जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय अंडर-19 टीम के तूफानी गेंदबाज रवि कुमार ने अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने नॉकआउट मुकाबलों में कातिलाना गेंदबाजी कर टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया और टीम को पांचवीं खिताबी जीत दिलाने के लिए इंग्लैंड के चार अहम विकेट भी झटके। रवि ने टूर्नामेंट में छह मुकाबले में 21.6 के स्ट्राइक रेट से 10 विकेट झटके। इस दौरान उनका इकोनॉमी रेट 3.66 का रहा।
फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड के कप्तान टॉम प्रिस्ट को शून्य पर क्लीन बोल्ड किया और ओपनर जैकब बेथेल को एलबीडब्ल्यू किया। इसके अलावा जेम्स रियू को कौशल तांबे के हाथों और थॉमस एस्पिनवाल को विकेटकीपर दिनेश बाना के हाथों कैच कराया। रवि का क्रिकेटर बनने का सफर आसान नहीं रहा है।

रवि कुमार का साथ अगर भाग्य ने नहीं दिया होता तो वे अंडर-19 की टीम में भी नहीं होते। अंडर-16 टीम के लिए जब उन्हें चुना गया था तो कैंप से ही बाहर निकाल दिया गया। रवि को बताया गया कि बोन टेस्ट में उनकी उम्र ज्यादा है। इसके बावजूद रवि अपने लक्ष्य से नहीं भटके। किस्मत से उन्हें बंगाल की अंडर-19 टीम में जगह मिल गई।

बंगाल अंडर-19 टीम में चुने जाने के बाद रवि ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने वहां अपनी खतरनाक गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया। इसके बाद रवि का चयन भारतीय अंडर-19 टीम में हो गया। उन्होंने चैलेंजर्स ट्रॉफी और एशिया कप में शानदार बेहतरीन गेंदबाजी की। इसके बाद अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए चुन लिए गए।

अंडर-19 वर्ल्ड कप के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने 30 रन दिए थे। इसके बाद आयरलैंड के खिलाफ 11 रन देकर एक विकेट अपने नाम किया था। अपेक्षाकृत कमजोर युगांडा के खिलाफ छह रन दिए थे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी।

रवि ने ग्रुप दौर के मुकाबलों को भुलाकर नॉकआउट मैचों में जबरदस्त वापसी की। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ 14 रन देकर तीन विकेट अपने नाम किए। इसके बाद सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 37 रन पर दो विकेट झटके।

रवि पढ़ाई से ज्यादा खेल पर ध्यान देते थे, लेकिन मां को यह पसंद नहीं था। उनके पिता ने इसे बारे में एक इंटरव्यू में कहा था कि खेलने को लेकर रवि और उसकी मां में कई बार बहस हो चुकी है। वह अपनी मां से कहता था- आज आप मुझे खेलने से रोक रही हैं, लेकिन एक दिन मैं टीवी पर दिखूंगा। रवि ने मां से कहे इस बात को सही साबित किया। अब वे टीवी पर लगातार दिख रहे हैं और क्रिकेट प्रेमी उनके प्रशंसक भी बन रहे हैं।

रवि कुमार बाद में कोलकाता चले गए। वहां वे खेल को सिर्फ मजे के लिए खेलते थे, लेकिन कोच अमित भारद्वाज के संपर्क में आने के बाद इसे गंभीरता से लेने लगे। फिर उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर विशेष ध्यान दिया। उनके पिता राजिंदर सिंह सीआरपीएफ में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हैं। देश के एक सिपाही राजिंदर सिंह अब अपने बेटे की उपलब्धियों से काफी खुश हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि पहले मुझे कम लोग जानते थे, लेकिन अब कई लोग जान गए हैं। यहां तक कि अफसरों ने मुझे बुलाकर बधाई दी है।

