Saturday, March 14, 2026
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इस्लाम को बचाने के लिए दी गर्इं करबला में कुर्बानियां

  • सात मोहर्रम को भी जारी रहा जुलूसों और मजलिसों का सिलसिला, यौम ए अशरे की तैयारी शुरू

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मोर्हरम की सातवी तारीख को भी शहर सहित जैदी फार्म, लोहिया नगर में हजरत इमाम हुसैन और शौहदाये कर्बला की याद में मजलिसे हुयी जिसमें हजरत इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम की शहादत बया की गयी।
रामबाग कालोनी स्थित सैयद बाकर जैदी के अजाखाने में ईरान से आये मौलाना सैयद अम्मार हैदर रिजवी ने मजलिस को खिताब करते हुये कहा कि हजरत इमाम हुसैन से यजीद की हुकूमत को कोई खतरा नहीं था क्योंकि उनकी हुकूमत करने की ख्वाहिश नहीं थी।

यजीद इमाम हुसैन से इसलिये बेअत (आधीनता) चाहता था ताकि इमाम हुसैन, यजीद के हर गैर इस्लामी बेजा अमल को तसलीम कर लें और असल दीन-ए-इस्लाम को मिटाया जा सके, इसलिये हजरत इमाम हुसैन ने दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिये तीन दिन भूखा-प्यासा रहकर अपनी और 71 जानिसारों की कुबार्नी पेश की। प्रारम्भ में इनसे पूर्व सुप्रसिद्ध सौजख्वान खुरशीद अकबर जै़दी ने सौजख्वानी की मजलिस के बाद जुलूस-ए-अलम हजरत-ए-अब्बास गमगीन माहौल में बरामद हुआ।

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जिसमें जावेद रजा बाशु, शाहनवाज हुसैन, अर्शी नकवी, आदि ने पुरसौज नौहे पढ़कर हुसैनियत का पैगाम दिया और बड़ी संख्या में मौजूद हुसैनी सौगवारों ने मातमपुर्सी की। जुलूस कौमी एकता मार्ग, शाहजलाल हॉल, जै़दी साहब की नई कोठी के सामने से होता हुआ जै़दी नगर सोसायटी स्थित इमामबारगाह पंजेतनी पहुंचकर सम्पन्न हुआ। इसके अतिरिक्त शहर छत्ता अली रजा वैली बाजार में जुलजनाह का जुलूस बरामद हुआ जिसमें अंजुमन इमामिया के वाजिद अली गप्पू, चांद मियां, रविश, मीसम व विभिन्न अंजुमनों के नौहेख्वानों ने गमगीन नौहे पढ़े और बड़ी संख्या में मौजूद हुसैनी सौगवारों ने मातम किया। अंजुमन तंजीम ए अब्बास के संस्थापक सैयद तालिब अली जैदी और उनकी अंजुमन के नोहाखानो ने भी जुलूस में नोहे पढ़े और मातम किया। जुलूस वैली बाजार से गुजरता हुआ मनसबिया घंटाघर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में कडी सुरक्षा व्यवस्था रही।

मोहर्रम कमैटी के मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी ने बताया कि आठ मोहर्रम को विभिन्न स्थानों से जुलूस-ए-अलम बरामद होंगे, मौलाना अफजाल हुसैन के अजाखाने कोठी अतानस से सांय 6 बजे काजिम हुसैन के अजाखाने हुसैनाबाद से तथा अजाखाना शायक अली कोटला से रात्री आठ बजे अलम-ए-मुबारक के जुलूस बरामद होगें।

उधर मोहर्रम कमेटी के संयोजक सैय्यद शाह अब्बास सफवी ने बताया कि मोहर्रम के यौम ए आशूरा की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। इस दिन सुबह में एक जुलूस जाटव गेट से निकलेगा और तबर्रुक शाह विलायत साहब कब्रिस्तान में दफन किए जाएंगे। जबकि मुख्य जुलूस दोपहर दो बजे घंटा घर से शुरू होगा और रेलवे रोड स्थित वक्फ मनसबिया में पहुंच कर संपन्न होगा।

मेरे सब्र में या रब कोई कमी तो नहीं…

शनिवार को मोहर्रम की सातवीं तारीख पर नगर व खिर्वा जलालपुर गांव में अलम का जुलूस बरामद हुआ। जुलूस में इमाम हुसैन को याद करके सोगवार फफक-फफक कर रो पड़े। सोगवारों ने हुसैन को याद कर मातम करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस व पीएसी बल तैनात रहा।

खिर्वा जलालपुर गांव में बरामद हुए जुलूस में बाबूजी, लंबरदार, फतह मोहम्मद, जहरा के इमामबाड़े से अलम निकाले गए। जुलूस गांव में घूमने के बाद हुसैनी चौक पर पहुंचा। इस दौरान सोगवारों ने नोहा पढ़ा कि रिदाये जैनबों कुलसूं भी बची तो नहीं, के मेरे सब्र में या रब कोई कमी तो नहीं। जुलूस में सोगवार इमाम हुसैन को याद करके फफक-फफक कर रो रहे थे।

हुसैन की याद मेें सोगवारों ने मातम करके खुद को लहूलुहान कर लिया था। मौलाना ने जनाब हजरत कासिम की शाहदत को बयान किया। साथ ही बताया कि मोहर्रम की सातवीं तारीख को यजीद ने इमाम हुसैन के परिवार के लिए पानी बंद कर दिया था। वहीं नगर के स्वामियान मोहल्ला स्थित इमामबाड़ा नक्कालान से भी अलम निकाले गए। नगर में चौक बाजार, मालियान, भाटवाड़ा, ऊंचापुर, बैरून सराय, भुलरिया आदि से होते हुए आजादनगर मोहल्ले में जाकर संपन्न हुए।

मोहर्रम: जुलूसे जुलजनाह में सोगवारों ने किया मातम

शनिवार को पहली मरदानी मजलिस दयानंद स्थित ईमाम बारगाह दरबार-ए-हुसैनी में सुबह 8 बजे शुरू हुई। जिसमें मिंबर से मौलाना अजहर जैदी ईमाम जुमा वल जमात शिया जामा मस्जिद ने खिताब किया। इसके बाद दूसरी मजलिस ईमाम बारगाह कोटला में हुई। जिसमें मिम्बर से मौलाना कर्रार ने खिताब किया। यहां के बाद तीसरी मजलिस ईमाम बारगाह खैरात अली में हुई, जहां पर मिम्बर से मौलाना फिरदौस मेहंदी ने फजाएल व मसायब हजरत कासिम अलै सलाम बयान किए।

मजलिस के बाद शबीहे ताबूत हजरत कासिम अलै सलाम बरामद हुई। तत्पश्चात नमाज जोहर कदीमी मजलिस ईमाम बारगाह हजरत अबू तालिब मोहल्ला तिहाई में हुई। जिसमें मर्सिया ख्वानी फूल मियां जैदी ने की और मिम्बर से मौलाना इलियास ने खिताब किया। इसके बाद बाद मजलिस शबीह-ए-जुल्जनाह बरामद हुआ। जुलूस की शक्ल में मोहल्ला तिहाई से शुरू होकर भैरव गिर मन्दिर, दरबारे हुसैनी, ईमाम बारगाह कोटला, चोकट्टा, जामा मस्जिद, डेरे वाला पुल, गुरुद्वारा, थाना मवाना, तेली वाला कुआं, खलील चौक, ईमाम बारगाह खैरात अली, ईमाम बारगाह हामिद हुसैन, खतोलिया चौक, राजोवाली मस्जिद, ईमाम बारगाह पंजेतनी शाहपुरगढ़ी से होते हुए ईमाम बारगाह हजरत अबू तालिब मोहल्ला तिहाई में जाकर खत्म हुआ।

जुलूस में ये रहे शामिल

जुलूस में अंजुमने हैदरी खैरात अली कोटला, अंजुमने हुसैनी तिहाई और अंजुमने दस्ता ए अबासिया शाहपुरगढ़ी के रजाकारों ने मातम पुरसी की। सबसे आगे अंजुमन हैदरी खैरात कोटला थी। इसके बाद अंजुमने दस्ता ए अबासिया शाहपुरगढ़ी और इनके बाद अंजुमने हुसैनी तिहाई थी। इन अंजुमनों के साथ साथ दुलदुल की सवारी थी।

इस्लाम का आतंकवाद से रिश्ता ना कल था ना आज

कस्बे में मोहर्रम की सातवी तारीख को मौहम्मद साहब (सल) के नवासे हजरत हसन के बेटे जनाबे कासिम की याद में हुई मजलिस को खिताब फरमा रहे मौलाना असकरी मेरठी ने बताया कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाने की खातिर अपने पूरे खानदान को दीन पर कुर्बान कर दिया। आतंकवाद के खिलाफ जुलूस निकालनें का नाम मोहर्रम है। जिसमे आतंकवादी यजीद था। जिसने इमाम हुसैन के तमाम घर वालो और उनके साथियो को और उनके छह माह के बच्चे तक को भूखा प्यासा शहीद कर दिया।

मजलिस में औन मौहम्मद, चांद रजा, शब्बू, मौहम्मद नबी, आस मौहम्मद ने सोजख्वानी की। पेशख्वानी कर रहे मौलाना काजिम रजा सिरसवी ने अपने कलाम अजादारों को सुनाए। बादे मजलिस डोली-ए-जनाबे कुबरा व शबीहे जुलजनाह बरामद किया गया। नौहेख्वानी कर रहे हुसैन, सलमान, अबुल हसन, तनवीर रिजवी ने मौहम्मद साहब के नवासे इमाम हसन के बेटे जनाबे कासिम पर हुए जुल्म की दांस्ता बया करते हुए उनकी शहादत के बारे मे बताया।

जुलूस मे ही अजादार फूट-फूटकर रोने लगे। मामतपुर्सी अंजुमन फरोग ए अजा महलका, अंजुमने हुसैनी लावड़, अजुंमन मुहाफिजे परचम ए गाजी फलावदा, अंजुमने हुसैनीह बातनौर ने की।इस दौरान शाही अब्बास, नईम हसन, शमीम हसन, डा अली अब्बास, जरी अब्बास, शब्बीर हसन, मेहराज हसन, नजर अब्बास, फाईज अब्बास, दिलदार, वारिस, वाइज अब्बास, कमर अब्बास, अम्मार रजा, राजा, काजिम, काशिफ, ताजीम अब्बास, आरजू रिजवी, शहजान, मौलाना हैदर, शहंशाह जफर, मशाहिद हुसैन, शोकत अली, अली मिसबा, अमन, कैफ आदि मौजूद रहे।

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