- सुस्ती में पुलिस, बेखौफ हुए बदमाश, एक माह में क्षेत्र में हुई दर्जनों चोरी
- गश्त के नाम पर पुलिस कर रही सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति
- कार्रवाई न होते देख चोरों के हौसले हुए बुलंद
जनवाणी संवाददाता |
बहसूमा: अपराधी मस्त, पुलिस पस्त, जनता त्रस्त, इन दिनों शहर समेत जिले के हालात ऐसे ही हैं। अपराधियों के जेहन से पुलिस का खौफ निकल चुका है। चोर आसानी से माल ले जाने में भी सफल हो गए। शहर से लेकर देहात तक में बदमाशों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आए दिन हो रही बड़ी लूटपाट से लोग परेशान हैं, इनकी रातों की नींद भी उड़ गई है। बदमाशों के अंदर से पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। दिन का उजाला, लोगों की भीड़, बाइक सवार हथियारबंद बदमाश, दिनदहाड़े फिल्मी स्टाइल में लूट।
प्राइवेट बैंक पर वारदात को अंजाम दे इत्मीनान से भाग जाना, निश्चित रूप से अपराधियों में खाकी का खौफ खत्म होने की ओर इशारा करता है। बड़ी वारदात को अंजाम दे अपराधी आसानी से फरार हो जाते हैं और हमेशा की तरफ पुलिस नाकामी का रोना रोती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।इन दिनों में बहसूमा थाना क्षेत्र के गांव में चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही है। बीती रात में चोरों ने तीन नलकूप व एक गाड़ी चोरी की घटना घटित हुई है।
एक माह में लगभग दर्जनों चोरी हो चुकी है, लेकिन पुलिस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। आजतक एक भी चोर को नहीं पकड़ा है। पुलिस ने एक माह में हुई चोरियों का खुलासा तो दूर चोरों को पकड़ना भी गवारा नहीं समझा। पिछले एक माह से क्षेत्र के कई गांव में दर्जनों चोरी हो चुकी है। पीड़ितों ने थाने पर तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन खुलासा आजतक नहीं हुआ। किसानों ने बताया कि यदि एक सप्ताह के अंदर मामलों का खुलासा नहीं किया गया तो किसान आंदोलन करने को मजबूर हो जाएगा।
रात में सड़कों पर नहीं दिखती पुलिस
दिन में भले पुलिस कहीं चौराहों-तिराहों पर खड़ी या सड़कों पर गश्त करती नजर आ जाती हो, लेकिन रात को पुलिस भी नदारद रहती है। यही नहीं संवेदनशील क्षेत्रों में भी पुलिस रात को गश्त नहीं करती। पुलिस अधीक्षक थानाध्यक्ष समेत बीट दारोगा, हल्का सिपाहियों तक को रात्रि गश्त कर निर्देश दे चुके हैं, लेकिन पुलिस है कि रात्रि में ही नींद आ जाती है और चोर चोरी की घटना को अंजाम दे कर चले जाते हैं।
पुलिस के वजूद पर खड़ा हुआ सवाल
अपराधियों की सक्रियता के पीछे अब लोग पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ को वजह मानने के लिए मजबूर हो गए हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लोगों ने अब यह कहना शुरू कर दिया है कि पुलिस अपना वजूद और अस्तित्व खो चुकी है। शायद यही वजह है कि वह खुलकर अपराधियों के गिरेबान को कस नहीं पा रही। क्योंकि घटनाओं को बेखौफ होकर अंजाम देने वालों के सिर पर खाकी का ही हाथ होता है। दबी जुबान लोगों की मानें तो जिले में अपराध बेलगाम होने के पीछे यह एक बड़ी वजह है। पुलिस की नाकामी लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन चुकी है।
लूट और चोरी की वारदातें
- केस-1: टिकौला शुगर मिल का गन्ना क्रय केंद्र का धर्मकांटा चारी।
- केस-2: रामपुर घोरिया मार्ग पर खतौली मिल का गन्ना क्रय केंद्र का धर्मकांटा चोरी।
- केस-3: गांव मोड़खुर्द निवासी अफशरून के कुंबल कर भैंसा व भैंस चोरी।
- केस-4: दर्जनों किसानों के नलकूप के स्टार्टर व उपकरण चोरी।
- केस-5: मौड़खुर्द में दर्जनों नलकूपों को उखाड़कर कीमती सामान चोरी।
- केस-6: रामराज में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान का ताला तोड़कर लाखों का सामान चोरी।
- केस-7: गांव मोहम्मदपुर शकिस्त में नलकूप से स्टार्टर, मोटर, तार चोरी।
- केस-8: गांव मौड़खुर्द से गाड़ी चोर।

