
खाड़ी देशों में चल रहे तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। गैस संकट ने रसोई के बजट और ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। चुनौती और संकट बड़ा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट आॅफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 फीसदी हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी कच्चा तेल और 54 फीसदी एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जिसका उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है।
गैस-तेल संकट पर पीएम मोदी ने संसद में कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है। लेकिन जमीनी हालात देखें तो ऐसा आभास होता है कि सरकार जो बता रही है, वो आधा सच है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। दिलचस्मप बात यह है कि मोदी सरकार एक तरफ तो किसी तरह का संकट होने की बात से ही इनकार कर रही है, वहीं दूसरी ओर वे यह भी कह रहे हैं कि, “जिस तरह भारत से कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए संकट से उबरा था, उसी तरह एलपीजी के संकट से भी उबर जाएगा।” सवाल है कि जब आप संकट मान ही नहीं रहे हैं तो फिर किस संकट से उबरने की बात कर रहे हैं?
सवाल यह भी है कि अगर सब कुछ ठीक है, गैस सिलेंडरों की कमी नहीं है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से सुचारू रूप से काम कर रही है तो सुप्रीम कोर्ट की कैंटीन में मेन कोर्स का खाना बनना क्यों बंद हो गया? अयोध्या में चलने वाली राम रसोई क्यों बंद हुई, जहां 25 हजार तीर्थयात्री प्रतिदिन निशुल्क भोजन करते हैं? स्वयं मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में 35 साल से तीर्थयात्रियों के लिए चल रही रसोई क्यों बंद है? भारतीय रेलवे अपनी कैटरिंग सर्विस क्यों सीमित करने की तैयारी कर रहा है?
जमीनी हकीकत यह है कि देशभर में सिलेंडर की कमी दिख रही है। खान पान का कारोबार सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। इन सबके बीच एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। आॅयल मार्केटिंग कंपनियों के अनुसार अब जिनके यहां दो एलपीजी सिलेंडर हैं, उन्हें 35 दिन बाद गैस सिलेंडर की बुकिंग दी जाएगी। हालांकि सिंगल सिलेंडर वालों के लिए बुकिंग की अवधि फिलहाल 25 दिन ही रहेगी। इसके अलावा, उज्जवला योजना वाले उपभोक्ताओं की 45 दिन बाद बुकिंग स्वीकार की जाएगी। कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति शासन के आदेशानुसार सिर्फ आपात सेवाओं और शिक्षण संस्थानों के लिए की जा रही है।
आंकड़ों के आलोक में बात की जाए तो 2014 तक देश में केवल 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब दोगुने से भी अधिक बढ़कर 33 करोड़ हो गए हैं। भारत सरकार ने “उज्ज्वला” या “प्रकाश” स्वच्छ ऊर्जा योजना को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत गरीब परिवारों को 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए हैं।बढ़ती जरूरतों के लिहाज से पिछले एक दशक में सरकार ने एलपीजी बॉटलिंग क्षमता को दोगुना कर दिया है, जबकि वितरण केंद्रों की संख्या 13,000 से बढ़कर 25,000 हो गई है। भारत ने पिछले 11 साल में अपनी क्रूड आॅयल इम्पोर्ट का डाइवर्सिफिकेशन किया है। पहले 27 देशों से एनर्जी इम्पोर्ट होता था, आज 41 देशों से इम्पोर्ट हो रहा है। वैश्विक संकट के आर्थिक असर को देखते हुए पीएम मोदी ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार ने 7 नए एम्पावर्ड ग्रुप्स का गठन किया है। ये ग्रुप पेट्रोल, डीजल, गैस और सप्लाई चेन जैसी चुनौतियों पर 24 घंटे नजर रखेंगे।
गैस संकट से उपजी स्थिति का फायदा उठाते हुए कुछ बेईमान तत्व सिलेंडरों को काला बाजार में बेच रहे हैं, जिससे आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देश भर में लगातार छापेमारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अब तक 3500 से ज्यादा छापे मारे गए हैं और करीब 1400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। तेल कंपनियों के अधिकारियों ने 2000 से ज्यादा पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसियों पर अचानक जांच भी की है, ताकि सप्लाई सुचारू बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो। हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर को घटाकर 10 किलो करने वाली है। ऐसे में आम लोगों में चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब इस पर सरकार ने साफ-साफ स्थिति स्पष्ट कर दी है और इन सभी खबरों को अफवाह बताया है।
दरअसल भारत में रसोई गैस सिलेंडर की समस्या आज की नहीं है। पहले की सरकारों के समय भी यह समस्या रही है। इस समस्या की मूल वजह है सरकार के पास गैस भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होना। चूंकि गैस का भंडारण महंगा पड़ता है, इसलिए भारत ने खुद को लगातार आपूर्ति पर ही निर्भर बनाए रखा। मौजूदा सरकार ने भी गैस के भंडारण की समुचित व्यवस्था करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। मोदी की सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में रसोई गैस के कनेक्शन बांटने शुरू किए और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने का अभियान शुरू किया तो उसके हिसाब से एलपीजी के भंडारण की व्यवस्था भी करनी चाहिए थी और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर करना चाहिए था। साथ ही आयात पर निर्भरता कम करनी चाहिए थी और अपना उत्पादन बढ़ाना चाहिए था। मौजूदा गैस संकट को कम करने के लिए सरकार अब घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने पर जोर दे रही है ताकि विदेशी आयात और जहाजों पर निर्भरता कम की जा सके। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आदेश जारी कर पाइपलाइन बिछाने के रास्ते की सभी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को खत्म कर दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में किसी भी देश में घटी घटना, आपदा या युद्ध का असर दुनियाभर के देशों पर पड़ता है। वर्तमान ईरान इजराइल युद्ध का दुष्परिणाम सारी दुनिया भोग रही है। हमारा देश भी इससे अछूता नहीं है। गैस का संकट बड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संकट के समय जहां सरकार मशीनरी को सक्रियता बढ़ाने और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। वहीं विपक्षी दलों को भी ऐसे बयानबाज और राजनीति से बाज आना चाहिए जिससे देश में अव्यवस्था न फैले। वहीं नागरिकों को भी पैनिक होने की बजाय सरकारी मशीनरी का सहयोग करना होगा। इस संकट से धैर्यपूर्वक मिलकर ही निपटा जा सकता है।

