Thursday, February 19, 2026
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वेलेंटाइन डे बनाम भारतीय संस्कृति

 

Nazariya 10


Shalini Koshikऐसे हिंदुस्तान में जहां आने वाली पीढ़ी के लिए आदर्शों की स्थापना और प्रेरणा यहां के मीडिया का पुनीत उद्देश्य हुआ करता था। स्वतंत्रता संग्राम के समय मीडिया के माध्यम से ही हमारे क्रांतिकारियों ने देश की जनता में क्रांति का बिगुल फूंका था, आज जिस दिशा में कार्य कर रहा है, वह कहीं से भी हमारी युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक और प्रेरक नहीं कहा जा सकता। 14 फरवरी वेलेंटाइन डे के नाम से विख्यात है। एक तरफ जहां इस दिन को लेकर युवाओं के दिलों की धड़कनें तेज हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर लाठियां और गोलियां भी चल रही हैं और इस काम में बढ़ावा दे रहा है हमारा मीडिया-आज का मीडिया। एक तरफ सत्य का उजाला, एक तरफ समाज की वास्तविकता, राजनीति की कालिख सामने लाने का, विश्वास दिलाने वाला मीडिया आज युवाओं को बेच रहा है, विदेशी संस्कृति जिसे भारतीय अपसंस्कृति भी कह सकते हैं, गलत प्रवृत्तियां भी कह सकते हैं।

भारतीय मीडिया द्वारा बिकाऊ श्रेणी में लाया जा रहा है। रोम के संत वेलेंटाइन के नाम पर मनाया जाने वाला यह सप्ताह भारत में समाचार पत्रों द्वारा जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि बाजार में बिकने के लिए और विश्व में सर्वाधिक पठनीय, रेटिंग आदि उपलब्धियां अर्जित करने के लिए मीडिया के ये अंग भारतीय समाज में आवारागर्दी को बढ़ावा दे रहे हैं। आज की फिल्में प्यार के नाम पर वासना का भूत युवाओं के सिर पर चढ़ा रही हैं। लड़कियां जो पहले भारतीय परिधानों में गौरवान्वित महसूस करती थीं, आज कपडेÞ छोटे करने में खुद को हीरोइन बनाने में जुटी हैं। ये फिल्मी असर ही है कि दिन रात कभी भी लड़के लड़कियों के जोड़े शहरों में अभद्र आचरण करते घूमते हैं।

वासना के आकर्षण में डूबे इन जोड़ों को प्रेमी युगल कहकर सम्मानित किया जाता है। जब सभ्य समाज के कहे जाने वाले युवा खुद पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं तो जंगली, गंवार कहे जाने वाले वे युवा तो पहले ही से नियंत्रण जैसी भावनाओं को जानते ही नहीं। भारतीय समाज की संस्कृति में लड़कियों को शर्म लाज से सजाया जाता है और लड़कों को बड़ों का आज्ञा पालन और आदर करना सिखाया जाता है। ये भारतीय संस्कृति ही है, जो राम कृष्ण दोनों के भगवान होने पर भी राम की सर्व-स्वीकार्यता स्थापित करती है।

उनका मर्यादा पुरुषोत्तम होना और सीता का मर्यादा का पालन करना ही वह गुण है, जो सभी पुत्र रूप में राम की और पुत्री रूप में सीता की कामना करते हैं। विदेशों के खुले वातावरण को जहां संस्कारों के लिए कोई स्थान ही नहीं है, भारत में मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, किन्तु ऐसे प्रयास कुचेष्टाएं ही कही जाएंगी, क्योंकि भारत में इन्हें कभी भी मान्यता नहीं मिल सकती, जो ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने के फेर में अपनी संस्कृति की उपेक्षा करते हैं। युवाओं को उकसाकर उन्हें रोज डे, प्रोमिस डे, प्रोपोज डे, हग डे, चॉकलेट डे जैसे भ्रमों में डालकर आगे बढ़ा रहा है, उसे देसी भाषा में

‘आवारागर्दी’ कहते हैं और उसका परिणाम शिव सैनिकों की उग्रता के रूप में दुकानों को भुगतना पड़ता है।
आज जिस चेहरे में खूबसूरती के चांद नजर आते हैं, कल को उसे अपने से अलग होने पर तेजाब से झुलसा दिया जाता है और ये लड़की के लिए जीवन भर का अभिशाप बनकर रह जाता है। इसी गलत प्रचार का ही परिणाम है कि लड़कियां गोली का, तेजाब का शिकार हो रही हैं, लड़के अपराध या फिर आत्महत्या की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। आज गुलामी का समय नहीं है, किंतु मीडिया का दायित्व आज भी बहुत अधिक है, क्योंकि इसका प्रभाव भी बहुत अधिक है। मीडिया लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है और उसे जानना ही होगा कि हम भले ही कितने अग्रगामी हो जाएं, किंतु हमारी संस्कृति में भाई भले ही किसी से प्यार कर ले किंतु अपनी बहन को उस राह पर आगे बढ़ते नहीं देख सकता और ये भी हमारी संस्कृति ही है जो आईएएस में सर्वोच्च रेंक हासिल करने वाली शेना अग्रवाल से भी विवाह के संबंध में माता-पिता की ही सोच को मान्यता दिलाती है।

इस संस्कृति के ही कारण हमारे परिवार, हमारा समाज विश्व में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं विदेशियों को आकर्षित करते हैं और जोड़ते हैं। हमें किसी और संस्कृति की नकल करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। मीडिया हमें भारतीय ही बने रहने दे। विदेशी सोच में ढालने की कोशिश न करे, क्योंकि हम कितने सक्षम हैं ये हम तो जानते ही हैं। मीडिया भी जान ले। इसलिए मीडिया आज के इस दिन रोम की संस्कृति वेलेंटाइन को पूजने और प्रमुखता देना छोड़ें और प्यार के सही अर्थ आज के युवाओं के सामने लाने का प्रयत्न करे, जिसमें प्यार के मायने वासना नहीं अपितु स्नेह और त्याग है, समर्पण और सम्मान है, विश्वास और आत्म-बलिदान है। इसीलिए तो कवि महोदय भी कह गए हैं-वक्त के रंग में यूं न ढल जिंदगी/अब तो अपना इरादा बदल जिंदगी/असलियत तेरी खो न जाए कहीं/यूं न कर दूसरों की नकल जिंदगी।

शालिनी कौशिक


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