- अब कंपनी स्वयं सेवा समाप्त एवं स्वच्छता मित्र को रखने के लिए खुदकर रही नाम की संस्तुति
- नगरायुक्त एवं प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की संस्तुति पर कंपनी रखती थी स्वच्छता मित्र
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लगातार तीन महीने से अनुपस्थित चल रहा एक स्वच्छता मित्र, केंद्रीय राज्यमंत्री से अपना वार्ड बदलने की सिफारिश लेकर पहुंचा। जब उसे नियम व कानून निगम के अधिकारियों ने बताए तो उसने कहा कि मंत्री जी से अच्छी खासी जान पहचान है, उससे अनुपस्थित दिनों का वेतन भी चाहिए और मनपसंद वार्ड भी। फिलहाल आउट सोर्सिंग सफाई कर्मचारी के लिए भी अब महापौर या पार्षद नहीं बल्कि केंद्रीय राज्यमंत्री तक की सिफारिश चलने लगी है।
नगर निगम में पार्षद एवं सफाई सुपरवाइजर के साथ सफाई कर्मचारी भी अब अपने राजनीतिक रसूख के चलते एक दूसरे की सुनने को तैयार नहीं हैं। जिसमें पार्षद एवं सफाई सुपरवाइजर के साथ सफाई कर्मचारी अब सफाई व्यवस्था को लेकर दो गुटों में नहीं बल्कि तीन गुटों में बंटे हुए हैं। वहीं, चौथा मामला आउट सोर्सिंग स्वच्छता मित्र जिस संस्था से अनुबंध पर निगम में स्वच्छता मित्र का कार्य कर रहे हैं, अब उनके द्वारा भी सफाई व्यवस्था को लेकर अनुपस्थित रहने वाले स्वच्छता मित्र के बदले दूसरा अपनी मर्जी से रखने की संस्तुति कर रिपोर्ट तैयार कर नगरायुक्त के पास भेजनी शुरू कर दी है।
जिसमें अब शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को जो होता रहेगा वह होता रहेगा, लेकिन सभी अपनी राजनीतिक रसूख दिखाने में जुटे हैं। एक स्वच्छता मित्र तो तीन महीने से काम पर नहीं लोटा ओर पूरा वेतन मांगते हुए अपनी मर्जी के वार्ड में तैनाती भी मांग रहा है। जिसके लिए वह केंद्रीय राज्यमंत्री की सिफारिश लेकर पहुंचा। जिसमें रोहटा बाइपास निवासी नरेश पुत्र रामकिशन जोकि वार्ड-83 में आउट सोर्सिंग स्वच्छा मित्र के रूप में कार्यरत था। आरोप है कि उसके वार्ड का सुपरवाइजर उससे तीन हजार रुपये प्रतिमाह की डिमांड कर रहा है,
जिसके चलते वह करीब तीन महीने से काम पर ही नहीं गया। जिसके चलते उसकी तभी से अनुपस्थिति दर्ज होती चली आ रही है। अब वह निगम के अधिकारियों से पूरे वेतन के साथ दूसरे अपनी मनपसंद के वार्ड में नियुक्ति मांग रहा है। जब उसे पहले काम पर लौटने उसके बाद उसका वार्ड बदलने की सलाह स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दी गई तो वह काम पर नहीं लौटा और बाकायदा वह केंद्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार कौशल किशोर का लेटर पैड लेकर गुरुवार को निगम मुख्यालय पहुंचा।
जिसमें केंद्रीय राज्यमंत्री ने उसके घर से पास पड़ने वाले वार्ड-63 में उसकी तैनाती करने को लिखा है। जब उसे स्वास्थ्य विभाग के द्वारा बताया गया कि तीन माह में सेवा समाप्त हो जाती है तो उसने कहा कि वह फिर से मंत्री से लिखवाकर लायेगा, फिर उसे तीन महीने के अनुपस्थित रहने वाले दिनों का भी पेमेंट करना होगा, उसे हटाने का मतलब ही नहीं। सफाई कर्मचारी एवं वार्ड पार्षद व सुपरवाइजरों के बीच मामला शांत होने की जगह लगातार बढ़ता जा रहा है।

