Saturday, March 14, 2026
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किडनी स्टोन का समय से करें इलाज

बदलती लाइफस्टाइल की वजह से किडनी से संबंधित कई समस्याएं देखने को मिल रही हैं। मगर इन समस्याओं में से सबसे प्रमुख है, किडनी स्टोन की समस्या। जी हां, गुर्दे की पथरी। किडनी स्टोन एक प्रकार की साइलेंट किलर डिसिज है। इसके कारण लोगों को कभी कभार भयंकर दर्द का सामना करना पड़ता है। अधिकांशत यह अपना प्रकोप काफी बड़ी हो जाने के बाद दिखाती है।

डॉ. दिव्यांशु सेंगर

शरीर के डायजेस्टिव सिस्टम के खराब होने की वजह से अधिकांशत गुर्दे में पथरी का निर्माण होता है। चिकित्सक बताते हैं कि खाना खाने के बाद शरीर में कैल्शियम फॉस्फेट रह जाता है, बाकी सारे तत्व शरीर प्रयोग कर लेता है। मगर डायजेस्टिव सिस्टम के खराब होने की वजह से कई बार कैल्शियम फॉस्फेट का पाचन नहीं हो पाता। कैल्शियम फॉस्फेट के सुक्ष्म कण जो मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं, मगर जो कण नहीं निकलते वे गुर्दे में ही जमा होने लगते हैं और बाद में पथरी का रूप धारण कर लेते हैं।

प्रमुख लक्षण

गुर्दे में पथरी के लक्षण कई बार प्रारंभिक स्तर पर ही पता लग जाते हैं, मगर कुछ अपवादों में यह काफी देरी में पता चलते हैं। प्रारंभिक स्तर पर पीठ के निचले हिस्सों में या पेट के निचले भाग में अचानक तेज दर्द होने लगे ही यह पथरी के ही संकेत हो सकते हैं। इस दर्द की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह दर्द आमतौर पर 5 मिन्ट सेआधे घंटे का होता है और यह वहीं बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि आप एक बार चिकित्सक से सलाह मशवरा कर लें और जांच करा लें गुर्दे की पथरी के लक्षण में बुखार, दर्द होना रात के समय अधिक पेशाब आना पसीना आना आदि भी हो सकते हैं।

क्या है किडनी स्टोन

किडनी स्टोन की बीमारी अधिकतर गलत खानपान की वजह से होती है। किडनी स्टोन की साइज की भाषा में नेफरोतिथियांसिस भी कहा जाता है। इस बीमारी में गुर्दे के अंदर महीन क्रिस्टल एकत्रित हो जाते हैं, जो समय के साथ-साथ बड़े होते हैं। एक समय में गुर्दे में एक से अधिक पथरी भी हो सकती हैं। यदि पथरी के बड़े होने से पहले ही इसका पता चल जाता है तो कुछ उपाय से यह मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाती है। यदि पथरी 3 से 4 एमएम की हो तो आॅपरेशन के माध्यम से गुर्दे से बाहर निकाली जाती है।

पथरी के प्रकार

कैल्शियम पथरी : यह गुर्दे की पथरी का सबसे प्रचलित प्रकार है। यह सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। कैल्शियम पथरी में कैलिवन के अलावा आॅक्सलेट, फॉस्फेटआदि कण मिले होते हैं। यह पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है।

किस्टाइन पथरी : यह पथरी फिस्टिनुरिया से पीड़ित व्यक्तियों में देखने को मिलती है। आमतौर पर यह जेनेटिक डिसॉर्डर पर निर्भर होती है।

स्टुवाइटपथरी : यह मूत्रमार्ग में संक्रमण की वजह से निर्मित होती है और यह महिलाओं में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

उपयुक्त इलाज

एंडोस्कोपी ट्रीटमेंट में एंडोस्कोपी यानी दूरबीन द्वारा पेशाब के रास्ते से एक नली गुर्दे तक पहुंचाई जाती है और इसके माध्यम से पथरी को बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया काफी पुरानी है और छोटी पथरी के लिए इस तकनीक को काफी उपयोगी माना जाता है। बड़ी पथरी में भी इस तकनीक से पथरी को निकाला जाता है, मगर मरीज को रिकवरी में समय लग जाता है। बड़ी पथरी को पहले तोड़ा जाता है और फिर एंडोस्कोपी की मदद से बाहर निकाला जाता है।

लिथाट्रिप्सी ट्रीटमेंट

वैसे तो मुर्दे की पथरी के लिए सर्जरी का इलाज सर्वप्रचलित है। मगर चिकित्सा जगत ने आज ऐसी तकनीक भी ईजाद कर ली है, जिससे बिना चीर-फाड़ किए पथरी को शरीर से बाहर निकाला जा सके। ऐसी ही तकनीक है लिथोट्रिप्सी की। लिथोट्रिप्सी तकनीक में बिना सर्जिकल प्रक्रिया के गुर्दे में मौजूद पथरी को तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में शरीर से बाहर निकाली जाती है। इस आपरेशन में मात्र 30 से 40 मिनट का समय लगता है। यह तकनीक काफी सामान्य है और आपरेशन के बाद भी मरीज को कोई दवा याअन्ना वस्तु नहीं खानी पड़ती। इसके अलावा इस में मरीज को कोई पीड़ा भी नहीं होती है।

क्या रखें सावधानियां

’ पानी भरपूर मात्रा में पिएं, ताकि पथरी के छोटे कण आसानी से बाहर निकल सकें।
खाने में प्रोटीन नाइट्रोजन तथा सोडियम एक खाना नाममात्र की खाएं। इसके पथरी बढ़ने का खतरा रहता है।

’ मौसमी को जूस से फायदा हो सकता है। यह पथरी को बड़ा नहीं होने देती।

’ नींबू पानी और संतरे का रस साइट्रेट प्रदान करते हैं, जो पत्थरों को बनने से रोक सकता है।

’ नारियल एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है जो पेशाब को बढ़ाता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

’ कुलथी की दाल एक पारंपरिक उपाय है जो छोटी पथरी को घोलने में मदद कर सकती है।

क्या नहीं खाएं

’ उच्च आॅक्सालेट वाले खाद्य पदार्थ लेने से बचें। चुकंदर, पालक, भिंडी, रूबर्ब, शकरकंद, स्विस चार्ड, चॉकलेट, काली मिर्च, नट्स, काली चाय और सोया उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थों से बचें।

’ उच्च नमक का सेवन मूत्र में कैल्शियम के स्तर को बढ़ा सकता है, जो पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है।

’ रेड मीट, और आॅर्गन मीट से बचें, क्योंकि ये यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं।
प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम या उससे अधिक विटामिन सी सप्लीमेंट्स लेने से गुर्दे की पथरी का खतरा बढ़ सकता है।

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