- शासकीय गाइड लाइन का पालन कर आठवें दिन की पूजा
जनवाणी ब्यूरो |
नजीबाबाद: श्री दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित दशलक्षण पर्व कार्यक्रम में आठवें दिन धर्मचर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अपनी आत्मा से सांसारिक चीजोें को त्यागना ही उत्तम त्याग कहलाता है। यह धर्म अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण करने की साधना का संदेश देता है।
रविवार को श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्म चर्चा में जिनेश्वर दास जैन, अजय आदि वक्ताओं ने अपने संबोधन मे कहा कि उत्तम त्याग धर्म में केवल दान देने का मतलब ही त्याग नहीं होता।
शास्त्रों के अनुसार दान देना पुण्य का कार्य है, जबकि त्याग करना धर्म है। जब आत्मा से हम सांसारिक चीजो का त्याग करने की ओर बढ़ जाते है तब यह उत्तम त्याग कहलाता है।

दीपक जैन ने जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का महत्व बताते हुए कहा जैन धर्म के दशलक्षण पर्व में जीव को अपनी आत्मा से मन वचन काय से शुद्ध होना चाहिए।
मन में वैर भाव की भावना से दूर रहना चाहिए। इससे पूर्व प्रात: सामूहिक पूजन का कार्यक्रम हुआ। सामूहिक पूजन में जिनेश्वर प्रसाद जैन, राजीव जैन, जितेन्द्र जैन, दीपक जैन, अजय जैन, पुनीत जैन, नमन जैन,अनुभव जैन, आदि जैन,नवकार जैन, लोकेश जैन ने भागीदारी की।
अजय जैन ने माडला का विशेष पूजन किया। इसके अलावा ज्ञान चंद जैन, समला जैन, सुनीता जैन, संध्या जैन, सुषमा जैन, अलका जैन, रैना जैन, मंजू जैन, सुशीला जैन, रश्मि जैन, वंदना जैन, आदि ने कार्यक्रम में भाग लिया।

