
कभी कभी टहनियों में
सरसराहट होती है
जब हवाएं साथ होती हैं
लगता है संवाद कर रही
हों जैसे वे आपस मैं
टहनियां कुछ छोटी, कुछ बड़ी
मिलती हैं प्यार से आपस में
कभी देखा नहीं लडते झगड़ते
इन्हें आपस में
टहनियों पर कलरव करते हैं
सुंदर रंग-बिरंगे पंछी
टहनियों पर झूलते हैं
झूले से कम नहीं इनके
लिए ये टहनियां
तेज हवाओं में टहनियों की जान
हथेली पर आ जाती है
जब टूटता है बिखरता है
इनका जीवन अस्तित्व
सोचो टहनियां न हो तो
क्या पेड़ खुश रह पाते हैं
बस ऐसे ही घर में
रिश्ते नातो की असंख्य
कई टहनियां हैं
टहनियां टूटी तो पेड़ रूपी
घर भी टूटता ही है
अच्छा हो हम टहनियों को
टूटने से बचा लें।


