Saturday, March 14, 2026
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Leh Violent Protest: छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर लद्दाख में उग्र प्रदर्शन, लेह में तनावपूर्ण हालात

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष स्वायत्तता की मांग को लेकर लेह में हालात बिगड़ गए। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस द्वारा बुलाए गए बंद और प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय उग्र हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ झड़प शुरू कर दी। पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

भूख हड़ताल से भड़की आग, वार्ता में तेजी की मांग

यह आंदोलन उस समय और तेज हो गया जब 35 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे 15 में से दो कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे हैं प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो लंबे समय से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सक्रिय हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता, जो कि 6 अक्टूबर को होनी है, उससे पहले आयोजित की जाए और इसमें ठोस निर्णय लिए जाएं।

हिंसक हुआ प्रदर्शन, बीजेपी कार्यालय के बाहर वाहन जलाया

प्रदर्शन के दौरान गुस्साई भीड़ ने बीजेपी कार्यालय के बाहर खड़े एक सुरक्षा वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस घटना ने इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर तैनात कर दिया गया है और प्रशासन स्थिति को काबू में रखने की कोशिश कर रहा है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें?

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।

संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्र को स्वायत्तता मिले।

स्थानीय नौकरियों और जमीनों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान लागू हों।

जलवायु और संस्कृति की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

क्या है छठी अनुसूची?

संविधान की छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्त प्रशासन और स्थानीय शासन के विशेष अधिकार प्रदान करती है। लद्दाख जैसे रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था की मांग वर्षों से की जा रही है।

प्रशासन और केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस ताजा प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन लगातार बढ़ते जनदबाव और भूख हड़ताल की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही संवाद प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।

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