Friday, April 4, 2025
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बाढ़ आई तो पुल ढहने का है खतरा

  • विभागीय इंजीनियर्स ने ही जता दी आशंका
  • चेतावाला पर अब भी न चेता पीडब्ल्यूडी तो पीटते रहिए लकीर !

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हस्तिनापुर नगरी जिसकी रग रग महाभारत काल का इतिहास समेटे हुए है, यहां बहने वाली बूढ़ी गंगा जिसके कांधों पर हस्तिनापुर की जिम्मेदारियों का बोझ है। वहीं, हस्तिनापुर मानो लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के लिए एक श्राप बन गई है। चेतावाला घाट अथवा भीकुंड प्रकरण पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का पीछा नहीं छोड़ रहा है।

जैसे-जैसे बरसात का मौसम नजदीक आता जा रहा है, विभागीय अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की सांसे फूलने लगी हैं। साल भर दूसरे कामों में व्यस्त रहने वाले मेरठ और लखनऊ पीडब्ल्यूडी अधिकारी यदि समय रहते भीकुंड प्रकरण पर कसरत करते तो आज जरूर चैन की बंसी बजाते।

दरअसल, अभी तक भी तटबंध ने होना इस नहर के लिए एक अभिशाप बन चुका है। ऐसा नहीं कि गाइड बंध के लिए कवायद नहीं की गई, लेकिन सच्चाई यह भी है कि यह कवायद फिलहाल कागजों तक ही सीमित रही। विभागीय सूत्र दलील तो यहां तक देते हैं कि गाइड बंध का बजट (167 करोड़ रुपये) बड़ा होने के कारण शासन में बैठे विभागीय अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी रही।

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लगभग पौने दो साल पहले जब इस नहर में हादसा हुआ था तब से लेकर आज तक भी कागजों पर तो खूब घोड़े दौड़े लेकिन जमीन पर सब कुछ ‘सिफर’ रहा। रही सही कसर एप्रोच रोड टूटने से पूरी हो गई। यह एप्रोच रोड भी आज तक नहीं बनी। हालांकि 24 अगस्त 2022 को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नरेन्द्र भूषण पूरे लाव लश्कर के साथ इस डोलते पुल पर जांच के पहुंचे, लेकिन मामला फिर भी जस का तस रहा।

हालांकि इस दौरान संबधित ठेकेदार की भी जमकर क्लास लगी और एई से लेकर जेई और दूसरे अधिकारियों की सांसे भी अटकी रहीं। अब तो विभागीय इंजीनियर्स ने यहां तक चेता दिया है कि यदि इस बरसात यहां फिर से बाढ़ आती है तो फिर इस पुल का ‘अल्लाह ही मालिक है’।

मवाना में गेहूं क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा

मवाना: भीषण गर्मी में गेहूं खरीद के मामले में तहसील क्षेत्र के तमाम सरकारी क्रय केंद्र हांफ रहे हैं। खुले बाजार में गेहूं बिक्री पर किसानों को ज्यादा भाव मिल रहा है। खेत-खलिहानों से ही अनाज व्यापारी व निजी एजेंसियां गेहूं खरीद रही हैं और प्रति कुंतल पर 2300 रुपये से लेकर 2400 रुपये तक भुगतान कर रही हैं, जबकि सरकारी भाव 2275 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया गया है। मवाना कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खुले सरकारी गेहूं खरीद के तीनों केंद्रों पर तैनात कर्मचारी अधिकांश समय खाली बैठकर बीता रहे हैं।

क्षेत्र में हस्तिनापुर रोड स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खाद्य विभाग, भारतीय खादय निगम और मवाना सहकारी क्रय-विक्रय समिति मवाना के तीन गेहूं खरीद केंद्र संचालित है। हालांकि सभी गेहूं खरीद केंद्र एक मार्च से खोल दिये गये थे लेकिन मार्च के पूरे माह और 17 अप्रैल तक सभी केंद्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो सकी। इन केंद्रों पर अब तक भारतीय खादय निगम के प्रभारी सहायक श्रेणी प्रथम मोनू कुमार ने बताया कि उनके केंद्र पर 113 कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी है। खाद्य विभाग के केंद्र प्रभारी क्षेत्रीय विपणन अधिकारी पवन धामा कहते है कि उनके केंद्र पर 183 कुंतल गेहूं खरीदा जा चुका है।

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अभी तक सरकार की ओर से गेहूं खरीद का लक्ष्य तय नहीं किया गया है। इनके अलावा मवाना सहकारी क्रय-विक्रय समिति मवाना पर तैनात लेखाकार राजीव कुमार ने बताया कि उनके केंद्र पर सबसे ज्यादा 373 कुंतल गेहूं की खरीद हो पाई है। तीनों केंद्र रोजाना सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक खुले रहते है। उधर निलोहा निवासी किसान रणबीर सिंह ने बताया कि इस साल किसानों ने गेहूं की बुवाई कम क्षेत्रफल में की थी, इस कारण केंद्रों पर बेचने वाले किसानों की संख्या कम है।

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