- निगम स्थित कंट्रोल रूम को देखा, नौ जगहों पर लगे 31 कैमरे
- ट्रिपल सवारी, नंबर प्लेट पर होगा ई-चालान
- हाइवे पुलिस का होगा गठन, 10 हजार पुलिस कर्मियों की होगी भर्ती
- दूसरे जनपदों की गाड़ियों की चेकिंग बर्दाश्त नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पहले से बदहाल थी, रही सही कसर रैपिड रेल को लेकर चल रहे प्रोजेक्ट ने पूरी कर दी है। जापान की सहायता से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और आधुनिक बनाने के लिये नगर निगम में बनाये गए कंट्रोल रूम को देखने अपर पुलिस महानिदेशक ट्रैफिक ज्योति नारायण आए और अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये। एडीजी को भीषण रास्ता जाम और अनियंत्रित ट्रैफिक देखने को मिला।

एडीजी शाम के वक्त नगर निगम गए और वहां की व्यवस्था से खुश दिखाई दिये। उन्होंने बताया कि शहर में नौ स्थानों पर 31 कैमरे लगाए गए है। ये कैमरे रेड लाइट क्रास, ट्रिपल सवारी और हेलमेट आदि पर ई-चालान करेंगे। यह व्यवस्था एक महीने में शुरु हो जाएगी। नगर निगम इसका नोडल विभाग बनाया गया है।
एडीजी सर्किट हाउस से जब नगर निगम के लिये निकले तो उनको ट्रैफिक की दुर्दशा साफ दिखाई दी। जगह जगह टूटी सड़कों पर बेतरतीब चल रहे वाहन और उसके कारण लग रहा जाम देखकर उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिये कि बड़े प्रोजेक्टों के कारण जो ट्रैफिक डिस्टर्ब चल रहा है उसे पटरी पर लाया जाए। दरअसल, आज दिल्ली रोड, भूमिया का पुल, रिठानी और शताब्दीनगर मोड़ पर भीषण जाम लगा। इसी तरह जली कोठी चौराहे पर दिन भर हायतौबा मची रही।
एडीजी ट्रैफिक ने शहर में देखे सीसीटीवी कैमरे
प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक ट्रैफिक ज्योति नारायण का कहना है कि हाइवे पुलिस का गठन किया जाएगा और विभाग में पुलिसकर्मियों की कमी को देखते हुए 10 हजार ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की भर्ती का प्रस्ताव डीजी स्तर पर स्वीकृत हो गया है और उसे शासन में भेजा गया है। एडीजी ने कहा कि दूसरे जनपदों की गाड़ियों को अगर चेकिंग के नाम पर परेशान किया गया तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एडीजी ट्रैफिक ज्योति नारायण ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि पूरे प्रदेश में 6700 के करीब ट्रैफिक पुलिसकर्मी है और जो बेहद कम है। कम से कम 10 हजार ट्रैफिक पुलिसकर्मी नियुक्त किये जाने हैं। इसके लिये प्रस्ताव बना कर डीजी को दिया गया जिसे स्वीकार कर लिया गया है। अब इसे शासन स्तर पर भेजा जाएगा। एडीजी ने कहा कि हाइवे पुलिस का गठन किया जा रहा है ताकि हाइवे पर यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
एक सवाल के जवाव में एडीजी ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि दूसरे जनपदों की गाड़ियों को ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के नाम पर परेशान करती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक सिस्टम को आधुनिक बनाया जा रहा है। पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाये जा रहे हैं। इसके अलावा स्पीड को चेक करने वाले कैमरे भी लगेंगे।
आनलाइन चालान भरें
एडीजी ने बताया कि अब ईचालान होने पर पुलिस लाइन के चक्कर नहीं काटने होंगे। अब मोबाइल पर मैसेज आते ही गूगल पे, फोन पे आदि से भुगतान किया जा सकेगा। इससे भ्रष्टाचार को रोकने में काफी मदद मिलेगी।
कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण
गुरुवार को एडीजी ने पहले कंट्रोल रूम में लगे सभी कैमरों की समीक्षा की। उसके बाद सभी पुलिसकर्मियों को बाडी वार्न कैमरा लगाने की सलाह दी गई है। ताकि ड्यूटी के समय पूरा समय रिकार्ड हो सकें। उसके बाद यातायात के उपकरणों की जांच की गई।
खराब पड़े उपकरणों को सही कराने और नये उपकरणों को प्रपोजल देने के लिए कहा गया है। उसके बाद एडीजी ने जनपद में हादसों की समीक्षा की है। रोड एक्सीडेंट में मारे जाने वाले लोगों को बचाने का प्रयास करने के बारे में बताया गया। सभी हादसे वाले प्वाइंट को दुरुस्त करने की बात कही है।
उसके बाद एडीजी ने पुलिस लाइन में सभी शीर्ष अफसरों से मीटिंग ली और शहर की बिगड़ी हुई ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिये टिप्स दिये। इससे पहले आईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी प्रभाकर चौधरी और एसपी ट्रैफिक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने एडीजी को रेंज और जनपद की ट्रैफिक की जानकारी दी।
हादसे में मर रहे 22 हजार, हत्या हो रही 4500 की
अपर पुलिस महानिदेशक ट्रैफिक ज्योति नारायण ने बताया कि प्रदेश में हादसे से मरने वालों की संख्या करीब 22 हजार है। जबकि रंजिशन हत्याओं में साढ़े चार हजार लोगों की जाने जा रही है। भारत सरकार ने संयुक्त राष्टÑ संघ में वादा किया है कि 2030 तक हादसों से मरने वालों की संख्या आधी कर दी जाएगी। इसके लिये ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है।
एडीजी ट्रैफिक ने बताया कि सड़कें हादसों के कारण लाल हो रही है और इनमें मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिवर्ष 22 हजार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा देते हैं। जबकि हत्या आदि से साढ़े चार हजार लोगों की जान जा रही है। उन्होंने बताया कि 2030 तक इस संख्या को आधी करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिये विश्व बैंक की मदद से हाईवे पुलिस का गठन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाइवे पर अवैध कट भी इस तरह की दुर्घटनाओं के लिये जिम्मेदार हैं।
रैपिड के कार्य से लगा जाम
एडीजी ने बताया कि इस वक्त बड़े प्रोजेक्ट शहर में चल रहे हैं और इस कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ी हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि ट्रैफिक प्लान ऐसा बनाया जाए जिससे सड़कों पर जाम न लगे और प्रोजेक्ट भी चलता रहे।

