- विद्युत निगम के साथ नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही बन सकती है किसी बडेÞ हादसे का सबब
- विक्टोरिया पार्क अग्निकांड हादसे से भी नहीं लिया जा रहा सबब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम कार्यालय के भवनों में विद्युत तारों का मकड़जाल इस तरह से फैला हुआ है। विद्युत तारों के इस मकड़जाल के कारण किस समय बडा हादसा हो जाये इंकार नहीं किया जा सकता। किसी भी समय विद्युत तारों में शॉर्ट सर्किट से उठी चिंगारी कितने बड़े हादसे का रूप ले ले कहना मुश्किल है।
इस गंभीर समस्या की तरफ न तो निगम के अधिकारियों का ही ध्यान है और न ही विद्युत निगम के कर्मचारी व अधिकारियों का। जबकि पूर्व में कई बार तारों में चिंगारी के कारण आग लगने से बच चुकी है। शायद नगर निगम एवं विद्युत निगम ने मेरठ के विक्टोरिया पार्क अग्निकांड हादसे से भी सबब नहीं लिया उन्हे किसी बड़े हादसे का इंतजार है।

विद्युत लाइनों के ढीले तार एवं केबल में किसी भी समय शॉर्ट सर्किट से चिंगारी उठने के बाद बड़े अग्निकांड हादसे के होने का डर बना रहता है। तभी तो विद्युत निगम समय समय पर विद्युत लाइनों के ढीले तारों को ठीक कराता रहता है। ताकि ढीली लाइन के तार आपस में टच होकर चिंगारी में न बदल जायें। जिसके चलते किसी भी समय बड़ा अग्निकांड न जो जाये, लेकिन महानगर में नगर निगम के भवन एवं परिसर में विद्युत तारों का मकड़जाल इस कदर फैला हुआ है,कि किसी भी समय हादसा हो सकता है।
लोगों का कहना है कि पूर्व में बरसात आदि के समय विद्युत लाइन के ढीले तारों की वजह से जमीन में करंट फैल चुका है और चिंगारी उठने के कारण आग भी लगने से बच गई है। उसके बावजूद नगर निगम व विद्युत निगम इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। शायद दोनों ही विभागों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। जबकि शॉर्ट सर्किट से आग लगने के आये दिन मामले सामने आते रहते हैं।

उसके बावजूद दोनों ही निगम इस गंभीर समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रहे। नगर निगम में सैकड़ों की संख्या में फरियादी आते हैं। उनके वाहन विद्युत तारों के नीचे खडेÞ रहते हैं। वहीं, लोग भी परिसर में विद्युत तारों के नीचे खडेÞ रहते हैं, यदि विद्युत तार या केबल टूटकर गिर जाये
तो किसी बड़े हादसे के होने से इंकार नहीं किया जा सकता। यह हालात तो तब है,जबकि मेरठ में शॉर्ट सर्किट के कारण विक्टोरिया पार्क जैसा अग्निकांड हो चुका है। फिलहाल दोनो ही निगम विद्युत तारों के इस मकड़जाल को ठीक करने में लापरवाही बरतते दिखाई पड़ रहे हैं। शायद उन्हे किसी बडेÞ हादसे का इंतजार शेष है।

