- क्षमावणी पर्व पर एक दूसरे से की क्षमायाचना, अंहिसा धर्म, जीओ और जीने दो का संदेश दिया
जनवाणी ब्यूरो |
नजीबाबाद: श्री दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में क्षमावणी पर्व पर प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान जी की प्रतिमा को श्री दिगम्वर जैन सरजायती मंदिर से श्री दिगम्बर जैन पंचायती में विराजमान कर अभिषेक व पूजन कर उनको मूल वेदी पर विराजमान किया। इस मौके पर क्षमावणी पर्व पर सभी श्रद्धालुओं ने एक दूसरे से सोशल डिस्टैंस रखते हुए दूर से ही अभिवादन करते हुए क्षमा याचना की तथा इसी के साथ दशलक्षण पर्व का समापन किया गया।
गुरूवार को दोपहर 11 बजे श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में क्षमावणी पर्व पर श्री आदिनाथ तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा को अजय जैन, नमन जैन, आदि जैन,अनुभव जैन,जितेन्द्र जैन,नवकार जैन चमर ढुलकाते हुए दिगम्बर जैन सरजायती मंदिर से होते हुए पंचायती मंदिर जी में लाए। वहां अभिषेक करने के पश्चात श्री जी की प्रतिमा मूल वेदी मेंं स्थापित की गई। सभी ने श्री जी की आरती की।
जैन मिलन सचिव अजय ने धर्म चर्चा करते हुए कहा कि क्रोध पर नियंत्रण करना क्षमा है। लेकिन जब यह आत्मा का धर्म बन जाता है तो उत्तम क्षमा कहलाता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में जीओ और जीने दो, अहिंसा परमोधर्म का संदेश दिया गया है। क्षमा वीरों का आभूषण है। कायर कभी किसी को क्षमा नहीं करता। उन्होंने कहा कि क्रोध का कारण होते हुए भी क्रोध न करना उत्तम क्षमा है।
इसी भावना को लेकर दशलक्षण व क्षमावणी पर्व के मौके पर प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक व पूजन के बाद दशलक्षण पर्व का समापन करते हुए संकल्प ले कि केवल दस दिनों कर ही नहीं बल्कि हमेशा अपने जीवन में जैन धर्म के सिद्धान्तों का पालन करेंगे। कार्यक्रम में जैन समाज के सदस्य पुनीत जैन,संदीप जैन,मनीष जैन,यश जैन, छवि जैन,रूकमणि जैन, समीक्षा जैन, वंदना जैन, नीरज जैन, दीपक जैन, श्रेंयांस जैन, अर्थ जैन, जिनेशवर दास जैन, पारस नाथ जैन, प्रेम चंद जैन, राहुल जैन, विपिन जैन, संतोष जैन, आशीष जैन, अशोक जैन, अक्षत जैन, संजय जैन, अरनव जैन सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।

