- खुलेआम प्रयोग हो रही घटिया निर्माण सामग्री
- एक माह में ही धराशायी हो जाती है लाखों की सड़क
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: पंचायती राज की सबसे ऊंची संस्था जिला पंचायत ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों की नीतियों के साथ काम कर ग्रामीण विकास का जमीन का खाका तैयार करती है, लेकिन मेरठ जिला पंचायत न तो ठीक से ग्रामीण विकास का खाका तैयार कर पा रही है और न ही समय पर विकास कार्यों को पूरा कर रही है।

जहां जिला पंचायत अधिकारी वर्तमान में 2019-20 के विकास कार्य करवा रहे हैं। वहीं, तमाम कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। सालों चलने वाली ग्रामीण अंचल की सड़कें महज चंद दिनों में धराशायी हो जाती है और अधिकारी घटिया निर्माण सामग्री की जगह ठंड को दोषी बताकर अपने कार्य की इतिश्री कर रहे हैं। जबकि ग्रामीण सड़कों में घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे।
प्रदेश सरकार भले ही ग्रामीण अंचल के आवागमन के लिए सड़कों का जल फैलाकर ग्रामीण विकास के दावे कर रही हो, लेकिन ये सभी दावे गांवों में आकर धराशायी हो जाते हैं। हाल ही में हस्तिनापुर ब्लॉक में जिला पंचायत द्वारा करोड़ों रुपये के विकास कार्य किये गये, लेकिन तमाम विकास कार्यों की धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।
हस्तिनापुर के ग्रामीण अंचल में जिला पंचायत ने लगभग दो करोड़ रुपये खर्च कर ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा देने के लिए चुनाव से पूर्व आनन-फानन में खादर क्षेत्र में दर्जनों सड़कों का जाल फैला, लेकिन तमाम सड़कें एक माह में ही धराशायी हो गई।
अधिकांश सड़कों के हालत इतने खराब है कि महज एक माह में ही सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई। साथ ही सरकारी पैसों का दुरुयोग भी जिला पंचायत अधिकारियों की शह पर ठेकेदार ने किया और सड़कों के घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया। वहीं, इस संबंध में जब जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी से सम्पर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन रिसीव ही नहीं किया।
उधर, अवर अभियंता आशीष कुमार का कहना है कि खादर में करोड़ों रुपये की लागत से हुए सड़क निर्माण कार्य में जिला पंचायत के अधिकारी घटिया निर्माण सामग्री को नहीं बल्कि ठंड को दोषी मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सड़कों का निर्माण कार्य आनन-फानन में किया गया है। जिस समय निर्माण कार्य चल रहा था, उस समय ठंड अधिक थी। जिससे सड़कें टूट गई। ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। जल्द ही सड़कों को ठीक कराया जायेगा।
बोर्ड पर लागत लिखा भी भूला जिला पंचायत

जिला पंचायत अधिकारियों की अनदेखी महज सड़क निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री तक ही सीमित नहीं रही। सरकार के आदेशानुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उद्घाटन के समय लगाये जाने वाले बोर्ड पर कार्य की लंबाई और कार्य की लागत को दर्शाया जाता है, लेकिन कई जगह साइन बोर्ड पर कार्य की लंबाई तो बताई गई, लेकिन लागत का कहीं अता-पता नहीं है।
एक माह में कैसे धराशायी हो गई सड़कें?
जिला पंचायत द्वारा प्रतिवर्ष ग्रामीण अंचल में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कराया जाते हैं। वित वर्ष 2019-20 व 20-21 में हस्तिनापुर में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कराये गये, लेकिन किसी भी कार्य में गुणवत्ता की ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते निर्माण सालों चलने वाले करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य एक माह में ही धराशायी हो गये।
शिकायत पर विभाग ने नहीं दिया ध्यान
खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की माने तो निर्माण कार्य के समय घटिया सामग्री का प्रयोग लगातार होता रहा है। जिसकी शिकायत उन्होंने फोन पर आलाधिकारियों से की, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके चलते ठेकेदार के हौसले और बुलंद हो गये।

