
पिछले कुछ महीनों से देश में फैलती नफरती सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं एक-एक करके सभी राज्यों को अपनी चपेट में लेती जा रही है। हर घटना की हिंसा का पैटर्न हिंदू-मुस्लिम और सामाजिक ध्रुवीकरण पर टिका होता है। राज्य दर राज्य बढ़ती हिंसा की घटनाएं जिस तरीके से उग्र रूप लेती जा रही हैं, इससे भारत के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। यदि आने वाले समय में इस तरह की हिंसा कहीं और ज्यादा न बढ़ने लगे इस पर अभी से विचार करना बहुत जरूरी है। चुनावी लाभ पाने के लिए राजनीतिक पार्टियां बहुसंख्यकवाद और धार्मिक ध्रुवीकरण कराकर सत्ता में पहुंचने के लिए कुछ भी कराने के लिए तैयार है। हरियाणा जिले के नूहू और मेवात जिलों में 31 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद द्वारा ब्रजमंडल यात्रा के दौरान भड़की हिंसा भी किसी न किसी की सोची समझी साजिश का ही परिणाम है।