नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। आज गुरूवार को आरबीआई यानि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने रेपो रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की। मतलब साफ है कि अब ब्याज दर 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। हालांकि इससे पहले रिजर्व बैंक ने वित्तीय साल 2022—2023 में अपने रेपो रेट में एक—दो बार नहीं पूरे छह बार बढ़ोत्तरी लगातार किया जिससे ब्याज दरों में 2.5 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई थी। नीतिगत दर पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति का फैसला संतुलित और समझदारी भरा है। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय…
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बताया कि रेपो दर में बदलाव न करने के लिए आम सहमति से लिया गया फैसला नीति का आश्चर्यजनक पहलू है। यह फरवरी की नीति के विपरीत इसके नजरिये में आशावाद की उम्मीद जगाता है। मदन सबनवीस ने कहा कि कुल मिलाकर एक बेहद संतुलित और समझदारी भरा फैसला लिया गया है, जो स्थिरता सुनिश्चित करता है।
हाउसिंग डॉटकॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि आरबीआई का फैसला आमतौर पर रियल एस्टेट उद्योग और विशेष रूप से घर खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि अगर आरबीआई दर में एक और बढ़ोतरी करता तो ब्याज दरें रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच जातीं, जो आवास क्षेत्र में सकारात्मक भावना को प्रभावित कर सकता था।
कमोडिटी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के अध्यक्ष नरिंदर वाधवा ने उम्मीद जताई कि यह ठहराव लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई के इस फैसले से बाजार खुश है।
IIFL के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, ‘RBI ने मार्केट में स्थिरता लाने के लिए ये कदम उठाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।’
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, ‘महंगाई के साथ-साथ रेपो रेट और लेंडिंग रेट में कोई और बढ़ोतरी संभावित रूप से कंज्यूमर्स की खर्च करने की क्षमता को कम कर सकती थी। ऐसा होता तो इसका असर भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ता।’ इकोनॉमिक ग्रोथ की सुस्ती शेयर बाजार पर भी असर डाल सकती थी।
बता दें कि मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। पिछले वित्त वर्ष की पहली मीटिंग अप्रैल में हुई थी। तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था, लेकिन 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया। 22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में ये बदलाव हुआ था।
इसके बाद 6 से 8 जून को हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया। इससे रेपो रेट बढ़कर 4.90% हो गई। फिर अगस्त में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई। सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गईं। फिर दिसंबर में 6.25% पर पहुंच गईं। इसके बाद फरवरी 2023 में ब्याज दरें 6.50% कर दी गईं थीं। 6 बार दरें बढ़ाने के बाद इसमें बढ़ोतरी रोकी गई है।
…तो इसलिए आरबीआई ने दरें नहीं बढ़ाईं







