Monday, March 30, 2026
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एक दो जख्म क्या, पूरा जिस्म है छलनी——

  • जेल में मुलाकात के बाद आजम खान की हालत बयां की प्रमोद कृष्णम ने
  • बोले-बेहद खफा और आहत हैं सपा से मिले सिले से
  • एक छोटा कमरा, टाट का बिछौना, एक दरी और तन्हां आजम खान
  • एक दो नहीं, जैसे पूरा जख्म छलनी——

जनवाणी ब्यूरो ।

लखनऊ: आजकल जेल में बंद सपा नेता आजम खान से मिलने के सिलसिले परवान चढ़ रहे हैं। पहले रालोद जयंत चौधरी ने आजम से मुलाकात की तो फिर शिवपाल यादव उनसे मिलने पहुंच गए। अब इस मुलाकाती में नया नाम प्रमोद कृष्णम का जुड़ा है।

बकौल कृष्णम, आजम के साथ अच्छा सलूक नहीं किया जा रहा। अखिलेश यादव से नाराजगी के दरमियां, प्रमोद ने आजम की मनस्थिति की एक शेर के माध्यम से बयां किया है। बकौल कृष्णम, एक दो जख्म नहीं, पूरा जिस्म है छलनी।

इस मुलाकात के बाद प्रमोद कृष्णम ने आजम खान के हालात का वर्णन एक पुराने शेर से किया। उन्होंने कहा कि आजम खान से बहुत सी बातें हुईं। उनको सार्वजनिक करना मुनासिब नहीं लेकिन इतना कह सकता हूं कि उन्हें देखकर मुझे लगा कि एक दो जख्म नहीं पूरा जिस्म है छलनी। गौरतलब है कि प्रमोद यूं तो कांग्रेस से जुड़े हैं लेकिन उन्हें शिवपाल यादव का भी खासा करीबी माना जाता है।

आज तक चैनल से बातचीत में प्रमोद ने कहा कि आजम खान जैसे कद्दावर नेता को जिस तरह के मुकदमों में जेल में रखा गया है मुझे शर्म आती है अपने यहां के लोकतांत्रिक ढांचे पर।

जो इंसान संसद का सदस्य रहा है। भारत की राजनीति का एक अहम हिस्सा रहा है। कितनी बार मिनिस्टर, कितनी बार एमएलए रहा है, कितने लोगों की खिदमत की है, उस शख्स के साथ जेल में बेहद दर्दनाक बर्ताव किया जा रहा है।

छोटा सा कमरा है, टाट का बिछौना

प्रमोद कृष्णम ने जेल में आजम खान के हालात का वर्णन करते हुए कहा कि एक छोटा सा कमरा है। न उसमें कोई चारपाई,न खाट, न तख्त्,ए न कोई अच्छा बिस्तर, टाट का एक बिछौना है।

दरी है। गंदा सा फर्श है और उसी के पास एक खुला बाथरूम है। कृष्णम ने सवाल उठाए कि क्या यह संभव है आजम खान पर जो मुकदमे लगाए गए हैं, वो सही हो। इन मुकदमों में दो साल से ज्यादा हो गया लेकिन जमानत नहीं होने दी जा रही है।

एक साल ज्यादा उन्हें कोरोना में बीत गया। शुगर हो गया है। उनका इलाज चल रहा है। उनके दांत में दर्द है। बेहद तकलीफ है।

सपा से बेहद आहत हैं आजम

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि मुझे लगता है कि आजम खान पर जब यह संकट आया तो उन्हें उम्मीद थी कि सपा उनका साथ देगी। लेकिन वह यह भूल बैठे थे कि सपा ने जब नेताजी के साथ ही अच्छा सलूक नहीं किया तो आजम खान साहब के साथ क्या अच्छा सलूक होगा।

इसी का नतीजा है कि उन्होंने सपा नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया। जब इंसान का दिल दुखता हैं मुसीबत आती तो उसे उम्मीद होती है कि मेरे जो अपने हैं वो मेरा साथ देंगे। लेकिन आजम खान को लगता है कि सपा ने मुसीबत के वक्त उनका साथ नहीं दिया। उनके दिल को यह तकलीफ पहुंची है।

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