नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। भारतीय संगीत जगत के दिग्गज गायक और अभिनेता किशोर कुमार को संगीतमय श्रद्धांजलि देने के लिए कई नामचीन कलाकार एक मंच पर जुटे हैं। सोनी लिव के शो ‘एक और बार किशोर कुमार’ में लोकप्रिय गायक शान, अलीशा चिनॉय, शाल्मली खोलगड़े, समीर टंडन और मामे खान अपनी प्रस्तुतियों से इस महान कलाकार को याद करेंगे।
संगीत करियर पर की बात
आज बुधवार को शान, अलीशा, शाल्मली, समीर और मामे खान ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने संगीत करियर पर किशोर कुमार के प्रभाव के बारे में खुलकर बात की। लोकप्रिय सिंगर शान ने कहा, ‘आज मैं जो कुछ भी हूं, चाहे वो मेरी सिंगिंग हो या मैंने जो कुछ भी सीखा है, सबकुछ उनसे प्रभावित है। उनका आभामंडल, उनका मंचीय प्रभाव, उनका अभिनय, ये सभी मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। इस लिहाज से मैं खुद को उनका शिष्य मानता हूं और मैं अकेला नहीं हूं। देशभर में मेरे जैसे कई लोग हैं, जो ऐसा ही महसूस करते हैं। इसलिए जब यह मौका मेरे सामने आया, तो मैं सचमुच बहुत उत्साहित था’।
अलीशा चिनॉय ने भी किशोर कुमार को किया याद
वहीं, अलीशा चिनॉय ने भी किशोर कुमार को याद किया। अलीशा ने फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में किशोर कुमार के साथ ‘काटे नहीं कटते’ गाना गाया था। अलीशा ने कहा, ‘मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में उनके साथ ‘काटे नहीं कटते’ गाना गाने का मौका मिला। पहली बार जब मैंने उनके साथ गाया, तो मैं बहुत उत्साहित थी। यह एक प्रेरित करने वाला अनुभव था। उन्हें परफॉर्म करते देखना और जिस सहजता से उन्होंने इसे गाया, उसे देखना मेरे लिए किसी यादगार पल से कम नहीं था। यह एक ऐसी याद है, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी।
शाल्मली खोलगड़े ने कहा
सिंगर शाल्मली खोलगड़े ने कहा, ‘किशोर कुमार को भुलाया नहीं जा सकता। कोई भी उन्हें नहीं भूल सकता… जब समीर जी ने मुझे यह गाना गाने के लिए कॉन्टेक्ट किया, तो निश्चित रूप से मुझे पता था कि किशोर दा कौन हैं? लेकिन, मैंने उनके बहुत सारे गाने नहीं सुने थे। लेकिन, जब मैंने सुनना शुरू किया, तो मुझे लगा, हे भगवान, यह वही है, जो मैंने खो दिया और तब मुझे इस प्रोजेक्ट के पीछे का मकसद समझ में आया’।
‘किशोर दा से जुड़ी मेरी सबसे पुरानी याद बचपन की है’
मामे खान ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें किशोर दा के संगीत से रूबरू कराया था। उन्होंने कहा, ‘किशोर दा से जुड़ी मेरी सबसे पुरानी याद बचपन की है, जब मेरे पिता ने मुझे पहली बार उनके संगीत से परिचित कराया था। जैसा कि मैंने पहले बताया, करीब 20-25 साल पहले हमारे गांव में बिजली भी नहीं थी। लोग रेडियो पर गाने सुना करते थे। मेरे पिता उस्ताद राणा खान और किशोर दा के गाने के तरीके, हाव-भाव और यहां तक कि उनकी भाषा में भी काफी समानता थी। एक दिन उन्होंने मुझसे कहा, ‘ध्यान से सुनो, यह किशोर दा गा रहे हैं।’ और वह पल हमेशा मेरे साथ रहा’।

