- बाजार में चॉकलेट फ्लेवर से लेकर कई तरह के घेवर की वैरायटी है मौजूद
- 800 रुपये किलो तक की रेंज में मौजूद है घेवर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सावन का महीना चल रहा है। अब हलवाइयों की दुकान पर रखा हुआ घेवर सावन महीने का अहसास करा रहा है। सावन का महीना शुरु होते ही बाजार में घेवर और गुजियों की सुगंध भी महकने लगती है। वहीं, दूसरी ओर सावन के माह में बेटियों व नवविवाहितों को सिंदारे के रूप में माता-पिता कपड़ों के साथ शगुन के रूप में घेवर व गुजियां भेंट करते हैं। सावन का महीना लगते ही सिंदारे शुरू हो गए है।
जिससे देखते हुए घेवर व गुजियों का बाजार भी सजकर तैयार हो गया है। सावन माह की आहट शुरू होने के साथ ही बाजार में घेवर की बहार शुरू हो गई है। इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में कुछ समय पहले ही घेवर की बिक्री शुरू हो गई है। वैसे भी मेरठ का घेवर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां का घेवर एनसीआर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आपूर्ति किया जाता है। इसका मुख्य कारण यहां के पुराने परंपरागत मुख्य बाजारों में बिकने वाला गुणवत्ता युक्त घेवर है।

यहां के घेवर की मांग राजधानी दिल्ली में भी है। घेवर मैदा से बना, मधुमक्खी के छत्ते की तरह दिखाई देने वाला मिष्ठान है। सावन का महीना शुरू होते ही मन अठखेलियां करने लगता है। बारिश की रिमझिम फुहारें, पेड़ों पर पड़े झूले, महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले सावन के गीत, हंसी ठिठौली और मुंह मीठा करने के लिए घेवर व गुजियों की मिठास। यह सब सावन में ही देखने को मिलता है।
हरियाली तीज का त्योहार 31 जुलाई को मनाया जाएगा। लोगों की पसंद को ध्यान में रखकर बाजार आने वाले त्योहारों के सीजन के लिए तैयार हो गया है। मिठाई की दुकानें भी सज गई है। दुकानों पर कई प्रकार के फ्लेवर में घेवर को तैयार किया गया है। इसमें सादा व मलाई घेवर के साथ चॉकलेट घेवर को भी उतारा गया है। वहीं बादाम, पिस्ता, केसर, रोज जैसी कई स्वादिष्ट वैरायटी भी मिठाईयों की दुकानों पर तैयार की जा रही है।
सावन के महीने में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली मिठाई घेवर ही होती है। सावन शुरु होते ही इसे बनाने की तैयारी शुरु हो जाती है। देहली स्वीट के संचालक सोरब शर्मा ने बताया कि सबसे ज्यादा मलाई घेवर पसंद किया जाता है। वहीं ड्राई घेवर की भी काफी डिमांड रहती है। मलाई घेवर की लाइफ दो दिन की ही होती है।
सावन में बढ़ जाती है घेवर की मांग
त्योहारी सीजन, विशेष तौर पर सावन माह में यहां के घेवर की मांग काफी बढ़ जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि स्थानीय लोगों के रिश्तेदार जो एनसीआर क्षेत्र में रहते हैं, यहां से घेवर मंगवाते हैं। इसके अलावा सावन माह में लोग तीज व रक्षाबंधन के पर्व पर मिठाई के रूप में भी घेवर ही देना पसंद करते हैं।

शादी के बाद बहन-बेटियों को सिंदारा में भी घेवर अवश्य दिया जाता है। सावन के महीने में घेवर की खुशबू पूरे बाजार को महका देती है और तीज व रक्षाबंधन के अवसर पर घेवर की दुकानों पर भीड़ देखते ही बनती है। घेवर दो तरह को होता है, फीका व मीठा। फीके घेवर को बेसन लपेटकर तलकर पकौड़े बनाए जाते हैं। घेवर के अलावा फेनियां भी बाजार में खूब बिकती हैं।
ये है रेंज
- सादा घेवर 380
- मलाई वाला घेवर 500 रुपये से 600 रुपये तक
- आम घेवर 400 रुपये से 500 रुपये तक
- शुगर फ्री घेवर 700 रुपये से 800 रुपये किलो तक
- चॉकलेट घेवर 500 से 800 रुपये किलो तक

