्प ने भविष्य में 150 प्रतिशत और यहां तक कि 250 प्रतिशत टैरिफ की धमकी भी दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को भी अभी अस्थायी छूट मिली हुई है। यानी अभी राहत है, लेकिन यह कब तक कायम रहेगी, कहना मुश्किल है।

आम आदमी पर इसका असर सीधे तौर पर रोजगार और महंगाई के रूप में दिखेगा। भारत से फिलहाल अमेरिका को सबसे ज्यादा निर्यात होता है, ऐसे में जब आर्डर घटेंगे तो कंपनियां उत्पादन कम करेंगी और छंटनी करना पड़ेगी। इससे लाखों परिवारों की आय पर संकट गहराएगा। साथ ही, जब कंपनियों का मुनाफा घटेगा तो वे घरेलू बाजार में अपने नुकसान की भरपाई कीमतें बढ़ाकर करेंगी। इस तरह आम उपभोक्ता को रोजमर्रा की चीजें महंगी पड़ेंगी। नौकरी और महंगाई दोनों का दबाव जीवन स्तर को प्रभावित करेगा। बड़ी तस्वीर में देखें तो अर्थव्यवस्था पर इसका असर साफ दिखेगा। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ 0.2 से 0.6 प्रतिशत तक धीमी हो सकती है। सरकार को अपनी व्यापार नीति में बदलाव करना होगा।

हालांकि, सरकार भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति बनाई है। अब भारत यूरोप, रूस, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका पर ज्यादा ध्यान देगा। सीफूड के लिए रूस, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया को टारगेट किया जा रहा है। ज्वेलरी और हीरे के लिए वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों पर नजर है। इसके अलावा भारत कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी कर रहा है। आइसलैंड, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड जैसे देशों के साथ डील हो चुकी है, ब्रिटेन के साथ अगले साल से लागू होगी और यूरोपीय संघ व आस्ट्रेलिया के साथ बातचीत चल रही है।

अब सवाल है कि भारत के पास विकल्प क्या हैं। पहला रास्ता डिप्लोमेसी का है। भारत को अमेरिका को यह समझाना होगा कि वह केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी भी है। दूसरा रास्ता है घरेलू बाजार को मजबूत करना। अगर निर्यात घटे तो घरेलू मांग बढ़ानी होगी। तीसरा रास्ता स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर को सपोर्ट देने का है, ताकि वे नए मार्केट पकड़ सकें। चौथा रास्ता ऊर्जा नीति में संतुलन का है—रूस से खरीद जारी रखते हुए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा। अंत में, यह साफ है कि यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी दोनों के लिए बड़ा झटका है। नौकरियों पर संकट, महंगाई का दबाव और जीडीपी में गिरावट, ये सब खतरे हैं। लेकिन भारत की ताकत हमेशा यही रही है कि उसने संकट को अवसर में बदला है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Iran Unrest: खामेनेई के खिलाफ उबाल जारी, 6,126 लोगों की मौत, ईरान में संकट गहराया

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अशांति व्याप्त...

Meerut News: वेस्ट यूपी में बदला मौसम का मिज़ाज, शीतलहर का कहर

जनवाणी ब्यूरो। मोदीपुरम: वेस्ट यूपी में मौसम एक बार फिर...
spot_imgspot_img