- एक हजार चमगादड़ रहते हैं परिवार के साथ, इंसानों को नहीं कोई खतरा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अगर आप बैजल भवन के पास सिंचाई विभाग कार्यालय के तरफ वाली रोड पर जाते हैं तो 70-80 फीट लंबे पेड़ों पर लटके हुए एक हजार से ज्यादा चमगादड़ आपको दिखाई पड़ जाएंगे। यह अब से नहीं करीब 50 सालों से अपने परिवार के साथ रहते आए हैं। रात को यह अपने शिकार पर चले जाते हैं। सुबह होते ही अपने स्थानों पर लौट आते हैं। उसके बाद यह पेड़ों की शाखाओं पर दिनभर उल्टे लटके रहते हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि यह चमगादड़ किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
अगर कहा जाए तो मेरठ कालेज के पास पुराने पेड़ों पर चमगादड़ों ने अपनी कालोनी बसा ली है। 50 साल पहले इन चमगादड़ों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन आज इनकी संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर रही है। सबसे ज्यादा चमगादड़ पुराने पेड़ या सुनसान जगह को अपना सुरक्षित स्थान मानते हैं। दिन भर यह वहीं पर उल्टे लटके रहते हैं। इसके बाद वह रात होते ही आसपास क्षेत्रों में अपने शिकार के लिए चले जाते हैं।
इन जगहों पर भी रहते हैं चमगादड़
इसके साथ मेरठ में इनकी संख्या काफी है। कैंट बोर्ड के आसपास पुराने पेड़, हस्तिनापुर के जंगल, परीक्षितगढ़, मवाना, सरधना आदि स्थानों पर यह काफी पाये जाते हैं।
चूहे, छिपकली का करते हैं शिकार
बताया गया कि यह चूहे, छिपकली व अन्य कीड़े-मकोड़ों का रात को शिकार करते हैं। इसके बाद दिन निकलते ही वापस अपने पेड़ों पर चले जाते हैं।
चील और गिद्ध से रहता है बड़ा खतरा
आसपास के लोगों ने बताया कि यहां पर अक्सर चील व गिद्ध चमगादड़ों का शिकार करते हुए देखे जा सकते हैं।
उचित वातावरण में बनाते हैं घर
डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि चमगादड़ जंगली एरिया, पुराने पेड़, पुराने खंडहर हुए भवन आदि स्थानों पर रहते हैं। अगर उन्हें उचित भोजन, रहने के लिए सुरक्षित स्थान, उचित वातावरण मिले तो वह उसे अपना घर बना लेते हैं।

