नीतू गुप्ता
मनुष्य जब तक जवान रहता है, वह सोचता है कि अपने भविष्य के लिए या परिवार के भविष्य के लिए खूब मेहनत कर अधिक से अधिक धन जमा कर ले पर 40 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसे लगता है कि उसके भविष्य के लिए धन के साथ-साथ उसका स्वस्थ रहना भी अति आवश्यक है किंतु तब तक देर हो चुकी होती है। यदि हम जवानी में ही इस दिशा में प्रयास शुरू कर दें तो हम अपने जीवन को कई कष्टों से दूर रख सकते हैं। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। यदि हम अभी से संभल जाएं तो अपने स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
स्वस्थ वातावरण
जिस वातावरण में आप रहते हैं, उसके आसपास औद्योगिक क्षेत्र नहीं होना चाहिए। मेन रोड के एकदम पास भी न रहे। यातायात के कारण वातावरण जल्दी प्रदूषित होता है। पर्यावरण का सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है। यदि पर्यावरण प्रदूषित होगा तो भोज्य पदार्थों में विषैले तत्व बढ़ जाते हैं जो स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालते हैं। प्लास्टिक में पैक खाद्य सामग्री का प्रयोग यथासंभव न करें। सदा फिल्टर किया हुआ जल ही पिएं। यथासंभव आर्गेनिक फूड का प्रयोग करें क्योंकि आर्गेनिक फूड में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाता।
भावनाओं की अभिव्यक्ति करें
भावनाओं को वश में करना सीखें। इससे मानसिक दबाव का स्तर कम होता है। यदि मानसिक दबाव का स्तर कम रहे तो शरीर व मन दोनों ठीक रहते हैं। इसके लिए अपने क्रोध पर नियंत्राण करना सीखें। जब आप क्रोध में हों तो अकेले ऐसी जगह बैठें जहां कोई विध्न डालने वाला न हो। अपना गुस्सा तकिए पर निकालें। थोड़ी ही देर में आप शान्त महसूस करेंगे। अगर रोकर मन शान्त होता हो तो थोड़ा रो लें जिससे हल्का महसूस होगा और मन का गुबार आंसुओं के साथ बह जाएगा। अलग कमरे में शीशे के सामने बोल बोल कर अपने मन के भाव उगलें ताकि मन शान्त हो सके। क्रोध कई बीमारियों को निमंत्राण देता है जैसे उच्च रक्तचाप, एसिडिटी, अल्सर, हृदय रोग आदि।
नींद पूरी लें
नींद पूरी न होने से स्मरण शक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है और शरीर तेजी से बूढ़ा होता है, इसलिए 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए। इसके लिए सोने से एकदम पहले भरपेट भोजन न करें, न ही चाय कॉफी का अधिक सेवन करें। सोने से पहले तनावमुक्त रहने का प्रयास करें। सोने व उठने का समय तय करें। बिस्तर साफ सुथरा रखें। सोने वाला कमरा हवादार हो, इस बात का भी ध्यान रखें।
तनावमुक्त रहें
वैसे तो तनाव आधुनिक जीवन शैली की देन है और इससे बचना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं है। तनाव स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है और कई रोगों को आमंत्रण भी देता है जैसे हाई ब्लड प्रैशर, हार्ट अटैक आदि। तनावमुक्त रहने के लिए सिर की व माथे की मालिश करते रहें और कनपटियों पर हल्का-हल्का दबाव भी डालें। आप किन कारणों से तनावग्रस्त रहते हैं, इसके बारे में गंभीरता से सोचें और उन्हें दूर करने के उपाय ढूंढे। यदि आपको अकेले रहने से तनाव अधिक होता हो तो मित्रों-संबंधियों के बीच अधिक समय बिताएं। यह सच है कि ‘दु:ख बांटने से घटता है और सुख बांटने से बढ़ता है।’ यदि आप परेशान हैं तो अपने किसी हमदर्द मित्र या संबंधी से अपनी परेशानी कहें और उसका हल ढूंढने का प्रयास करें। ध्यान रखें मित्रा या संबंधी हमदर्द हो और आपका मजाक उड़ाने वाला न हो। स्वयं ही परेशानी और दु:ख झेलते रहने से हल नहीं निकलता। दूसरों के दु:ख में भी शामिल हों। स्वयं को परेशानियों से बचाने के लिए किसी ऐसी समाज-सेवी संस्था के सदस्य बन जाएं जिससे आपका दिल भी लगा रहे और समाज सेवा भी होती रहे। विशेषत: जन्मदिन, त्यौहार आदि मित्रों और संबंधियों के साथ मिलकर मनाएं।
आनंदित रहें
खुश रहने से तन मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। वही काम करें जिसमें मजा आए। बेमन से न तो काम ठीक होता है न ही मजा आता है। कभी मन उदास हो तो चुटकुले व हास्य कथाएं पढ़ें। टी. वी. पर भी हास्य प्रोग्राम देखें जिससे मन प्रफुल्लित रहे। अपनी पसंद का संगीत सुनें। मित्रों से मिलें। यदि लिखने के शौकीन हैं तो लिखें, जीवन की खुशनुमा घटनाओं को याद करें। पुराने एलबम देखें। इनमें से जिस चीज का मन हो करें और आनंदित महसूस करें।
रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने पर ध्यान दें
निरोग रहने के लिए शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति होना जरूरी है। नियमित सैर, व्यायाम आदि करें, साथ ही एंटी आक्सीडेंट युक्त फूड लें। खुले वातावरण में लंबी सांसें लें। भोजन में ताजे फल और कच्ची सब्जियों को स्थान दें। खूब पानी पिएं ताकि शरीर से विषैले तत्व पसीने और मूत्र के रूप में बाहर निकल जाएं। सब्जी बनाते समय लहसुन, प्याज, अदरक और मसालों का उचित प्रयोग करें। इन सब से भी शरीर को रोग प्रतिरोधक शक्ति मिलती है।
हड्डियों की मजबूती पर भी ध्यान दें
उम्र के साथ-साथ शरीर की हड्डियां कमजोर पड़ती हैं जिनसे जोड़ों में दर्द होता है। यदि हम शुरू से उचित आहार तथा व्यायाम करें तो हम इस समस्या पर नियंत्रण रख सकते हैं। कम वसा वाला भोजन लें, प्रोटीन की मात्रा बढ़ा लें और कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए प्रतिदिन सोया दूध, सोया दही, और सोया पनीर की उचित मात्रा लें। कैफीनयुक्त पेय का सेवन बहुत कम कर दें। नमक और चीनी की मात्रा भी सीमित लें।
एक बाजू से अधिक वजन न उठाएं।
दोनों बाजुओं पर बराबर जोर डालें। दोनों टांगों पर बराबर जोर डालकर खड़े हों। खाना बनाते समय स्टैंडिग रसोई में ऊंचे स्टूल का प्रयोग करे। वेस्टर्न टॉयलेट प्रयोग करें। जमीन पर न बैठें। हड्डियों पर हल्का दबाव डालने वाले व्यायाम करें जिनसे हड्डियों की सघनता बढ़ी रह सके जैसे एरोबिक्स, वेट लिफ्टिंग आदि। सोयाबीन एक ह्णवंडर फूडह्य है जिसका लाभ आप अवश्य उठाएं।
हृदय के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें
हृदय शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग है। इसकी विशेष देखभाल करें। इसके लिए आवश्यकता है जीवन शैली में थोड़ा सुधार लाने की। भोजन में सैचुरेटेड फैट्स का सेवन कम कर भुनी सब्जियों या उबली सब्जियों का सेवन अधिक करें। धूम्रपान करते हों तो बिलकुल त्याग दें। नियमित रूप से हृदय को मजबूत बनाने वाले व्यायाम करें और सुबह शाम सैर पर जायें। मांस, मक्खन, घी व चीज का सेवन न करें।
दूध भी वसारहित लें, उसी दूध का दही और पनीर लें। खाने में तेज मसालों का सेवन न करें।

