Saturday, March 14, 2026
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भाजपा का दामन थाम सकते हैं दो दलित नेता

  • सपा मुखिया से चौधरी रुद्रसेन खफा, इंद्रसेन ने दिया प्रभारी पद से इस्तीफा
  • मजाहिर हसन बसपा में गए, इमरान को कमजोर करने का उठाया बीड़ा

अवनीन्द्र कमल |

सहारनपुर: मतदान की तिथि 19 अप्रैल को है लेकिन, इस बीच सियासी दलों मेंं जमकर उठापटक हो रही है। एक रोज पहले सियासत के रसूखदार घराने के वारिस चौधरी रुद्रसेन और उनके भाई इंद्रसेन ने सपा मुखिया से अपनी अनबन का इजहार कर दिया। इंद्रसेन ने तो गंगोह विस प्रभारी के पद से भी इस्तीफा दे दिया। और तो और कभी सपा के जिलाध्यक्ष रहे और पसमांदा समाज से आने वाले मजाहिर हसन मुखिया ने बसपा में जाने का ऐलान कर दिया। बसपा के दो बड़े नेता जिनमें एक नेता दो बार माननीय भी रह चुके हैं, वह भाजपा ज्वाइन करने वाले हैं। कुछ और खींचतान हो रही है। ऐसे में चुनाव त्रिकोणीय होने के प्रबल आसार हैं।

बता दें कि सहारनपुर सीट पर कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक इमरान मसूद ने परचा दाखिल किया है। भाजपा से पूर्व सांसद राघव लखन पाल शर्मा तीसरी बार अखाड़े में हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी ने माजिद अली को अपना प्रत्याशी बनाया है। शबनम कुरैशी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। दो निर्दलीय परचा दाखिल करने वालों ने राघव लखन पाल को अपना समर्थन दे दिया है। सहारनपुर के मतदाताओं की फितरत ये रही है कि वह हर बार नया सांसद चुनते आए हैं। सन 2004 में सपा से काजी रशीद मसूद ने जीत दर्ज की थी तो सन 2009 में उन्हीं की कक्षा के सियासी विद्यार्थी रहे जगदीश राणा बसपा के सिंबल पर सांसद चुने गए थे।

सन् 2014 में भाजपा के राघव लखन पाल ने कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद को पटखनी दी थी। फिर सन 2019 के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी हाजी फजर्लुहमान अलीग विजयी हुए। अब जबकि 24 का चुनाव सिर पर है और पहले चरण में या्नि कि 19 अप्रैल को सहारनपुर में मतदान होना है तो इस बीच सियासी खदबदाहट बढ़ गई है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मजाहिर हसन मुखिया बसपा में शामिल हो गए हैं। मुखिया मुस्लिमों की तेली बिरादरी से आते हैं। वहीं, कांग्रेस की सहयोगी सपा के यहां से दो विधायक हैं लेकिन, दोनों दिखाई नहीं दे रहे। यहां तक कि इमरान मसूद के परचा दाखिले में न तो सपा विधायक उमर अली दिखे और न ही आशु मलिक। इसका मकसद समझना कठिन नहीं है।

राजनीति के लालबुझक्कड़ों का कहना है कि इमरान को कमजोर करने के लिए भीतरघात शुरू हो गई है। वहीं बसपा प्रत्याशी माजिद अली मुस्लिमों की पिछड़ी बिरादरी पर डोरा डाल रहे हैं। अगर माजिद अच्छी लड़ाई लड़ जाते हैं तो वह इमरान मसूद के लिए राह का रोड़ा साबित होंगे। रही बात भाजपा की तो अब तक इस दल में कोई अंतर्कलह नजर नहीं आ रही। राघव अपने समर्थकों के साथ चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ यहां आकर प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन को संबोधित कर गए हैं।

उधर, कांग्रेस-सपा के दिग्गजों का चुनाव प्रचार अभी शुरू ही नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि जल्द भाजपा में दो दलित नेता शामिल होने जा रहे हैं। इनमें एक बड़े दिग्गज जो माननीय भी रहे हैं, वह स्वयं और उन्हीं के सखा जो एकबार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, वह भी भाजपा में शामिल होने वाले हैं। इस तरह देखें तो सियासी तस्वीर अभी बहुत धुंधली है।

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