Saturday, January 29, 2022
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बेमौसम बरसात ने बढ़ाई खादर के ग्रामीणों की मुसीबतें

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  • गंगा में अचानक बढ़ा जलस्तर, कई गांवों की हालत नाजुक
  • धराशाई हुआ करोड़ों का तटबंध हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात और बिजनौर बैराज से छोड़े जा रहे पानी के कारण मंगलवार को गंगा नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। जलस्तर बढ़ने से गांव फतेहपुर प्रेम के समक्ष हाल ही में सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों की लगात से बनाया गया तटबंध ध्वस्त हो गया है। जिससे कई गांवों में पानी भरना शुरू हो गया है। हालात गंभीर होते देख प्रशासन ने खादर क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है, लेकिन बाढ़ से बचाब और राहत के इन्तजाम कही नजर नहीं आ रहे।

मंगलवार देर शाम बिजनौर बैराज से छोड़ा गया एक लाख 98 हजार क्यूसेक पानी ने खादर क्षेत्र की स्थिति नाजुक कर दी है। जबकि हरिद्वार से तीन लाख 78 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया चल रहा था। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के चलते गंगा किनारे बसे गांव फतेहपुर प्रेम, भीकुंड, खेड़ीकलां, मनोहरपुर, पटेल नगर, हादीपुर गांवड़ी, मखदूमपुर, बंगाली बस्ती मखदूमपुर आदि के मुख्य मार्गों पर पानी होने के कारण आवागमन लगभग ठप हो गया है।

जलस्तर में भयभीत ग्रामीणों ने पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर पहुचना शुरू कर दिया है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से सुबह मंदिर के समीप गंगा किनारे बना तटबंध टूट गया। गंगा किनारे बने तटबंध के टूटने से चमारोद, छोटी चमारोद, रटौड़ा पटेल नगर, हादीपुर गांवड़ी आदि गांवों के जगंलों में पानी ही पानी नजर आ रहा है।

इसके अलावा कई गांवों का संपर्क एक-दूसरे से टूट गया है। यदि पानी बढ़ता है तो कई अन्य गांवों के तटबंध भी टूट सकते हैं। जिससे खादर क्षेत्र के दर्जनों गांवों की स्थिति विकराल हो सकती है। इसके बाद भी प्रशासन के बाढ़ से बचाव के कोई इंतजाम शुरू नहीं किये गये।

रात में और भी बढ़ सकता है जलस्तर

बिजनौर बैराज और हरिद्वार से गंगा में लगातार बढ़ रहे डिस्चार्ज के कारण मंगलवार देर रात को खादर क्षेत्र के लोगों की मुसीबतें और बढ़ सकती है। बिजनौर बैराज पर तैनात जेई के अनुसार बिजनौर से एक लाख 70 हजार 400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज चला रहा था। जबकि हरिद्वार से तीन लाख 78 हजार 600 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज चला रहा है।

हस्तिनापुर: करोड़ों खर्च, बाढ़ का संकट जस का तस

बाढ़ से बचाने के लिए सरकार और सिंचाई विभागों द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों की योजनाओं पर काम शुरू होता है, लेकिन यह काम बाढ़ आने से पहले पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह से खर्च की गई रकम बर्बाद जाती है, वहीं लोगों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही है।

अब जब नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा तो काम की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। ऐसे में बाढ़ से पहले काम पूरा होने की उम्मीद कम है। इस बार भी लोगों को बाढ़ का संकट झेलना पड़ सकता है। सिचाई विभाग द्वारा गंगा किनारे ग्रामीणों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये का तटबंध बनने से पहले ही धराशाई हो कारण घटिया निमार्ण सामग्री महज हो जो विभागिय अधिकारियों की अनदेखी का कारण होता है खादर क्षेत्र में ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इससे पूर्व भी सिंचाई विभाग की दर्जनों योजनाएं ग्रामीणों को बाढ़ से नहीं बचा सकी।

खर्च 22 करोड़, लेकिन नहीं बची हजारों हेक्टेयर फसल

खादर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गंगा में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ से लोगों के जान माल को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने गंगा किनारे पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की और लगभग 22 करोड़ रुपये का बजट खर्च कर सिंचाई विभाग ने हाल ही में गंगा किनारे फतेहपुर प्रेम से शेरपुर नई बस्ती तक लगभग दो किमी लंबे पक्के तटबंध कर निर्माण कराया, लेकिन सरकार की मंशा विभागीय अधिकारियों के आगे दो महीने पूर्व आई बाढ़ में धराशाई हो गई। तटबंध में विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते घटिया निर्माण समाग्री का प्रयोग हुआ। जिसके चलते तटबंध धराशाई हो गया और बाढ़ में किसानों की हजारों हेक्टेयर फसले डूब गई।

वीरान नजर आये छह करोड़ के बाढ़ चबूतरे

बाढ़ का विकराल रूप होने के बाद भी ग्रामीणों से गांव से पलायन करना तो उचित समझा, लेकिन 2010 में सिंचाई विभाग द्वारा खादर क्षेत्र के दर्जनभर गांवों में लगभग छह करोड़ की लगात से बनाये बाढ़ चबूतरों पर शरण लेना उचित नहीं लगा। लोगों का कहना है कि पूर्व में आई बाढ़ में बाढ़ चबूतरे खुद ही ध्वस्त हो गये थे। ऐसे में भयंकर बाढ़ में ये ग्रामीणों की क्या रक्षा करेंगे? सिंचाई विभाग के अधिकारी सालों से ग्रामीणों को बाढ़ से सुरक्षा देने के नाम पर सिर्फ अपनी जेबें भरने का कार्य करते आ रहे हैं।

नालों को सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च

ग्रामीणों को प्रतिवर्ष बाढ़ से निजात दिलाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी करोड़ों रुपयों का मोटा बजट खर्च करते आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की माने तो यह बजट महज कागजों में ही सिमट कर रह जाता है। इस बार भी बाढ़ से पूर्व खादर क्षेत्र से गंगा नदी को जोड़ने वाले नालों की सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग ने लाखों रुपये का बजट खर्च किया, लेकिन नालों की स्थिति जस की तस है। नालों की सफाई का कार्य महज कागजों में सिमट कर रह गया।

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