Monday, August 2, 2021
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कोरोना से ट्रांसपोर्ट और ट्रैवलर्स को करोड़ों का चूना

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  • कहर बनकर टूट रहा कोरोना, ट्रक आॅपरेटरों ने बंद किये सभी कार्य

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: कोरोना महामारी से लोगों की जाने तो जा ही रही हैं, लेकिन अब इस महामारी के कारण लोग आर्थिक रूप से भी टूट चुके हैं। उद्योग बंद हो चुके हैं न तो तैयार माल ही शहर से बाहर जा पा रहा है और नही कच्चा माल कहीं से आ रहा है। इसका प्रभाव ट्रांसपोर्टरों व ट्रैवल एजेंसियों पर भी पड़ा है। इन्हें पिछले एक माह में ही करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

डीजल के दामों ने पहले ही कमर तोड़ रखी थी अब कोरोना की मार के कारण धंधे चौपट हो चुके हैं। ट्रकों का संचालन बंद हैं ट्रैवलर्स का भी चार धाम यात्रा का सीजन पिट चुका है।

डीजल के दाम बढ़ने के बाद से पहले ही ट्रांसपोर्टर परेशान थे अब कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन से उनकी कमर ही टूट चुकी है। लॉकडाउन के कारण सारा ट्रांसपोर्टेशन बंद हो चुका है। शहर से न तो कोई माल बाहर जा पा रहा है और न ही कच्चा माल या कुछ और शहर में आ रहा है।

खाद्य पदार्थों, सब्जियों व दवाइयों के अलावा सभी सामान बंद है। कंपनियां बंद हो चुकी हैं। जिसका सबसे अधिक प्रभाव ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। ट्रकों का संचालन पूरी तरह से बंद हो चुका है। एक दिन में उत्तर प्रदेश ट्रक आॅपरेटर एसोसिएशन को पांच से 10 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मेरठ में करीब 500 की संख्या में ट्रांसपोर्टर हैं जिनका धंधा पूरी तरह से बंद हो चुका है।

छूट, दूसरी ओर लूट रही सरकार

यूपी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ जोन के अध्यक्ष अमरजीत उर्फ पिंकी चिन्योटी का कहना है कि कोरोना के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार फेल हो चुका है। यहां पिछले साल में लगे लॉकडाउन के बाद से अभी कुद हालात सुधरने शुरू हुए थे, लेकिन फिर से लगाये गये लॉकडाउन ने ट्रांसपोर्टरों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सरकार इंश्योरेंस ट्रक आॅपरेटरों से एडवांस ले रही है। फिटनेस के नाम पर भी वसूली की जाती है और सुविधा के नाम पर सब जीरो है। यहां से इस समय ट्रकों का संचालन बंद हो चुका है, लेकिन सरकार कुछ नहीं सोच रही। पिछले साल लगे लॉकडाउन में सरकार ने एक महीने का टैक्स माफ किया था और दूसरी ओर डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं इससे वो छूट भी किसी काम की नहीं रह जाती है।

फैक्ट्रियां बंद कैसे निकले काम

ट्रक एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि मेरठ से कैंची, स्पोर्ट्स गुड्स, ट्रैक्टर का सामान, कपड़ा आदि माल काफी संख्या में मेरठ से अन्य राज्यों तक जाताा है। ट्रकों में भरकर ही यह माल बाहर जाता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। किसी प्रकार भी माल कहीं नहीं जा रह है। ट्रकों का संचालन पूरी तरह से बंद हो चुका है। सब्जी व अन्य खाद्य पदार्थों के लिये छोटे वाहन ही काफी हैं। यहां प्रतिदिन करीब 5 से 10 करोड़ का नुकसान पूरी एसोसिएशन को हो रहा है। मजदूर जा चुके हैं, कोई काम करने वाला भी नहीं बचा है। कोरोना के कारण हमने बुकिंग का कार्य भी बंद कर दिया है। ऐसे समय में कमाई शून्य हो चुकी है और खर्चे वहीं हैं। टैक्स, फिटनेस भी कार्य कराये जा रहे हैं।

ट्रैवल्स एजेंसियों का पिटा चार धाम का सीजन

जिंद ट्रैवल्स के आयुष जिंदल ने बताया कि पिछला एक साल उनके लिये बड़ा मुश्किल भरा रहा है। सभी ट्रैवल्स एजेंसियों के लिये इससे बुरा दौर कभी नहीं आया। अभी ट्रैवल्स एजेंसी वाले बीते साल का नुकसान भर नहीं पाये थे कि फिर से बार यह लॉकडाउन उनके लिये संकटों के बादल खड़े कर देगा। पिछले साल सारा सीजन पिट गया था। अब एक बार फिर से सीजन की शुरूआत में ही लॉकडाउन लग गया है जिससे निकल पाना मुश्किल होगा। चार धाम यात्रा आज 14 मई से शुरू हो जाती है, लेकिन कोरोना के कारण यह सीजन भी पिट जायेगा। इस बार भी सीजन चल पाना मुश्किल नजर आ रहा है। शादियों का सीजन पहले ही पिट चुका है। पिछले एक माह में ही सैकड़ों बुकिंग कैंसिल हो गर्इं थी। गाड़ियों की किश्त लगातार जा रही हैं और सीजन पर सीजन पिटते जा रहे हैं ऐसे में एजेंसी चला पाना मुश्किल हो गया है। बैंकों से लगातार किश्त जमा करने के लिये फोन आ रहे हैं कोई सुनने वाला नहीं है।

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