Wednesday, January 19, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutखादर में तबाही का मंजर लौटा

खादर में तबाही का मंजर लौटा

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  • जलस्तर गंगा की धारा में पहुंचा, अभी कई गांव जलमग्न, फसलें बर्बाद, किसान मायूस

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: पिछले तीन दिन से खादर क्षेत्र के दर्जनों गांव में तबाही मचाने के बाद गंगा का जलस्तर वापस गंगा की धारा में पहुंचने लगा है। हालांकि कई गांव के जंगल अब भी जलमग्न है और संपर्क मार्गों पर भी पानी है। बाढ़ के पानी की वजह से न सिर्फ वर्तमान में लगी फसल बर्बाद हुई है, बल्कि इसका प्रभाव आगामी फसलों पर भी पड़ा है।

वैसे किसान जिन्होंने अगली फसल लगाने के लिए खेत तैयार कर रखा था। उनके मंसूबों पर भी पानी फिर गया है। बाढ़ के पानी से मक्का एवं आलू की खेती को भी नुकसान हुआ है। बाढ़ से बर्बाद हुए किसानों के मंसूबे इस समय सरकारी राहत पर लगी हुई है। सरकारी स्तर से कुछ राहत मिलने से उनके घावों पर मरहम जरूर लग पायेगा। पूरी तरह बर्बाद हुए किसानों की आस सरकारी राहत पर टिकी हुई है।

बेमौसम बरसात से बड़े गंगा के जलस्तर के कारण मंगलवार को गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। जिससे खादर क्षेत्र के दर्जनों गांव पानी की चपेट में आ गए थे और लगभग एक दर्जन गांव में पानी पहुंच गया था। पिछले तीन दिन तक खादर क्षेत्र में तबाही मचाने के बाद चौथे दिन गंगा का पानी वापस गंगा की धारा में जाने लगा और खादर क्षेत्र के कई रास्तों पर आवागमन शुरू हो गया।

हालांकि अब भी रठौराकलां, दबखेड़ी, हंसापुर परसापुर, शेरपुर नई बस्ती, हरिपुर, कुन्हेडा, भीमकुंड, दुधली आदि दर्जनों गांव के जंगल जलमग्न हैं और फसलें भी पानी में डूबी हुई हैं। जिनके नष्ट होने की संभावनाएं और अधिक बढ़ गई हैं। शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर 68 हजार क्यूसेक पर चल रहा है।

गंगा का जलस्तर कम होने से ग्रामीणों और शासन प्रशासन के अधिकारी ने राहत की सांस जरूरी है। परंतु दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई है। बाढ़ का पानी कम होने से घरों और जंगलों में अभी सिल्ट जमा हो गई है। खादर क्षेत्र में बुधवार के मुकाबले बृहस्पतिवार को जलस्तर में काफी गिरावट आने से पानी गांव से जंगल में पहुंच गया। जिससे सोती नदी उफान पर है, सोती नदी के सहारे पानी वापस गंगा की धारा में आगे की ओर पहुंच रहा है।

बाढ़ के पानी में आई सिल्ट से बर्बाद हुई फसलें

बाढ़ के पानी में बड़े पैमाने पर गंगा में आई सिल्ट खादर खादर क्षेत्र के किसानों के लिए बबार्दी का कारण बनी है। धान गन्ना और चारे की फसल पर सिल्ट जम जाने के कारण यह फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। कहीं-कहीं तो सिल्ट ने खेतों में फसलों को ही दबा दिया है। जिससे कई क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।

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