जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच भारत ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने देश की सभी एयरलाइंस को खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्रों से बचने और सुरक्षा जोखिम का आकलन कर वैकल्पिक उड़ान मार्ग अपनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एयरलाइंस को आकस्मिक योजनाएं तैयार रखने को कहा गया है, ताकि यात्रियों और उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एअर इंडिया को मिली अस्थायी राहत
डीजीसीए ने इससे पहले एअर इंडिया को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में अस्थायी छूट दी है। ईरान और इराक के हवाई क्षेत्रों पर प्रतिबंध के चलते एयर इंडिया को लंबी दूरी वाले वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे उड़ानों का समय बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह छूट हालात सामान्य होने तक लागू रहेगी।
सरकार एयरलाइंस के संपर्क में
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार लगातार एयरलाइंस के संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक अहम कॉरिडोर है, जहां से यूरोप और अमेरिका के लिए बड़ी संख्या में विमान गुजरते हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि कुछ हवाई अड्डे बंद हैं और इससे संचालन प्रभावित हो रहा है।
संघर्ष से बढ़ी वैश्विक चिंता
पश्चिम एशिया में तनाव 28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद तेज हो गया। इसके बाद अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच टकराव बढ़ा, और ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई है।
बढ़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो अंतरराष्ट्रीय विमानन, ईंधन कीमतों और वैश्विक व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। भारत सरकार और एयरलाइंस फिलहाल स्थिति से निपटने के लिए समन्वय में काम कर रही हैं।

