- पश्चिम से कई चेहरों को मिलेगा मंत्रिमंडल में स्थान
- ठाकुर पंकज सिंह को डिप्टी सीएम बनाने की उठ रही मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भाजपा के लिए पश्चिमी यूपी सबसे बड़ी चुनौती थी। वजह थी किसान आंदोलन। क्योंकि लंबे समय तक कृषि कानून के खिलाफ किसानों को दिल्ली बॉर्डर पर धरना चला, जिसके बाद भाजपा भी भयभीत थी। पश्चिमी यूपी की 71 सीटों का चुनाव भाजपा के पूरे संगठन के लिए सबसे मुश्किल था। तमाम चुनौतियों के बावजूद भाजपा ने पश्चिमी यूपी की 71 सीटों में से 40 सीटों पर जीत दर्ज की।
वेस्ट यूपी की जनता ने तमाम चुनौतियों के बावजूद भाजपा को जीत का तोहफा दिया है, उसका रिटर्न गिफ्ट यहां के भाजपा नेताओं को अवश्य मिलेगा। मंत्रीमंडल में जगह मिलेगी, इसकी प्रबल संभावनाएं बनी हुई हैंं। कहा जा रहा है कि होली के बाद मंत्रिमंडल का 21 या 22 मार्च को गठन हो सकता है। इसी दिन तमाम चेहरे जो मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, शपथ लेंगे, उसमें कई संभावित चेहरे हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती हैं।
पहले भी पश्चिमी यूपी को उप मुख्यमंत्री का पद देने की मांग उठी थी, लेकिन इस बार प्रबल दावेदारी बन गई हैं। क्योंकि किसान आंदोलन समेत तमाम चुनौतियों के बीच भी पश्चिमी यूपी ने भाजपा को पूरा सम्मान दिया है। पंकज सिंह को डिप्टी सीएम बनाने की मांग भी उठ रही हैं, लेकिन भाजपा हाईकमान इस पर क्या फैसला लेगी, यह अभी भविष्य के गर्भ में हैं। लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने वाले ठाकुर पंकज सिंह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रियता के कारण पंकज सिंह कैबिनेट मंत्रिमंडल के सबसे प्रबल दावेदार हैं।
थानाभवन से चुनाव हार चुके सुरेश राणा के बाद पार्टी ठाकुर चेहरे के रूप में इन्हें सामने ला सकती है। इन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी माना जाता है, इसका फायदा मिल सकता है। अनूपशहर से विधायक बने संजय शर्मा ब्राह्मण चेहरा हैं। इस क्षेत्र से पिछली सरकार में अनिल शर्मा शिकारपुर से विधायकी जीते थे और वन राज्य मंत्री बने। इस बार पार्टी अनिल शर्मा की जगह संजय शर्मा को स्थान दे सकती है।
रालोद के गढ़ बागपत की बड़ौत सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने वाले केपी मलिक और बागपत सीट से दूसरी बार चुनाव जीतने वाले योगेश धामा को जाटों में सेंध लगाने का इनाम भी मिल सकता है। केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान, पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी मोहित बेनीवाल के बाद इस समय पार्टी के पास ऐसा कोई बड़ा जाट नेता या मंत्री नहीं हैं। इसी वजह से केपी मलिक और योगेश धामा को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है।
ऐसी प्रबल संभानाएं बनी हुई हैं। रालोद के गढ़ बागपत और बड़ौत से सीट निकालना बड़ी बात हैं। किसान आंदोलन के विपरीत हालातों में हुई जीत के बाद पार्टी जाट चेहरा, अच्छी जीत का रिवॉर्ड दे सकती है। कपिलदेव अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर सीट से दूसरी बार जीत हासिल की है। पिछली बार भी उनको मंत्रिमंडल में जगह मिली थी, इस बार भी जगह मिल सकती हैं।
साहिबाबाद से विधायक बने सुनील शर्मा ने 403 सीटों पर सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। उन्हें भी मौका मिल सकता है। सहारनपुर की नकुड़ सीट से जीते मुकेश चौधरी को अपनी जीत का तोहफा मिल सकता है। क्योंकि मुकेश चौधरी ने भाजपा के बागी पूर्व मंत्री धर्मसिंह सैनी को शिकस्त दी है। साथ ही मुकेश चौधरी बड़ा गुर्जर चेहरा भी हैं। यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक चार महीने पहले अचानक से राज्यमंत्री बनने वाले हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक का नाम भी संभावित है।
उनकी भी मजबूत दावेदारी मंत्रिमंडल के लिए मानी जा रही हैं। दलित चेहरा होने के अलावा पिछली बार के मंत्री रहे हैं, इसलिए पार्टी इन्हें रिपीट कर सकती है। इनके साथ मेरठ दक्षिण से दूसरी बार विधायक चुने गए डा. सोमेंद्र तोमर का नाम भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। पिछली बार भी उनका नाम चला था, मगर ऐन वक्त पर मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई थी, लेकिन इस बार उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की प्रबल संभावनाएं बनी हैं। क्योंकि गुर्जरों ने भाजपा को बंफर वोटिंग की हैं, जिसका तोहफा मिल सकता हैं।

