जनवाणी ब्यरो |
नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के आज 150 वर्ष पूरे हो गए। 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गया था। यह केवल एक कविता नहीं, बल्कि भारत की एकता, त्याग और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
‘वंदे मातरम’ का इतिहास
1875 में यह गीत पहली बार ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ। 1882 में बंकिम चंद्र ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया और 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान जब यह गीत सड़कों पर गूंजा, तब यह राजनीतिक प्रतिरोध का नारा बन गया।
उपन्यास ‘आनंदमठ’ की कहानी
‘आनंदमठ’ में संन्यासियों का एक समूह ‘मां भारती’ की सेवा को अपना धर्म मानता है। उनके लिए ‘वंदे मातरम’ केवल गीत नहीं, बल्कि पूजा का प्रतीक है। उपन्यास में मां की तीन मूर्तियां भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य का रूप दर्शाती हैं।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय: राष्ट्रभावना के अग्रदूत
बंकिम चंद्र (1838–1894) बंगाल के महान साहित्यकार और विचारक थे। ‘दुर्गेशनंदिनी’, ‘कपालकुंडला’ और ‘देवी चौधरानी’ जैसी रचनाओं से उन्होंने समाज में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई। ‘वंदे मातरम’ के माध्यम से उन्होंने बताया कि मातृभूमि ही सर्वोच्च देवी है।
स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा
1905 के स्वदेशी आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ आजादी का घोष बन गया। जब ब्रिटिश सरकार ने इसे गाने पर रोक लगाई, तब भी विद्यार्थी और क्रांतिकारी गिरफ्तारी की परवाह किए बिना इसे गाते रहे।
1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट में भीकाजी कामा ने जो पहला भारतीय तिरंगा फहराया, उस पर भी ‘वंदे मातरम’ लिखा था। मदनलाल धींगरा के अंतिम शब्द भी यही थे — “वंदे मातरम!”
राष्ट्रगीत बनने की यात्रा
1950 में संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया। तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि इसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाएगा।
150वीं वर्षगांठ पर भव्य उत्सव
केंद्र सरकार इस वर्ष पूरे देश में वंदे मातरम@150 समारोह मना रही है।
दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में राष्ट्रीय उद्घाटन समारोह
जिला और तहसील स्तर पर विशेष आयोजन
डाक टिकट, स्मारक सिक्का और प्रदर्शनी का विमोचन
आकाशवाणी और दूरदर्शन पर विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण
विश्व स्तर पर सम्मान
भारत के सभी दूतावासों और मिशनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत उत्सव और वृक्षारोपण अभियान आयोजित होंगे। ‘Vande Mataram: Salute to Mother Earth’ थीम पर देशभर में भित्ति चित्र और वृक्षारोपण अभियान भी चलेंगे।
प्रेरणा की विरासत
150 साल बाद भी ‘वंदे मातरम’ हर भारतीय के हृदय में गूंजता है। यह केवल इतिहास की गाथा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और एकता का अमर संदेश है।

